शनि जयंती कब है 2026: शनि जयंती पर तेल चढ़ाते वक्त न करें ये गलतियां, जानिए तेल दान का नियम 

 
mahendra india news, new delhi

शनिदेव की अगर किसी पर कृपा हो जाए तो उसकी हर मुश्किलें दूर हो जाती है। ख्शनि जयंती पर लोग तेल चढ़ाते हैं। मगर कई लोग नियमों का पालन नहीं करते हैं। शनि जयंती ज्‍येष्‍ठ माह की अमावस्‍या को मनाई जाती है। ज्योतिषचार्य पंडित नीरज शर्मा ने बताया कि पंचांग के मुताबिक ज्‍येष्‍ठ अमावस्‍या तिथि 16 मई 2026 की सुबह 5 बजकर 11 मिनट से शुरू होकर 16 व 17 मई की मध्‍यरात्रि 1 बजकर 30 मिनट पर समाप्‍त होगी. उदयातिथि के आधार पर 16 मई, शनिवार को शनि जयंती मनाई जाएगी। 

ज्योतिषचार्य पंडित नीरज शर्मा ने बताया कि शनि देव को मनाने और उनकी कृपा पाने के लिए शनि जयंती का दिन सर्वश्रेष्‍ठ होता है. उस पर इस साल शनि जयंती शनिवार के दिन ही पड़ रही है, इससे इसका दोगुना फल पाया जा सकता है, 


 तेल कैसे चढ़ाएं शनिदेव को  
आमतौर पर शनि देव को तेल चढ़ाते समय लोग एक बड़ी गलती करते हैं कि तेल उनके सिर से अर्पित करते हैं. जबकि शनि देव के ना तो ठीक सामने खड़े होना चाहिए और न उनकी आंखों में देखना चाहिए. शनि देव के सिर्फ चरणों में ही तेल अर्पित करें।  वह भी पहले पैर के अंगूठे पर तेल चढ़ाएं और फिर सारे पांव पर


 तेल दान करने की विधि 
शनि जयंती या शनिवार को तेल दान करने का वक्त सूर्यास्‍त के बाद का होता है। सूर्यास्‍त से रात्रि 8 बजे तक का समय तेल दान करने के लिए सबसे अच्‍छा माना गया है। सरसों का तेल या तिल का तेल ही दान करना उचित होता है। इसी के साथ ही कोशिश करें कि तेल के साथ काला तिल, काले उड़द या काले कपड़े का भी दान करें. इससे अधिक फल मिलता है. 

संभव हो तो अपनी तेल दान करने से पहले कांसे या लोहे के पात्र में तेल लेकर पहले उसमें अपना चेहरा देखें, फिर कटोरे सहित तेल दान कर दें. इन उपायों को करके आप शनि दोष से राहत पा सकते हैं. 

नोट : ये खबर केवल जागरूक करने के मकसद से लिखी गई है, इसके लिए ज्योतिषचार्य व सामान्य जानकारी के अनुसार समाचार लिखा गया है।