Aeroponics Agriculture: हरियाणा प्रदेश में हवा में होगी आलू की खेती, एरोपोनिक्स तकनीक का हब बनेगा ये क्षेत्र
हरियाणा प्रदेश के अंदर अब हवा में आलू की खेती होगी। एरोपोनिक्स कृषि की एक आधुनिक और उन्नत तकनीक है जिसमें पौधों को मिट्टी के बिना, हवा में उगाया जाता है। इसके लिए कुरुक्षेत्र, करनाल में एमएचयू और शामगढ़ में स्थित आलू प्रौद्योगिकी केंद्र के आसपास का क्षेत्र एरोपोनिक्स तकनीक का हब बनेगा। यहां बिना मिट्टी और हवा में लटकती जड़ों के माध्यम से आलू के उच्च गुणवत्ता वाले, वायरस-मुक्त मिनी-ट्यूबर (बीज) तैयार किए जाएंगे। एरोपोनिक्स कृषि की एक आधुनिक और उन्नत तकनीक है जिसमें पौधों को मिट्टी के बिना, हवा में उगाया जाता है
प्रदेश के किसानों को मिलेगा
प्रदेश सरकार किसानों को बेहतर सुविधा देगी। इसके लिए पारंपरिक खेती की तुलना में स्मार्ट बागवानी किसानों के लिए आर्थिक और व्यावहारिक रूप से गेम-चेंजर साबित होने वाली है। हाइड्रोपोनिक्स और एरोपोनिक्स तकनीकों में 85 से 95 फीसद तक कम पानी की आवश्यकता होती है। पानी की बूंद-बूंद का सीधा उपयोग पौधों की जड़ों तक पोषक तत्व पहुंचाने में होता है, जिससे गिरते भूजल स्तर वाले जिलों के किसानों के लिए खेती जारी रखना संभव होगा।
आपको बता दें कि आज पूरी दुनिया आज क्लाइमेट चेंज से जूझ रही है। तापमान में अप्रत्याशित वृद्धि और अनियमित बरसात के दौर में पारंपरिक फसलें दम तोड़ रही हैं। भविष्य में केवल वही तकनीकें टिक पाएंगी जो पर्यावरण के अनुसार स्वयं को ढाल सकें। स्मार्ट बागवानी कंप्यूटर और सेंसर आधारित तापमान नियंत्रण के कारण भविष्य की खाद्य सुरक्षा की गारंटी बनेगी।
हरियाणा प्रदेश सरकार द्वारा लिया गया स्मार्ट बागवानी का रोड मैप दूसरे प्रदेशों के लिए प्रेरणादायी है। यूरोपीय संघ और मिडल ईस्ट के देश अब केवल उन्हीं कृषि उत्पादों को आयात करते हैं जो रोगमुक्त और ट्रेसेबल जिसका उत्पादन स्रोत स्पष्ट हो। हरियाणा की कोल्ड चेन नीति और एफपीओ क्लस्टर्स के माध्यम से जब इन एक हजार एकड़ से निर्यात गुणवत्ता की सब्जियां और फल निकलेंगे, तो देश वैश्विक बागवानी बाजार में एक बड़ी शक्ति बनकर उभरेगा। -डॉ. संजय कुमार, चेयरमैन, एसआरबी नई दिल्ली।
हरियाणा में प्रदेश में स्मार्ट बागवानी का रोडमैप तैयार, एक हजार एकड़ में स्मार्ट बागवानी, डिजिटल क्रांति की ओर मुड़ेंगे प्रदेश के किसान
हरियाणा प्रदेश की सरकार किसानों पर विशेष ध्यान दे रही है। किसानों को समय समय पर आधुनिक खेती के लिए जागरूक करने के साथ बेहतर सुविधा दे रही है। अब इसी कड़ी में प्रदेश के सीएम नायब सिंह सैनी के प्रयासों से खाद्यान्न के क्षेत्र में देश को आत्मनिर्भर बनाने वाला हरियाणा प्रदेश अब एक और ऐतिहासिक कृषि परिवर्तन की दहलीज पर है।
हरियाणा प्रदेश सरकार ने एक हजार एकड़ क्षेत्र को अत्याधुनिक स्मार्ट बागवानी के दायरे में लाने का रोडमैप तैयार कर लिया है। यह महत्वाकांक्षी स्कीम सारे हरियाणा में मांग आधारित क्लस्टर माडल से धरातल पर उतरेगी।
आपको बता दें कि जलवायु परिवर्तन, गिरते भूजल स्तर और छोटी होती जोत जैसी गंभीर चुनौतियों के बीच यह पहल एरोपोनिक्स (हवा में खेती), हाइड्रोपोनिक्स (पानी में खेती), वर्टिकल फार्मिंग (बहुमंजिला खेती) और सेंसर-आधारित ग्रीन हाउस तकनीकों से हरियाण के कृषि परिदृश्य को पूरी तरह बदलने जा रही है। इसका सीधा उद्देश्य वर्ष 2030 तक राज्य में बागवानी क्षेत्र को दोगुना और कुल उत्पादन को तीन गुना करना है।
जानें किस जिले को क्या मिली जिम्मेदारी
हरियाणा प्रदेश की सरकार एक हजार एकड़ के टारगेट को मांग और क्लस्टर आधारित माडल पर लागू कर रही है, जिसमें प्रदेश के विभिन्न जिलों को उनकी मौजूदा विशेषज्ञता के आधार पर प्राथमिकता दी जा रही है।
दिल्ली-एनसीआर बेल्ट
बता देें कि गुरुग्राम, फरीदाबाद और झज्जर जिलों को प्रीमियम और कमर्शियल हाइड्रोपोनिक्स एवं इनडोर वर्टिकल फार्मिंग के लिए चुना गया है। दिल्ली व गुरुग्राम के 5 सितारा होटलों, प्रीमियम सुपर मार्केट के नजदीक होने के कारण यहां लेट्यूस, चेरी टमाटर, रंगीन शिमला मिर्च और स्ट्राबरी जैसे उच्च मूल्य वाले उत्पादों की सीधे मार्केटिंग आसान होगी।
इसी के साथ ही सोनीपत, करनाल, कुरुक्षेत्र पानीपत, अंबाला जिला पहले से ही मशरूम उत्पादन में भारत में अग्रणी हैं। यहां नियंत्रित वातावरण और वर्टिकल रैक प्रणालियों का विस्तार करके कम से कम जगह में मशरूम और बेमौसम सब्जियों का उत्पादन कई गुणा बढ़ाया जाएगा।
