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सिरसा जिले के गांव नहराणा में लगा अंतरराज्यीय मेला, हरियाणा, राजस्थान, पंजाब समेत देश के कोने कोने से पहुंचे लुहार जाति के लोग, ये है मान्यता

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An inter-state fair was held in Nahrana village of Sirsa district, where people of the blacksmith caste arrived from all corners of the country, including Haryana, Rajasthan, Punjab. This is the belief
mahendra india news, new delhi 

नाथूसरी चौपटा क्षेत्र के गांव नहराणा में स्थित देदा पीर लुहार खेमा समाधि स्थल पर सोमवार को प्रतिवर्ष की तरह इस बार भी विशाल मेले लगा। गांव में सैकड़ों वर्षों से गडरिया लुहार समाज की आस्था का केंद्र बने इस पवित्र स्थल पर हरियाणा, राजस्थान, पंजाब, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, चंडीगढ़ समेत देश के कोने-कोने से लुहार जाति के लोग पहुंचें और समाधि पर माथा टेककर सुख-शांति एवं समृद्धि की कामना की। 


मेले में सोमवार को सुबह से ही लुहार जाति के लोग नाचते गाते हुए विभिन्न वाहनों में पहुंचने लगे। दोपहर तक मेला परिसर पूरी तरह से भर गया। मेले के दौरान विशाल भंडारा और पारंपरिक कुश्ती दंगल का आयोजन किया गया। 

देदा पीर मंदिर बना आस्था का सबसे बड़ा केंद्र
बता दें कि गांव नहराणा में स्थित प्राचीन देदा पीर मंदिर गडरिया लुहार समाज के लिए उत्तरी भारत का सबसे बड़ा धार्मिक स्थल माना जाता है। यहां हर वर्ष विशाल मेले का आयोजन होता है। श्रद्धालु दूर-दराज से यहां पहुंचकर देदा पीर लुहार खेमा समाधि स्थल पर माथा टेकते हैं, प्रसाद चढ़ाते हैं और अपनी मन्नतें मांगते हैं।

ढोल-नगाड़ों के साथ हुआ स्वागत
मंदिर परिसर में पहुंचने वाले श्रद्धालुओं का ढोल-नगाड़ों के साथ भव्य स्वागत किया जाता है। इससे मेले का माहौल और भी उत्साहपूर्ण बन जाता है। कुश्ती दंगल मेले का सबसे बड़ा आकर्षण माना जाता है। इसमें विभिन्न प्रदेशों से आए लुहार जाति के पहलवान अखाड़े में उतरकर अपनी ताकत और कला का प्रदर्शन करते हैं। दंगल देखने के लिए आसपास के गांवों के लोग बड़ी संख्या में पहुंचते हैं और देर रात तक मुकाबलों का आनंद लेते हैं।

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ग्रामीण निभाते हैं मेहमाननवाजी की परंपरा
गांव नहराणा के ग्रामीण हर साल मेले में पहुंचने वाले श्रद्धालुओं की सेवा और मेहमाननवाजी में कोई कमी नहीं छोड़ते। दूर-दराज से आने वाले लोगों के लिए हर प्रकार की व्यवस्था की जाती है।

लुहार समाज के सदस्य डोजी ने बताया कि हर वर्ष लगने वाले इस मेले में ग्रामीणों का सहयोग सबसे बड़ी ताकत है। समिति के प्रधान सुनील बैनीवाल व सुरेश कुमार ने बताया कि देदा पीर लुहार खेमा समाधि स्थल पर हर वर्ष श्रद्धा और परंपरा के साथ मेले का आयोजन किया जाता है तथा समिति द्वारा सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जाती हैं।