home page

नाथूसरी चोपटा के दयानंद स्कूल में अब छात्र सीखेंगे जर्मन भाषा, 'ऑसबिल्डिंग प्रोग्राम' से खुलेंगे विदेश में करियर के द्वार

 | 
Students at Dayanand School in Nathusari Chopta will now learn German; the 'Ausbilding Program' will open doors to careers abroad.
Mahendra india news, new delhi

नाथूसरी चोपटा (SIRSA): ग्रामीण क्षेत्र के विद्यार्थियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने और उन्हें वैश्विक करियर के अवसरों से जोड़ने के उद्देश्य से नाथूसरी चोपटा स्थित दयानंद सीनियर सेकेंडरी स्कूल ने एक अनूठी पहल शुरू की है। स्कूल परिसर में अब विद्यार्थियों को जर्मन भाषा का विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है, ताकि वे जर्मनी के प्रतिष्ठित 'ऑसबिल्डिंग प्रोग्राम' (Ausbildung Program) का लाभ उठा सकें।

Students at Dayanand School in Nathusari Chopta will now learn German; the 'Ausbilding Program' will open doors to careers abroad.

क्या है ऑसबिल्डिंग प्रोग्राम और इसके फायदे?
जर्मनी का ऑसबिल्डिंग प्रोग्राम एक 'वर्क-स्टडी' मॉडल है, जहाँ छात्रों को पढ़ाई के साथ-साथ व्यावहारिक प्रशिक्षण (Apprenticeship) दिया जाता है। इस कार्यक्रम की सबसे बड़ी विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:

फ्री स्टडी वीजा: इस प्रोग्राम के तहत चयनित छात्रों को जर्मनी के लिए निःशुल्क स्टडी वीजा प्राप्त करने में आसानी होती है।

शिक्षा के साथ कमाई: प्रशिक्षण के दौरान छात्रों को प्रतिमाह स्टाइपेंड (Stipend) भी मिलता है, जिससे उनका रहना और खाना सुलभ हो जाता है।

सुनिश्चित रोजगार: कोर्स पूरा होने के बाद छात्रों को जर्मनी में ही स्थायी नौकरी और भविष्य में पीआर (PR) मिलने की प्रबल संभावना होती है।

WhatsApp Group Join Now

स्थानीय स्तर पर वैश्विक शिक्षा
दयानंद स्कूल के प्रबंधन ने बताया कि अक्सर ग्रामीण क्षेत्रों के प्रतिभाशाली बच्चे जानकारी और भाषाई कौशल के अभाव में अंतरराष्ट्रीय अवसरों से वंचित रह जाते हैं। इसी कमी को दूर करने के लिए स्कूल ने विशेषज्ञ शिक्षकों के माध्यम से जर्मन भाषा की कक्षाएं शुरू की हैं।

स्कूल के प्रधानाचार्य ने कहा:

"हमारा लक्ष्य केवल किताबी ज्ञान देना नहीं, बल्कि अपने छात्रों को आत्मनिर्भर बनाना है। जर्मन भाषा सीखकर हमारे छात्र न केवल यूरोप में उच्च शिक्षा प्राप्त कर सकेंगे, बल्कि बिना किसी बड़े आर्थिक बोझ के एक शानदार करियर की शुरुआत भी कर पाएंगे।"

अभिभावकों में उत्साह
स्कूल की इस पहल से अभिभावकों और स्थानीय निवासियों में भारी उत्साह है। ग्रामीणों का मानना है कि इस तरह के व्यावसायिक और भाषाई कोर्स से इलाके के युवाओं को विदेशों में रोजगार के नए अवसर मिलेंगे और उन्हें भारी-भरकम डोनेशन या एजेंटों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे।

कैसे होगा चयन?
कार्यक्रम के अंतर्गत छात्रों को जर्मन भाषा के प्रारंभिक स्तर (A1, A2 और B1) की तैयारी करवाई जाएगी। भाषा की परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद, स्कूल छात्रों को जर्मनी के विभिन्न संस्थानों में ऑसबिल्डिंग के लिए आवेदन करने में भी मार्गदर्शन प्रदान करेगा।