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एक युद्ध अपने विरुद्ध संकल्प कार्यशाला का जिला कारागार सिरसा में समापन

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A war against oneself: Resolution Workshop concludes at District Jail Sirsa

mahendra india news, new delhi
स्वामी विज्ञानानंद बोले, अवसाद से मुक्ति का उपाय नशा नहीं, अपितु ब्रह्मज्ञान प्रदत्त आत्मिक शक्ति है      
सिरसा। दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान की ओर से जिला कारागार सिरसा में कैदी बन्धुओं के सर्वांगीण विकास के लिए एक युद्ध अपने विरुद्ध संकल्प वर्कशॉप का आयोजन किया गया। जिसमें आशुतोष महाराज के शिष्य स्वामी विज्ञानानंद ने कैदी बंधुओं को संबोधित करते हुए कहा कि भौतिकतावाद की अंधी दौड़ में युवा वर्ग के पास भौतिक सुख सुविधाएं तो हैं, परंतु मानसिक शांति न होने के कारण वह चिंता एवं अवसाद से मुक्ति के लिए नशे की दलदल में फंस कर अपनी चारित्रिक शक्ति और नैतिक मूल्यों का ह्रास कर रहा है।

    नशे की परिभाषा देते हुए स्वामी जी ने बताया की न शम् शांतिर्मया इति नशा अर्थात् जिसमे तनिक भी शांति नहीं, वही नशा है। स्वामी जी के अनुसार अवसाद से मुक्ति का उपाय नशा नहीं, अपितु इस मानसिक व्याधि को खत्म करने के लिए आत्मिक शक्ति के विकास की आवश्यकता है। हमारे राष्ट्र भक्तों ने राष्ट्र भक्ति का नशा किया और चारित्रिक विकास से ओतप्रोत हो भारत माता को स्वतंत्रता दिलाई। चरित्र भारत भूमि का आधार है और आज उसी धर्म भूमि भारत में अधिकतर युवा शक्ति का चारित्रिक पतन हो रहा है।

आवश्यकता है कि युवाओं को ब्रह्मज्ञान की शक्ति से जाग्रत होकर राष्ट्र में अग्रगण्य भूमिका निभाने की। आज के युवाओं के आदर्श यदि स्वामी विवेकानंद, शिवाजी, दयानन्द सरस्वती, चाणक्य, भगत सिंह इत्यादि होंगे तो भारत को फिर से जगतगुरु के पद पर आसीन किया जा सकता है। कार्यक्रम का शुभारंभ स्वामी विज्ञानानंद कारगार अधीक्षक जसवंत सिंह व सहायक अधीक्षक फूल कुमार द्वारा ज्योति प्रज्ज्वलित कर किया गया। इस अवसर पर चरित्र रक्षण करने और नैतिक मूल्यों से ओतप्रोत होने के लिए स्वामी जी ने युवा शक्ति को संकल्प भी दिलवाया।

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इस उपलक्ष्य पर साध्वी संतोष भारती, पूषा भारती, पूजा भारती व हरजिंदर ने क्रान्तिकारी राष्ट्र भक्ति के गीत गाकर कैदी बंधु जनों के हृदयों में देश भक्ति की भावना का प्रसार किया। समस्त कैदी बंधुओं ने कार्यक्रम की प्रशंसा करते हुए भविष्य में भी ऐसे कार्यक्रमों के आयोजन हेतु संस्थान से आग्रह भी किया।