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चीनी के बाद प्याज की तपिश, इस रेट पहुंचे किलो प्याज; मंडियों में सप्लाई का टोटा

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mahendra india news, new delhi

हरियाणा में चीनी के बाद प्याज के रेट आसमान छू रहे हैं। प्याज के दामों में पिछले एक माह के मुकाबले बड़ी तेजी दिखाई दे रही है। अगस्त माह के अंतिम दिनों में प्याज की कीमतों में उछाल आ गया, उतनी तेजी से प्रदेश की मंडियों में प्याज की सप्लाई नहीं हो पाई।
आपको बता दें कि केंद्र सरकार बफर प्याज 35 रुपये किलो में बेच रही है। थोक बाजार में 25 अगस्त को लासलगांव में भाव 4,250 रुपये क्विंटल से ऊपर पहुंचने के बाद सरकारी हस्तक्षेप से इसमें 10 प्रतिशत की नरमी भी आई है, हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि नवंबर तक बाजार में कीमतें ऊंची रह सकती हैं।

आपको बता दें कि हरियाणा प्रदेश सब्जी मंडियों में जुलाई माह के अंदर प्याज 20 रुपये प्रतिकिलो से नीचे था। इसके बाद लगातार रेट में बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। यानि अब रसोई में प्याज का तडक़ा महंगा पड़ रहा है। 25 अगस्त 2026 तक प्याज का औसत रेट करीबन 35.63 रुपये किलो था, जबकि मंडीवार रेट में बड़ा अंतर देखने को मिला। प्रदेश की सिरसा मंडी में 45 से 50 रुपये, लाडवा मंडी में भाव 55-60 रुपये किलो, ढांड में करीब 40-48 रुपये, हांसी में 40-45 रुपये, गुरुग्राम में 25 से 35 रुपये तक प्याज की कीमतें दर्ज की गई थी।

बता दें कि मौजूदा समय में महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश से प्याज आ रहा है। चंडीगढ़ सेक्टर-26 की मंडी के आढ़तियों के अनुसार यही सप्लाई हरियाणा सहित पंजाब और हिमाचल तक जाती है। महाराष्ट्र के नासिक-लासलगांव एरिया से आने वाला प्याज इस समय बाजार के लिए खास महत्व रखता है। प्याज की मौजूदा तेजी को केवल मांग बढऩे से जोडऩा सही नहीं होगा। असल दबाव रबी प्याज के पुराने स्टाक के घटने और नई खरीफ फसल की आवक में देरी के बीच पैदा हुआ है।

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देश की केंद्र सरकार पहले ही कह चुकी है कि 2025-26 में प्याज का उत्पादन 307.37 लाख टन रहने का अनुमान है, जो पिछले साल के 307.67 लाख टन के बराबर है। मौसमी सप्लाई और वितरण के कारण रेटों पर दबाव है, केंद्र ने रेटों को नियंत्रित करने के लिए करीबन 1.21 लाख टन का बफर स्टाक तैयार किया है। नासिक से दिल्ली के लिए कांदा एक्सप्रेस भी भेजी गई है।