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विदेश से लौटी हरियाणवी बहू ने बदली गांव की तस्वीर, खोले विकास के द्वार; महिलाओं की सुरक्षा के लिए लगाए सीसीटीवी कैमरे

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A Haryanvi daughter-in-law who returned from abroad transformed the village, opening doors to development; CCTV cameras installed for women's safety
mahendra india news, new delhi

हरियाणा प्रदेश में सरपंच की बगडोर बहुत से महिलाओं के हाथों में हैं। इनमें कई महिलाओं ने विकास कार्य करवा कर गांव की तस्वीर ही बदल दी है। इन सरपंच में कैथल जिले के गांव प्रेमपुरा महिला सरपंच भी शामिल है। एक पढ़ी-लिखी महिला सरपंच के समर्पण, स्वच्छता और सुरक्षित ग्रामीण सोच से बनी वह तस्वीर है, जो इस गांव को आदर्श बना दिया।

बता दें कि प्रेमपुरा गांव की एम.ए पास बहू परविंद्र कौर पति सतनाम सिंह के साथ इंग्लैंड में रह रही थी। 5 वर्ष पहले गांव लौटे इस दंपती ने अपने निजी कोष से करीबन एक करोड़ रुपये गांव के विकास और जनसेवा के कार्यों पर खर्च किए। इनके उल्लेखनीय योगदान को देखते 2 बार जिला प्रशासन गांव की सरपंच को सम्मानित कर चुका है।

सुरक्षा पर पुरा ध्यान 
गांव प्रेमपुरा को एनआरआइ गांव के नाम से भी पहचाना जाता है। गांव की कुल आबादी करीबन 2500 है, इनमें से 300 लोग विभिन्न देशों में रहते हैं। पंचायत चुनाव में मतदान करने समेत सभी सामाजिक कार्यक्रमों में शामिल होने के लिए अधिकतर जरूर आते हैं।

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ग्रामीण बताते हैं कि यहां महिलाओं और बेटियों की सुरक्षा को लेकर 28 सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। रात्रि के वक्त सुरक्षा को लेकर गार्ड तैनात किया गया है। इसी के साथ ही बेटियों की पढ़ाई के लिए ई-लाइब्रेरी खोलने की तैयारी चल रही है। गांव में पार्क बनाया गया है, जहां लोगों के लिए ओपन जिम की सुविधा भी है।

इस गांव में स्वच्छता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि गलियां तो दूर, नालियों में भी कचरा दिखाई नहीं देता। कचरे के निस्तारण के लिए प्लांट लगाया हुआ है। सामुदायिक केंद्र बनाया गया है। इसी के साथ ही सडक़ें शहर के सेक्टर से भी स्वच्छ नजर आती हैं। सडक़ों के दोनों तरफ पेड़ लगाए गए हैं। जल संरक्षण के प्रति ग्रामीण जागरूक हैं और पेयजल व्यर्थ नहीं बहने दिया जाता। पानी की सप्लाई लाइन में सभी जगह टोंटियां लगाई गई हैं।


महिला सरपंच परविंद्र बताती हैं कि उनके एक जेठ अमेरिका व एक इंग्लैंड में हैं। वह भी इंग्लैंड में रहती थीं, लेकिन मन में गांव के विकास और ग्रामीणों का जीवन स्तर सुधारने का विचार उनके आया। इसके बाद यहां लौटने पर चुनाव लड़ा तो लोगों ने सरपंच बना दिया। 

उन्होंने अपने निजी कोष से 50 लाख रुपये खर्च कर गांव का मुख्य द्वार बनवाया। 18 लाख रुपये से एंबुलेंस खरीदी, इससे आसपास के दस गांव के को फायदा हो रहा है। इसकी सुविधा निशुल्क है।

इसी के साथ ही गुरुद्वारा के पाठी सहित जरूरतमंदों के मकान, गरीब बेटियों के विवाह सहित अन्य सामाजिक कार्य पर करीब 25 लाख रुपये खर्च किए। 5 लाख रुपये से पार्क, डेढ़ लाख रुपये से गांव के सरकारी स्कूल के सुंदरीकरण और जरूरतमंद लोगों की आंखों के आपरेशन पर करीब 5 लाख रुपये खर्च किए गये।


सरकार में पैरवी कर गांव के समीप से गुजर रही ड्रेन पर 22 करोड़ रुपये से पुल बनवाया गया है। गांव में पार्क और ओपन जिम बनाया गया है। ई-लाइब्रेरी खोलने की प्रक्रिया चल रही है।