सिरसा के संत निरंकारी सत्संग भवन में आयोजित शिविर में 161 ने किया रक्तदान
सिरसा। जब हृदय में करुणा, प्रेम और एकत्व की दिव्य चेतना जागृत होती है, तब मानव अपने सीमित स्वार्थों से ऊपर उठकर सम्पूर्ण सृष्टि के कल्याण का सशक्त माध्यम बन जाता है। परोपकार, करुणा और परमार्थ जैसे अलौकिक मूल्यों से प्रकाशमान यह पावन अवसर उस दिव्य अनुभूति का प्रतीक बना, जहां मानव को मानव हो प्यारा, एक-दूजे का बने सहारा का संदेश केवल शब्दों तक सीमित न रहकर हृदयों में जीवंत हुआ। सतगुरु माता सुदीक्षा महाराज एवं निरंकारी राजपिता की असीम कृपा से 24 अप्रैल का दिन बाबा गुरबचन सिंह की दिव्य स्मृति में, मानव एकता दिवस के रूप में मनाया गया।
जिसमें सिरसा समेत समूचे देश के निरंकारी सत्संग भवनों पर सत्संग और रक्तदान शिविरों का आयोजन किया गया। इस अवसर पर ब्रांच सिरसा के बरनाला रोड स्थित संत निरंकारी सत्संग भवन में सत्संग एवं रक्तदान शिविर का आयोजन हुआ जिसमे सिविल अस्पताल के अनुभवी चिकित्सक एवं रेडक्रॉस की टीम ने रक्तदाताओं की समुचित स्वास्थ्य जांच के उपरांत सुरक्षित, सुव्यवस्थित एवं प्रभावी ढंग से रक्तदान की प्रक्रिया सम्पन्न कराई, जिसमें 161 यूनिट रक्त संकलित किया गया। इस अवसर पर आयोजित मानव एकता दिवस समागम में विनोद खन्ना सैक्टर इंचार्ज दिल्ली ने अपने प्रवचन में बताया कि केवल एक दिन बाबा गुरबचन सिंह को याद कर लेना काफी नहीं है। उन्होंने जो जीवन मानव मात्र को जीकर दिखलाया उन कर्मों को अपने व्यवहार में लाना होगा।
इस समागम में जिला सिरसा व फतेहाबाद से हजारों की साधसंगत ने भाग लिया। क्षेत्रीय संचालक सुरेन्द्र सिंह के मार्गदर्शन में सेवादल ने सारी सेवाओं को बखूबी निभाया। संपूर्ण आयोजन के दौरान स्वच्छता, सतर्कता एवं सेवा-भाव का विशेष ध्यान रखा गया, जिससे यह पहल केवल जीवनदायिनी सेवा तक सीमित न रहकर मानवता, करुणा और उत्तरदायित्व के उच्चतम आदर्श का प्रतीक बनकर उभरी। संत निरंकारी मण्डल के सचिव जोगिन्दर सुखीजा ने जानकारी देते हुए बताया कि समूचे भारतवर्ष के लगभग 200 स्थानों पर रक्तदान शिविरों का सफल आयोजन किया गया, जिससे लगभग 40,000 यूनिट रक्त संकलित किया गया
, जो निष्काम सेवा, परोपकार और मानवता के प्रति समर्पण की जीवंत अभिव्यक्ति बनकर उभरा। उन्होंने आगे कहा कि युगप्रवर्तक बाबा गुरबचन सिंह की स्मृति में यह दिवस वर्षभर चलने वाली सेवा-सरिता का शुभारंभ है, जिसके अंतर्गत देशभर में लगभग 705 स्थानों पर रक्तदान शिविर आयोजित किए जाएंगे, जो करुणा और एकत्व की भावना को निरंतर सुदृढ़ करेंगे। युगप्रवर्तक बाबा गुरबचन सिंह ने सत्य, सरलता और सद्भावना का मार्ग दिखाते हुए युवाओं को नशामुक्त जीवन अपनाने और ऊर्जा को समाजसेवा में लगाने की प्रेरणा दी। बाबा हरदेव सिंह ने रक्त नाड़ियों में बहे, नालियों में नहीं का संदेश देकर सेवा को जीवन का अनिवार्य अंग बनाया,
जिसे सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज निरंतर आगे बढ़ा रही हैं। उल्लेखनीय है कि रक्तदान की यह पावन परंपरा पिछले चार दशकों से निरंतर जारी है। अब तक 9,174 रक्तदान शिविरों के माध्यम से लगभग 15,00,230 यूनिट रक्त संकलित किया जा चुका है, जो मानव सेवा के प्रति निरंकारी मिशन की अटूट प्रतिबद्धता का जीवंत प्रमाण है।
