इस दिन है निर्जला एकादशी, शुभ मुहूर्त, इस बार निर्जला एकादशी पर दुर्लभ संयोग

 
mahendra inida news, new delhi

हर वर्ष निर्जला एकादशी का इंतजार रहता है, ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि पर निर्जला एकादशी मनाई जाती है। इस शुभ मौके पर व्रत रख लक्ष्मी नारायण जी की पूजा की जाती है। इसी के साथ ही साथ ही उनके निमित्त निर्जला एकादशी का पारण रखा जाता है। वहीं, द्वादशी तिथि पर पारण किया जाता है। इस व्रत में निर्जला उपवास रखा जाता है। 


व्रत के दौरान एकादशी तिथि के सूर्योदय से लेकर द्वादशी तिथि के सूर्योदय होने तक अन्न और जल ग्रहण नहीं किया जाता है।निर्जला एकादशी कब है?
ज्योतिषचार्य पंडित लालचंद शर्मा ने बताया कि वैदिक पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि 24 जून को शाम 06 बजकर 12 मिनट से शुरू होगी। वहीं, 25 जून को रात्रि 08 बजकर 09 मिनट पर समाप्त होगी। इस प्रकार 25 जून को निर्जला एकादशी का व्रत रखा जाता है। साधक 07 जून यानी द्वादशी तिथि पर दोपहर 01 बजकर 44 मिनट से लेकर शाम 04 बजकर 31 मिनट के मध्य पारण कर सकते हैं। 

ज्योतिषचार्य पंडित नीरज शर्मा ने बताया कि सनातन धर्म में ज्येष्ठ महीने का खास महत्व है। यह महीना जगत के पालनहार भगवान विष्णु को समर्पित होता है। इस महीने में अति मंगलकारी निर्जला एकादशी मनाई जाती है। इस व्रत की महिमा सनातन शास्त्रों में निहित है। कहते हैं कि निर्जला एकादशी व्रत करने से साधक को सभी एकादशियों के समान फल मिलता है। इसे भीमसेनी एकादशी भी कहा जाता है। 

कब मनाई जाती है निर्जला एकादशी?
निर्जला एकादशी तिथि प्रारंभ और समापन
प्रारंभ: 24 जून को शाम 06 बजकर 12 मिनट पर
समापन: 25 जून को रात 08 बजकर 09 मिनट पर
निर्जला एकादशी पर दुर्लभ संयोग
पंडित नीरज शर्मा ने बताया कि निर्जला एकादशी के दिन शिव और सिद्ध योग का संयोग बन रहा है। इसके साथ ही रवि योग का भी निर्माण हो रहा है। इस शुभ अवसर पर स्वाति और विशाखा नक्षत्र का संयोग है। वहीं, अभिजित मुहूर्त और वणिज और बव करण के भी योग हैं।

करें निर्जला एकादशी पर दान
निर्जला एकादशी पर दान करना बेहद शुभ माना जाता है। इसके लिए निर्जला एकादशी के दिन अन्न- धन और वस्त्र का दान करें । साथ ही साधक छाता, जूते और चप्पल, मिट्टी के कलश, फल और फूल आदि चीजों का दान करें।