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आशा वर्कर्स यूनियन ने मांगों को लेकर जिला नागरिक अस्पताल में गरजेंगी आशा वर्कर्स, सीएमओ को सौंपेंगी ज्ञापन

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आशा वर्कर्स यूनियन हरियाणा, आशा वर्कर्स एंड फैसिलीटेटर फेडरेशन आॅफ इण्डिया के आह्वान पर जिला नागरिक अस्पताल में अपनी लंबित मांगों को लेकर जिलेभर की आशा वर्कर्स 7 जुलाई को प्रदर्शन करेंगी और अपनी मांगों को लेकर सिविल सर्जन सिरसा को ज्ञापन सौंपेंगी।

यूनियन की जिला प्रधान दर्शना, शिमला, मीनाक्षी, उषा, रेखा ने संयुक्त रूप से बताया कि अपनी लंबित मांगों को लेकर आशा वर्कर्स लंबे समय से संघर्ष कर रही हैं, लेकिन सरकार की ओर से गौर नहीं किया जा रहा है, जिससे आशा वर्कर्स में भारी रोष हैं। मांगों को पूरा करवाने के लिए उन्हें मजबूरन आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ता है। उन्होंने जिलेभर की आशा वर्कर्स से आह्वान किया कि वे तय समयानुसार जिला नागरिक अस्पताल में पहुंचें और अपने हक के लिए अपनी आवाज को बुलंद करें।
 

ये हैं कर्मचारियों की प्रमुख मांगें:
भारत सरकार द्वारा 2025 में आशा वर्कर्स की 1500 रुपए घोषणा को तुरंत लागू किया जाए। एनएचएम को एक स्थायी स्वास्थ्य कार्यक्रम, बनाकर आशा कार्यकर्ताओं और सुविधा प्रदाताओं को 45वें और 46वें भारतीय श्रम सम्मेलन की सिफारिशों को लागू करते हुए आशाओं को वर्कर का दर्जा दिया जाए ।

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देश में एक समान कार्य परिस्थितियां सुनिश्चित की जाए। 6 माह का सवेतन मातृत्व अवकाश, 20 दिन का आकस्मिक अवकाश और चिकित्सा अवकाश सुनिश्चित किया जाए। पेंशन तक कोई सेवानिवृत्ति नही की जाए । आशा कार्यकर्ताओं की वरिष्ठता के आधार पर अन्य पदों पर पदोन्नति सुनिश्चित की जाए। सभी पी.एच.सी. / सी.एच.सी. और अस्पतालों में 'आशा विश्राम कक्ष' बनाए जाएं।

आशा कार्यकर्ताओं को स्कूटर दिया जाए तथा ड्यूटी के लिए यात्रा व्यय का भुगतान किया जाए। आशाओं पर सभी तरह के आॅनलाइन काम का दबाव बनाया जाना बंद किया जाए। सरकारी स्वास्थ्य के ढांचे और अस्पतालों सहित सभी बुनियादी सेवाओं के निजीकरण के प्रस्ताव पर रोक लगाई जाए और सरकारी स्वास्थ्य के ढांचे को मजबूत किया जाए। आशा वर्कर्स को पक्का कर्मचारी बनाया जाए। चार श्रम संहिताओं को रद्द किया जाए, आशा और फैसिलीटेटरों को श्रम कानूनों के दायरे में शामिल किया।