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अधिकारियों की कारगुजारी से प्रताड़ित अधिवक्ता सीएम के समक्ष जलाएगा कानून की डिग्रियां -परिवार सहित उपायुक्त कार्यालय पर आमरण-अनशन की मांगी अनुमति

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A lawyer harassed by the actions of officials will burn his law degrees before the Chief Minister. He and his family have sought permission to hold a hunger strike at the Deputy Commissioner's office.

 mahendra indianews
-तहसीलदार व पटवारी के खिलाफ कार्रवाई की मांग
सिरसा। इंतकाल की एवज में अधिकारियों द्वारा नजराना मांगे जाने के रोषस्वरूप एक अधिवक्ता ने 15 मई को सिरसा दौरे के दौरान सीएम के समक्ष अपनी डिग्रियां जलाने व परिवार सहित आमरण-अनशन की चेतावनी देते हुए बार एसोसिएशन के प्रधान गंगाराम ढाका के नेतृत्व में जिला उपायुक्त को एक ज्ञापन सौंपा है।

साथ ही तहसीलदार व पटवारी के खिलाफ कार्रवाई की भी मांग की है। जिला उपायुक्त को दिए गए पत्र में अधिवक्ता रणजीत सिंह पुत्र भूरा राम निवासी गांव जमाल ने बताया कि वह जिला न्यायालय में पिछले 14 वर्ष से बतौर अधिवक्ता प्रैक्टिस कर रहा है। उसने बताया कि मेरे भाई ने वाक्या गांव जमाल में वसीका नंबर -7 दिनांक 01 दिसंबर 2025 को मार्फत प्रार्थी ने अपनी पत्नी रोशनी व प्रार्थी के भाई राम सिंह की पत्नी कम्लेश के नाम 15 किले 3 कनाल भूमि खरीदी थी।

यह भूमि हमारे परिवार ने अनुसुइया पुत्री बीरबल निवासी सोनीपत से खरीद की है। यह भुमि अनुसुइया पुत्री बीरबल की खुदकाश्त भूमि थी। उपरोक्त भूमि का लम्बे समय तक इंतकाल दर्ज न किया गया। इसके बाद प्रार्थी जब भूमि का इंतकाल दर्ज करवाने के लिए हलका पटवारी सुरेश से मिला तो वह बोला कि जमीन आपने सस्ती ली है। इसलिए इंतकाल के 50,000/- रुपए मेरी फीस व एक लाख रुपए नायब तहसीलदार साहब की फीस लगेगी। प्रार्थी ने जब इतने पैसे देने से मना किया तो बोला की मैं इस पर लाल पेन से ऐसे लिखूंगा की आप इंतकाल करवा ही नहीं सकोगे और उसके बाद पटवारी ने सचमुच प्रार्थी के साथ ऐसा ही किया।

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जब इस बारे में प्रार्थी ने तहसीलदार चोपटा से शिकायत की तो उन्होंने भी कोई संतुष्टिजनक जबाव नहीं दिया। आखिर में प्रार्थी का यह शक सही साबित हुआ जब तहसीलदार चोपटा ने इस इंतकाल का मुतनाजा करके एस.डी.एम. सिरसा के पास भेज दिया। यही नहीं वह पटवारी व तहसीलदार के रवैये से खफा होकर डी.सी. सिरसा से भी 2-3 दफा मिला, लेकिन उपरोक्त समस्या का कोई समाधान नहीं हुआ। आज तक प्रार्थी का यह इंतकाल सुनवाई के अधीन एस.डी.एम सिरसा के पास लम्बित है। पीड़ित ने बताया कि उसके अलावा इस भूमि में से आधी भूमि 15 किले 3 कनाल के करीब बसीका नंबर 3546 के मार्फत सावित्री पत्नी मनफूल व मैना पत्नी बृजलाल निवासीयान गांव जमाल ने खरीदी है।

इस भूमि सम्बधी भी इंतकाल नं08037 को पटवारी-तहसीलदार चोपटा द्वारा इसी प्रकार मुतनाजा कर दिया गया है और यह इंतकाल भी सुनवाई के अधीन एस.डी.एम. सिरसा के न्यायालय में लम्बित है। उसनेबताया कि जिस भूमि को उपरोक्त दोनों वसीका नम्बरान 3546 व 3547 के मार्फत अनुसुइया पुत्री बीरबल ने बेचा है, इस भूमि को अनुसुइया का एक भतीजा कृष्ण चन्द्र पुत्र लक्ष्मीनारायण हड़पना चाहता है। अनुसुइया ने अपने भतीजे से अपनी भूमि को बचाने के लिए लम्बी कानूनी लड़ाईया लड़ी है और हर लड़ाई में कृष्ण चन्द्र पुत्र लक्ष्मी नारायण की हार हुई है। यही नहीं भूमि सम्बंधी सारी कानूनी लड़ाई हार जाने के बावजूद भी उपरोक्त कृष्ण चन्द्र की एक फर्जी व फोटोस्टेट दरखास्त पर इंतकाल नं08037 व 8040 को इस प्रकार मुतनाजा किया जाना सरासर कानून के खिलाफ है

व तर्कसंगत नहीं है, क्योंकि दरखास्तकर्ता कृष्ण चन्द्र पुत्र लक्ष्मीनारायण का बेची गई भूमि से किसी तरह का कोई लेना देना नहीं है। वह बतौर अधिवक्ता सिरसा न्यायालय में वकालत कर रहा है। न्यायालय में पीड़ितों को न्याय दिलवाने के लिए एक अहम कड़ी के रूप में कार्य करता है, लेकिन यहां मुझे अफसोस के साथ यह लिखना पड़ रहा है कि अगर इस तरह से खरीद की हुई भूमि के इंतकाल मुतनाजा किए जा रहे हैं तो अवश्य ही प्रार्थी के लिए विचारणीय प्रश्न है। ऐसे में कानून की डिग्री को रखने का कोई औचित्य ही उसके पास नहीं बचा है।