home page

कोखदान नाटक ने बेटियों की शिक्षा और समान अधिकार का दिया सशक्त संदेश

 | 
The play 'Kokhdaan' delivered a powerful message regarding the education and equal rights of daughters

mahendra india news, new delhi
हरियाणा कला परिषद, कुरुक्षेत्र के तत्वावधान में के.एल. थिएटर प्रोडक्शन्स एवं जेसीडी रंगशाला के संयुक्त संयोजन तथा संस्कार भारती हरियाणा, शाखा सिरसा के विशेष सहयोग से आयोजित नाट्यपाठ शाला कार्यक्रम के अंतर्गत तीन दिवसीय बाल नाट्य उत्सव का समापन आज विवेकानंद स्कूल, सिरसा में सामाजिक सरोकारों से ओत-प्रोत नाटक कोखदान के प्रभावशाली मंचन के साथ सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एजुकेशन डिपार्टमेंट आॅफ हरियाणा के सेवानिवृत्त उपनिदेशक दीन दयाल वर्मा रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्कार भारती के संरक्षक राम सिंह यादव ने की, जबकि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के जिला प्रचारक जसबीर मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहे।

उत्सव के अंतिम दिवस पर कलाकृति आर्ट्स द्वारा प्रस्तुत सामाजिक नाटक कोखदान का निर्देशन निर्देशिका कुसुम कलाकृति ने किया। नाटक ने समाज में बेटियों के प्रति व्याप्त भेदभाव, कन्या भ्रूण हत्या जैसी कुप्रथाओं तथा शिक्षा के अधिकार जैसे महत्वपूर्ण विषयों को अत्यंत संवेदनशील और प्रभावशाली ढंग से मंचित किया। नाटक का मूल संदेश था कि बेटियां किसी भी दृष्टि से बेटों से कम नहीं हैं। उन्हें शिक्षा, सम्मान, अवसर और समान अधिकार देना केवल संवैधानिक दायित्व ही नहीं, बल्कि एक सभ्य और विकसित समाज की पहचान भी है।

प्रस्तुति में यह दशार्या गया कि जब परिवार बेटियों को समान अवसर प्रदान करता है, तो वे अपने ज्ञान, प्रतिभा और संस्कारों से परिवार, समाज और राष्ट्र का नाम रोशन करती हैं। मुख्य अतिथि दीन दयाल वर्मा ने अपने संबोधन में कहा कि शिक्षा ही वह माध्यम है, जो समाज में समानता और जागरूकता का मार्ग प्रशस्त करती है। बेटियों को शिक्षित और आत्मनिर्भर बनाना राष्ट्र निर्माण की दिशा में सबसे बड़ा निवेश है। भारतीय संस्कृति में नारी को शक्ति, सृजन और संस्कार का स्वरूप माना गया है। समाज तभी प्रगतिशील बन सकता है जब बेटियों को समान सम्मान और अवसर प्राप्त हों। मुख्य वक्ता जसबीर ने कहा कि रंगमंच समाज में सकारात्मक परिवर्तन का प्रभावी माध्यम है। ऐसे नाटक केवल मनोरंजन नहीं करते, बल्कि समाज को सोचने और बदलने की प्रेरणा भी देते हैं।

WhatsApp Group Join Now

उन्होंने बाल कलाकारों एवं आयोजकों के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि संस्कृति और संस्कारों के संरक्षण में ऐसे आयोजनों की महत्वपूर्ण भूमिका है। तीन दिनों तक चले इस बाल नाट्य उत्सव में प्रस्तुत मुक्तिधाम, जहर और कोखदान जैसे सामाजिक सरोकारों से जुड़े नाटकों ने दर्शकों को परिवार, नशामुक्ति, बेटी शिक्षा और सामाजिक उत्तरदायित्व जैसे विषयों पर गंभीर चिंतन करने के लिए प्रेरित किया। उपस्थित सभी अतिथियों ने इस सफल आयोजन के लिए हरियाणा कला परिषद, संयोजक संस्था के.एल. थियेटर प्रोडक्शन्स एवं जेसीडी रंगशाला, नाट्य दलों और कलाकारों को बधाई देते हुए भविष्य में भी ऐसे जनजागरणकारी सांस्कृतिक आयोजनों के निरंतर आयोजन की आवश्यकता पर बल दिया।

अंत में कार्यक्रम के संयोजक कर्ण लढा ने विवेकानंद बाल मंदिर वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय सिरसा, महाराजा अग्रसेन स्कूल सिरसा एवं संस्कार भारती शाखा सिरसा का इस नाट्य उत्सव को सफल बनाने में सहयोग देने पर धन्यवाद किया और हरियाणा कला परिषद कुरुक्षेत्र के निदेशक एवं उपाध्यक्ष महेश जोशी का विशेष आभार प्रकट किया। इस अवसर पर संस्कार भारती शाखा सिरसा के अध्यक्ष जयंत शर्मा, कोषाध्यक्ष राजेन्द्र नेहरा, उपाध्यक्ष राजेन्द्र शर्मा, गंगाधर वर्मा, लेखा निरीक्षक सुभाष चंद्र शर्मा, प्रख्यात साहित्यकार डॉ. राज कुमार निजात, संस्कार भारती कार्यकारिणी सदस्य भारत भूषण, सतीश कंदोई, सुखविंदर सिंह दुग्गल एवं पविकांत मित्तल सहित महाविद्यालय के विद्यार्थी एवं अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।