उधम सिंह महान क्रांतिकारी, साहस व शौर्य के प्रतीक थे: बाबा ब्रह्मदास महाराज
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मुख्य धाम बाबा भूमणशाह, ग्राम बाबा भूमणशाह, सिरसा में शिरोमणि शहीद उधम सिंह कंबोज के 86वें शहीदी दिवस पर शहीदी महासम्मेलन-2026 हर्षोल्लास से आयोजित किया गया। इस संबंधी जानकारी देते हुए डेरे के सेवक सचिव विनोद एडवोकेट ने बताया कि शहीदी सम्मेलन को लेकर डेरे को भव्य रूप से सजाया गया। सर्वप्रथम बाबा ब्रह्मदास महाराज शहीद उधम सिंह की जन्मस्थली सुनाम, जिला संगरूर में स्मारक स्थल पर श्रद्धासुमन अर्पित किए।
उसके पश्चात सन्नौर जिला पटियाला में उधम सिंह के शहीदी महासम्मेलन में शहीद उधम सिंह के जीवन के बारे में विस्तार से बताया। सर्वप्रथम डेरेके गद्दीनशीन संत बाबा ब्रह्मदास महाराज के पावन सान्निध्य में समस्त श्रद्धालुओं ने शहीद उधम सिंह की प्रतिमा पर पुष्पांजलि व माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि दी। इस दौरान शहीद उधम सिंह अमर रहे, इंकलाब जिंदाबाद शहीदों के सपनों को साकार करो, शहीदों के विचारों को पाठ्यक्रम में शामिल करो... के नारों से वातावरण गुंजायमान हो गया।
इस मौके पर बाबा ब्रह्मदास महाराज ने कहा कि उधम सिंह महान क्रांतिकारी, स्वतंत्रता सेनानी, साहस व शौर्य के प्रतीक थे। 13 अप्रैल 1919 के जलियांवाला बाग हत्याकांड ने उधम सिंह के जीवन की दिशा बदल दी। इस घटना के बाद उन्होंने अंग्रेजी शासन के अत्याचारों का बदला लेने का संकल्प लिया। उन्होंने विदेशों में भी भारत की आजादी के लिए कार्य किया तथा क्रांतिकारी आंदोलन से जुड़े रहे। 31 जुलाई 1940 को लंदन में शहीद उधम सिंह को फांसी दी गई थी।
बाबा ब्रह्मदास महाराज ने कहा कि फांसी से पहले उन्होंने ''इंकलाब जिंदाबाद'' का नारा बुलंद कर देशभक्ति और बलिदान का अमर संदेश दिया। सम्मेलन के दौरान बच्चों द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुतियां भी दी गई, जिनका उपस्थिति ने तालियों की गड़गड़ाहट के साथ उत्साहवर्धन किया। तत्पश्चात शहीद उधम सिंह के जीवन पर आधारित नाटक की प्रस्तुतियां दी गई। नाटक में कलाकारों द्वारा दी गई मार्मिक प्रस्तुतियों ने उपस्थित श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया। सम्मेलन के पश्चात लंगर की व्यवस्था की गई।