मूल्य एवं सुसंस्कार ही कुशल प्रशासन की नींव हैं -  गीता भारती, कमिश्रर, हिसार मण्डल

 

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आध्यात्म वो ताकत है जिसने हमारे भारत देश को पूरे विश्व में सर्वोच्च स्थान प्राप्त कराया है। यहां के महान सन्त, उत्कृष्ट संस्कृति और आध्यात्म के प्रकाश ने भारत शब्द के अर्थ को सार्थक सिद्ध किया है, इस पवित्र भूमि पर विचरण कर चुके देवी देवताओं की मनमोहक प्रतिमाएं आज भी सुशासन का सन्देश देती हैं। यह उदगार ब्रह्माकुमारीज़ की वरिष्ठ विभूति एवं ओम शांति रिट्रीट सेन्टर, गुरूग्राम की निदेशिका राजयोगिनी आशा दीदी ने हिसार रोड पर स्थित आनन्द सरोवर में संस्था के प्रशासक प्रभाग द्वारा आयोजित -- बेहतर प्रशासन के लिए मूल्य एवं आध्यात्मिकता -- विषय पर अपना मुख्य सम्बोधन देते हुए व्यक्त किए।

उन्होंने कहा कि हमारा वास्तविक और मूल स्वभाव ही सदभाव, नम्रता अर्थात आध्यात्मिकता है, अगर हम इन मूल्यों को गहराई से समझते हुए इन्हें बढ़ाने का लक्ष्य रखें तो हमारी प्रशासन कला निश्चित ही सशक्त और सुदृढ़ होगी। इसी विषय को और विस्तृत करते हुए दीदी ने महान ग्रन्थ श्रीमद भगवत गीता जी की शिक्षाओं का भी उल्लेख किया और जीवन में साइंलेन्स को स्थान देने के लिए प्रेरित किया। कुशल प्रशासन के लिए निर्णय शक्ति के महत्व पर प्रकाश डालते हुए दीदी ने व्यर्थ विचारों को समाप्त करने और क र्मों को श्रेष्ठ बनाने के लिए अपनी आंतरिक शक्तियों को जागृत करने की भी प्रेरणा दी।


इस मौके बतौर मुख्य अतिथि उपस्थित हुई हिसार मण्डल की कमिश्रर बहन गीता भारती जी ने भी अपने अनुभवों को संाझा करते हुए कहा कि आध्यात्मिक मूल्य और श्रेष्ठ संस्कार कुशल प्रशासन के आधार स्तम्भ है जिसका अनुसरण हमारी कार्य प्रणाली को सहज और प्रभावशाली बनाता है। उन्होंने अपने जीवनकाल में प्रशासनिक अधिकारी के रूप में की सेवाओं के दौरान मूल्यों के समावेश से प्राप्त मानसिक सुकून और शांति को उपलब्धि बताया । ब्रह्माकुमारीज़ संस्थान द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम की सराहना करते हुए कमिश्रर ने आयोजकों का आभार प्रकट किया और इसे समय की जरूरत बताया।
चौ. देवी लाल विश्व विद्यालय के कुलगुरू डा. विजय कुमार जी नें भी बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की और उक्त विषय पर अपने विचार रखे। अपने कार्यक्षेत्र में आध्यात्मिक मूल्यों की उपयोगिता पर प्रकाश डालते हुए उन्होने कहा कि वर्तमान समय छात्र-छात्राओं के उज्वल भविष्य के लिए आध्यात्मिक मूल्यों की अवधारणा बहुत महत्चपूर्ण है जिसके लिए चौ. देवी लाल विश्व विद्यालय और ब्रह्माकुमारीज़ के संयुक्त तत्वाधान में  निरन्तर प्रयास किए जा रहें हैं। 


कार्यक्रम में बतौर विशिष्ट अतिथि उपस्थित हुए सिरसा के ए डी सी- श्री अर्पित सिंघल जी ने आम व्यक्ति के जीवन में आने वाली समस्याओं का निदान करने के लिए खुद के जीवन में नैतिक एवं आध्यात्मिक मूल्यों की धारणा क ो जरूरी बताया और कहा कि जब तक स्वयं का व्यक्तिगत जीवन मूल्यनिष्ठ नहीं है तब तक कार्यक्षेत्र में सकारात्मक परिणाम नहीं आ सकते। डी एस पी श्री राजेश कुमार जी ने भी इस अवसर पर अपने उदबोधन में उक्त विषय पर प्रकाश डाला और कहा कि श्रेष्ठ चरित्र अपना कर ही प्रशासन को श्रेष्ठ बनाया जा सकता है।


आनन्द सरोवर की निदेशिका राजयोगिनी बिन्दू दीदी ने बताया कि प्रशासन या सुशासन केवल प्रशासनिक अधिकारियों का ही विषय नहीं है, इसके विशाल दायरे में हर व्यक्ति समाहित है, और स्वयं पर शासन करके अर्थात सयंम और नियम के आधार से कुशल प्रशासन हो सकता है क्योंकि आत्मा का अध्ययन ही आध्यात्म है। इसलिए अपनी इन्द्रियों पर राज्य करने वाला बाहरी रूप से भी अच्छा प्रशासक बन सकता है।

कार्यक्रम के दौरान  प्रस्तुत गीत, नृत्य और ईश्वरीय अनुभूति नें सभा में अलौकिक उर्जा का संचार किया।

इस आयोजन में सिरसा जिला के वरिष्ठ न्यायविद, मुख्य प्रशासनिक अधिकारी, राजनितिज्ञ, आर एस एस के महानुभाव तथा प्रमुख शिक्षाविदों सहित बड़ी संख्या में गणमान्य लोग मौजूद रहे।