हरियाणा में 20 साल से सेवाएं दे रहे हरियाणा के गेस्ट अध्यापकों को लेकर बड़ी खबर: पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट का बड़ा आदेश
हरियाणा प्रदेश के गेस्ट अध्यापकों के लिए राहत भरी खबर सामने आ रही है। प्रदेश के राजकीय स्कूलों में करीबन 20 सालों से गेस्ट फैकल्टी शिक्षक और व्याख्याता के तौर पर सेवाएं दे रहे अध्यापकों को पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट से बड़ी राहत मिली है।
आपको बता दें कि जस्टिस संदीप मोदगिल की पीठ ने महत्वपूर्ण निर्णय सुनाते हुए हरियाणा सरकार को निर्देश दिया है कि साज 2014 की नियमितीकरण नीति के तहत याचिकाकर्ताओं की सेवाओं को रेगूलर किया जाए और उन्हें सभी परिणामी सेवा एवं सेवानिवृत्ति फायदा दिए जाएं।
बता दें कि मामला सुखविंदर सिंह एवं अन्य द्वारा दायर याचिका से जुड़ा था, जिसमें उन्होंने हरियाणा सरकार की 18 जून 2014 की नियमितीकरण नीति के आधार पर अपनी सेवाएं नियमित करने की मांग की थी।
याचिकाकर्ताओं ने क्या कहा?
याचिकाकर्ताओं ने कहा कि उन्हें साल 2005-06 में राजकीय स्कूलों में रिक्त पदों के विरुद्ध गेस्ट फैकल्टी शिक्षक और व्याख्याता के रूप में नियुक्त किया गया था। नियुक्ति प्रक्रिया विज्ञापन जारी करने, चयन समितियों के गठन, आवेदनों की जांच और मेरिट सूची तैयार करने के बाद पूरी की गई थी।
हरियााा प्रदेश सरकार ने कोर्ट में दलील दी कि याचिकाकर्ताओं की नियुक्ति केवल अस्थायी व्यवस्था के तौर पर की गई थी और वे रेगूलर भर्ती प्रक्रिया के तहत नियुक्त नहीं हुए थे, इसलिए वे नियमितीकरण के पात्र नहीं हैं। हालांकि हाई कोर्ट ने इस तर्क को खारिज कर दिया।
कोर्ट ने कहा कि यदि सरकार की दलील स्वीकार कर ली जाए तो नियमितीकरण नीति का उद्देश्य ही खत्म हो जाएगा, क्योंकि संविदा कर्मचारी स्वाभाविक रूप से रेगूलर भर्ती प्रक्रिया से बाहर ही नियुक्त होते हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ताओं की नियुक्तियां "बैकडोर एंट्री" या गुप्त तरीके से नहीं हुई थीं, बल्कि सार्वजनिक प्रक्रिया के तहत योग्य उम्मीदवारों का चयन किया गया था।
ये कहा हाई कोर्ट ने
आपको बता दें कि हाई कोर्ट ने यह भी कहा कि हरियाणा सरकार स्वयं मान चुकी है कि स्कूलों में अध्यापकों की भारी कमी के कारण इन शिक्षकों को नियुक्त किया गया था और करीबन 20 सालों तक उनकी सेवाएं लगातार ली जाती रहीं। अदालत ने टिप्पणी की कि यदि इतने लंबे समय तक शिक्षकों की सेवाएं ली गईं तो उन्हें केवल "स्टॉप गैप अरेंजमेंट" बताना पूरी तरह आत्मविरोधी और अनुचित है।
अदालत ने अपने फैसले में शिक्षकों की भूमिका पर भी विस्तृत टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि शिक्षक समाज और राष्ट्र निर्माण की आधारशिला होते हैं तथा उन्हें मनमाने ढंग से "स्पेयर" की तरह इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। न्यायालय ने कहा कि लगातार 20 वर्षों तक संविदा पर कार्य लेने के बाद राज्य अब यह नहीं कह सकता कि ये केवल अस्थायी कर्मचारी थे।
आपको बता दें कि फैसले में सुप्रीम कोर्ट के "मदन सिंह बनाम हरियाणा राज्य" मामले का भी उल्लेख किया गया, जिसमें सर्वोच्च अदालत ने 2014 की नियमितीकरण नीतियों की वैधता को बरकरार रखा था। हाई कोर्ट ने कहा कि अब नीति की वैधता पर विवाद समाप्त हो चुका है और याचिकाकर्ता नीति की शर्तों को पर्याप्त रूप से पूरा करते हैं।
अंतत: हाई कोर्ट ने याचिका स्वीकार करते हुए हरियाणा सरकार को निर्देश दिया कि 2 माह के भीतर याचिकाकर्ताओं की सेवाओं को रेगूलर किया जाए और उन्हें सभी सेवा एवं रिटायरल लाभ प्रदान किए जाएं।
