जीवन में शांति, स्पष्टता और संतुलन के लिए मौन साधना को अपनाएं: डा. इंद्र गोयल
mahendra india news, new delhi
26 जून 2025 से 5 अगस्त 2025 तक संपन्न 40 दिवसीय मौन साधना मेरे जीवन का एक गहन आंतरिक अनुभव रही। इसी अनुभव और समाज में मिले सकारात्मक संकेतों के आधार पर अब 19 जनवरी से 27 जनवरी तक 8 दिवसीय पूर्ण मौन का संकल्प लिया गया है। यह मौन पिछले 40 दिनों की साधना का विस्तार है एक और गहराई में उतरने का अवसर। यह साधना स्वयं के लिए तो है ही, साथ ही यह उन सभी के लिए भी एक मौन आमंत्रण है, जो अपने जीवन में थोड़ी शांति, स्पष्टता और संतुलन चाहते हैं।
डा. इंद्र गोयल ने बताया कि इस 40 दिन की साधना की विशेषता यह थी कि 24 लोगों ने प्रतिदिन क्लॉक-वाइज एक-एक घंटे का मौन रखकर, पूरे 40 दिनों तक निरंतर भावनात्मक और चेतनात्मक सहभागिता निभाई। यह कोई औपचारिक आयोजन नहीं था, बल्कि मौन के प्रति एक साझा संवेदना थी, जिसने समाज में बिना शब्दों के अपना संदेश दिया। इस सामूहिक मौन का प्रभाव यह हुआ कि समाज के अन्य लोगों ने भी अपनी-अपनी क्षमता और समय के अनुसार मौन अपनाया। किसी ने कुछ मिनट, किसी ने आधा घंटा, तो किसी ने एक घंटे का मौन रखा। इससे यह स्पष्ट हुआ कि मौन न तो कठिन है और न ही पलायन, बल्कि यह आज के तनावपूर्ण जीवन में एक आवश्यक विराम है।
मौन साधना के दौरान यह अनुभव हुआ कि जब शब्द रुकते हैं, तब मन की चंचलता शांत होती है। विचार स्पष्ट होने लगते हैं, निर्णय में विवेक आता है और संबंधों में सहजता बढ़ती है। मौन ने यह सिखाया कि कम बोलना नहीं, बल्कि सही समय पर सही बोलना ही वास्तविक संवाद है। आज जब हर ओर शब्दों की अधिकता है, बहस, सूचना और प्रतिक्रिया का शोर है, ऐसे समय में मौन स्वयं में एक संदेश है। यह साधना यह सिद्ध करती है कि परिवर्तन भाषणों से नहींए व्यवहार और अनुभव से आता है। मौन कोई त्याग नहीं, बल्कि चेतना की जागृति है और जब एक व्यक्ति मौन में उतरता है, तो समाज में शांति की संभावना स्वत: जन्म लेती है।
