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संत बाबा बिहारी जी की जन्मस्थली पर हुआ मूर्ति स्थापना समारोह, गुरू पूर्णिमा के दिन संत बाबा बिहारी जी की मूर्ति का हुआ अनावरण

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An idol installation ceremony took place at the birthplace of Sant Baba Bihari Ji; the idol of Sant Baba Bihari Ji was unveiled on the occasion of Guru Purnima

mahendra india news, new delhi

सिरसा- सिरसा की संत परम्परा में प्रमुख स्थान रखने वाले संत बाबा बिहारी जी की सूरतगढ़िया बाजार में अरोड़ा सुनार वाली गली स्थित जन्मस्थली पर आज बाबा की दिव्य और भव्य मूर्ति स्थापित की गई। मूर्ति स्थापना के साथ पांच दिन से चल रहे अनुष्ठानों का आज समापन हुआ। मंत्रोच्चारण के बीच श्री बाबा बिहारी स्मृति चौरिटेबल ट्रस्ट के अध्यक्ष गोबिंद कांडा, श्री बाबा बिहारी समाधि के मुख्य सेवक गुलाब राय, समाजसेवी कपिल सोनी ने मूर्ति स्थापना करवाई। इसके बाद गली में ही विशाल भंडारा भी लगाया गया। श्री बाबा बिहारी स्मृति चौरिटेबल ट्रस्ट के अध्यक्ष गोबिंद कांडा ने संत बाबा बिहारी जी को नमन किया। साथ ही बाबा जी की जन्मस्थली वाले मकान को दान देने वाले कपिल सोनी परिवार को साधुवाद दिया। उन्होंने बाबा जी की तपस्या पर चर्चा की।


गोबिंद कांडा ने कहा कि सिरसा धर्मनगरी है। यहां चारों दिशाओं में डेरे हैं। सरस्वती नदी के किनारे बसे इस शहर में बाबा बिहारी भी एक ऐसे संत हुए जिन्होंने लोगों को अध्यात्म जीवन दर्शन करवाया। उनकी स्मृति में साल 1972 में रानियां रोड पर बाबा बिहारी समाधि बनाई गई। अपने जीवन के अंतिम 6 माह तक बाबा बिहारी शहर की अरोड़ा सुनारों वाली गली में स्थित अपने मकान में रहे। अब उनकी जन्मस्थली को मंदिर का रूप दिया गया है। बाबा बिहारी जिस कमरे में रहते थे। उसमें उनका दिव्य, भव्य स्वरूप स्थापित किया गया है।


उन्होंने बताया कि बाबा बिहारी जी का जन्म 18 अगस्त 1896 को हुआ था। उनके पिता मग्घर मल एक कारोबारी थे। मां अकी देवी धर्मपरायण स्त्री थी। उनके भाई बल्लीराम पिता के साथ व्यवसाय करते थे। करीब 18 वर्ष की आयु में बाबा बिहारी का विवाह भावदीन के एक परिवार में जमना देवी के साथ हुआ। बाबा बिहारी शिव के भक्त थे। अरोड़ा सुनारों वाली गली स्थित जिस मकान में उनका जन्म हुआ उसी मकान में जीवन के अंतिम समय में छह माह तक रहे। इसी मकान में 1971 को उन्होंने चोला छोड़ा। इसके बाद मकान कई बार बिक गया। इस समय यह मकान स्व. सतीश कुमार जोड़ा के पुत्रों कपिल सोनी व शिवम सोनी के पास था। दो साल पूर्व सोनी परिवार ने यह मकान श्री बाबा बिहारी स्मृति चौरिटेबल ट्रस्ट को दान दे दिया।

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श्री बाबा बिहारी समाधि के मुख्य सेवक गुलाब राय गुज्जर ने बताया कि दो साल में इस मकान का जीर्णोद्धार ट्रस्ट द्वारा करवाया गया। जिस कमरे में बाबा ने जीवन का अंतिम चरण पूरा किया उस कमरे में बाबा बिहारी की मूर्ति स्थापित कर इस आवास को मंदिर का रूप दिया गया। आज से श्रद्धालुओं के दर्शनों के लिए मंदिर खुल गया है।
बाबा बिहारी की जन्मस्थली यानी उनके मकान को बाबा जी के ट्रस्ट को दान करने वाले कपिल सोनी एवं शिवम ने बताया कि अपने दिवंगत पिता की इच्छानुसार उन्होंने ट्रस्ट को यह मकान सौंप दिया। अब दिव्य रूप दिया गया है। आज उनकी माता सरोज रानी सहित परिवार के सभी सदस्यों ने समारोह में भाग लिया। पारिवारिक सदस्यों में सोनिया, रिया, नीतू, कपिल, इन्द्रपाल, उषा रानी, अशोक वर्मा, नथी जी, अनमोल, जनक, रजत, सुमित, देव, लक्ष्य व मदन लाल शामिल थे।


आज मूर्ति स्थापना समारोह के दौरान हवन यज्ञ किया गया। इसके बाद पूजा अर्चना हुई। इस मौके पर मुख्य यजमान के रूप में श्री बाबा बिहारी जी स्मृति चौरिटेबल ट्रस्ट के अध्यक्ष गोबिंद कांडा, श्री बाबा बिहारी समाधि के मुख्य सेवक गुलाब गुज्जर, मकान दानी श्रीमती सरोज रानी, कपिल सोनी, शिवम सोनी शामिल परिवार सहित शामिल हुए। पंडित राम दुलारे दीक्षित, चन्द्रमोहन भार्गव व राजन भार्गव ने पूजा सम्पन्न करवाई। आरती के बाद उपस्थित श्रद्धालुओं में प्रसाद वितरित किया गया।


इस मौके पर नगर परिषद के अध्यक्ष वीर शांति स्वरूप, आढ़तियान एसोसिएशन के पूर्व प्रधान सुरेन्द्र मिंचनाबादी, इंद्रोष गुर्जर, राजन शर्मा, पार्षद मनमोहन मिढा, सालासर धाम मंदिर के प्रधान गोपाल सर्राफ, महाराजा अग्रसेन स्कूल चैरिटेबल ट्रस्ट के प्रधान अनिल गनेरीवाला, आशा गनेरीवाला, पार्षद चंद्रिका गनेरीवाला, दिव्या गनेरीवाला, पार्थ गुर्जर, कुलदीप मित्तल, अनिल सर्राफ, सुनील सर्राफ, मुकेश सर्राफ, पूर्व चेयरमैन जय सिंह कुसुंबी, महावीर शर्मा, अग्रवाल सभा के प्रधान संजय साहुवाला, सुशील वर्मा, सूरभभान गुर्जर, सुशील कंदोई, अशोक गोयल, नेम चंद गुर्जर, कृष्ण मुंजाल, संजय केलनियां, राजेन्द्र सुधा, अश्विनी बंसल व नवदीश गर्ग सहित अन्य गणमान्य लोग मौजूद थे।