1962 मोबाइल सेवा से गांवों में पशुपालन को मिली नई रफ्तार: डा. धु्रव
सिरसा। जिले में पशुपालकों को बेहतर और समय पर पशु चिकित्सा सेवाएं देने के लिए शुरू की गई 1962 मोबाइल वेटरनरी सेवा अब धरातल पर असर दिखा रही है। इस संबंध में डॉ. ध्रुव सिहाग ने बताया कि विभाग की ओर से पशुपालकों को जागरूक करने के लिए लगातार अभियान चलाए जा रहे हैं। इन अभियानों के तहत संतुलित आहार, समय पर टीकाकरण, बीमारियों की रोकथाम और पशुओं की सही देखभाल के बारे में जानकारी दी जाती है, जिससे पशुधन की उत्पादकता में सुधार हो रहा है।
डा. सिहाग ने बताया कि इस पहल के तहत वर्तमान में 5 मोबाइल यूनिट्स सक्रिय हैं, जो गांव-गांव जाकर पशुओं का इलाज करने के साथ-साथ पशुपालकों को जरूरी मार्गदर्शन भी दे रही हैं। इस सेवा की सबसे बड़ी खासियत यह है कि अब ग्रामीणों को अपने पशुओं के इलाज के लिए शहरों का रुख नहीं करना पड़ता। इससे जहां समय की बचत हो रही है, वहीं खर्च भी कम हो रहा है। उन्होंने बताया कि अब तक करीब 30 हजार से अधिक पशुओं का सफलतापूर्वक उपचार किया जा चुका है
, जो इस योजना की सफलता को दर्शाता है। यह सेवा हरियाणा सरकार और पशुपालन एवं डेयरी विभाग की एक महत्वपूर्ण पहल है, जिसे पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल के तहत संचालित किया जा रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में पशु स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाना और पशुपालकों की आय बढ़ाना है। कुल मिलाकर, 1962 मोबाइल वेटरनरी सेवा सिरसा जिले में पशुपालकों के लिए एक भरोसेमंद सहारा बन चुकी है, जो गांव स्तर पर पशु चिकित्सा सुविधाओं को नई मजबूती दे रही है।
