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हरियाणा प्रदेश में धान के स्टॉक में गड़बड़ी पर एएफएसओ व इंस्पेक्टर सस्पेंड, अब मामला दर्ज करने की मांग उठी

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AFSO and Inspector suspended over irregularities in paddy stocks in Haryana; demands raised to register a case
mahendra india news, new delhi

हरियाणा प्रदेश के पिहोवा में धान के स्टॉक में गड़बड़ी मिलने पर बड़ी कार्रवाई की गई है। गड़बड़ी मिलने पर एएफएसओ व इंस्पेक्टर सस्पेंड किया गया है। पिहोवा के मांगनीमवाला स्थित एक राइस मिल में लगाए गए धान के स्टॉक में गड़बड़ी को विभाग के एफएसओ जसबीर सिंह व इंस्पेक्टर रिंकू को सस्पेंड कर दिया गया है। इससे पहले सस्पेंड होने वाले इंस्पेक्टर की शिकायत पर ही एक अन्य राइस मिल के खिलाफ पुलिस में केस दर्ज कराया गया था। ्र

इस कार्रवाई से विभाग में खलबली मची हुई है। वहीं, अब सस्पेंड किए गए दोनों अधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज करने व उन्हें जॉब से पूरी तरह हटाए जाने के अलावा मामले की और भी गहनता से जांच की मांग भाकियू ने उठाई है। इसके लिए एक प्रतिनिधिमंडल ने खाद्य एवं पूर्ति मंत्री राजेश नागर से मुलाकात भी की।

आपको बता देें कि विभाग के अधिकारियों के मुताबिक पीवी के दौरान स्टॉक में 24,318.75 क्विंटल धान कम मिला था, इसकी अनुमानित  करीब 5.81 लाख कीमत थी। पिछले सीजन में विभाग की ओर से चौधरी राइस मिल को कस्टम मिलिंग के लिए करीब 39 हजार क्विंटल धान दिया था। सीएमआर की आपूर्ति मिलर को भारतीय खाद्य निगम को करनी थी। 25 नवंबर को विभागीय टीम ने मिल की फिजीकल वैरिफिकेशन की थी। उस समय रिकॉर्ड और स्टॉक में कोई कमी नहीं पाई गई थी लेकिन इसी वर्ष 17 मार्च को डीएफएससी कार्यालय के निर्देश पर एएफएसओ शाहाबाद राजीव सैनी और आईएफएस गौरव अरोड़ा की टीम ने दोबारा जांच की तो करीब 24 हजार क्विंटल धान कम मिला।

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आपको बता दें कि जांच रिपोर्ट के बाद डीएफएससी कार्यालय के आदेश पर पिहोवा इंचार्ज इंस्पेक्टर रिंकू जांगड़ा ने 17 मार्च को चौधरी राइस मिल के खिलाफ मामला दर्ज कराया था। हालांकि बाद में विभागीय जांच में प्रश्र उठे कि आखिर इतनी बड़ी मात्रा में धान गायब होने का पहले क्यों नहीं पता चल सका। विभागीय नियमों के अनुसार कस्टम मिलिंग के लिए दिए गए धान स्टॉक की निगरानी संबंधित इंचार्ज अधिकारी की जिम्मेदारी होती है। इसके तहत हर 15 दिन में स्टॉक की फिजिकल वेरिफिकेशन कर रिपोर्ट विभाग को देनी होती है लेकिन बताया जा रहा है कि चौधरी राइस मिल के मामले में यह पाक्षिक रिपोर्ट नियमित रूप से जमा नहीं कराई गई।