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भारतीय संविधान की रचना में बाबा साहेब का अमूल्य योगदान: डा. सज्जन कुमार

Baba Saheb's invaluable contribution in the making of the Indian Constitution: Dr. Sajjan Kumar
 
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Baba Saheb's invaluable contribution in the making of the Indian Constitution: Dr. Sajjan Kumar

सिरसा। सीएमआरजे राजकीय महाविद्यालय मिठी सुरेरां में  प्राचार्य डा.सज्जन कुमार की अध्यक्षता व हिंदी विभागाध्यक्ष प्रो. राजेश व एनएसएस इकाई के इंचार्ज प्रो राजवीर सिंह के संयोजन में बाबा साहेब डा. भीमराव अंबेडकर की जयंती पर कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में  डा. सुगन सिंह प्राध्यापक राजनीतिक विज्ञान ने शिरकत की। तत्पश्चात बाबा साहेब  डा. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की गई।

इस अवसर पर मुख्य वक्ता ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि डॉ. अंबेडकर ने आजीवन जातिगत भेदभाव, सामाजिक असमानता और आर्थिक विषमता के खिलाफ संघर्ष किया। वे भारत के पहले कानून मंत्री भी बने और उन्होंने भारतीय संविधान की रचना में अह्म योगदान दिया। डॉ. अंबेडकर ने भारतीय संविधान की प्रारूप समिति के अध्यक्ष के रूप में सामाजिक न्याय, समानता और मानवाधिकारों की स्थापना हेतु ऐतिहासिक योगदान दिया। उन्होंने भारत के संविधान में ऐसे प्रावधानों को स्थान दिया, जो हर नागरिक को समान अवसर, न्याय, शिक्षा और सम्मान का अधिकार प्रदान करते हैं।

उनके प्रयासों से अस्पृश्यता उन्मूलन, आरक्षण नीति और सामाजिक समरसता की दिशा में ठोस कदम उठाए गए। उन्होंने बहुजन हिताय, बहुजन सुखाय के सिद्धांत को अपनाया और जीवन भर समता और बंधुत्व की भावना को बढ़ावा दिया। जन संपर्क अधिकारी प्रो. प्रवीण कुमार ने बताया कि महाविद्यालय प्राचार्य डा. सज्जन कुमार ने अपने संबोधन में कहा कि डॉ. अंबेडकर ने भारतीय संविधान की प्रारूप समिति के अध्यक्ष के रूप में सामाजिक न्याय, समानता और मानवाधिकारों की स्थापना हेतु ऐतिहासिक योगदान दिया। उन्होंने भारत के संविधान में ऐसे प्रावधानों को स्थान दिया,

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जो हर नागरिक को समान अवसर, न्याय, शिक्षा और सम्मान का अधिकार प्रदान करते हैं। उनके प्रयासों से अस्पृश्यता उन्मूलन, आरक्षण नीति और सामाजिक समरसता की दिशा में ठोस कदम उठाए गए। प्रो. सावन कुमार ने अपना वक्तव्य पेश करते हुए कहा कि बाबासाहेब अंबेडकर न केवल संविधान निर्माता थे, बल्कि वे कमजोर वर्गों के सशक्तिकरण के लिए आजीवन संघर्ष करने वाले प्रेरणास्रोत भी थे। उनका जीवन आज भी करोड़ों लोगों के लिए प्रकाशपुंज है। मंच संचालन प्रो. सावन ने किया और अंत में सभी का धन्यवाद डा. साधा सिंह ने किया। इस मौके पर महाविद्यालय के शैक्षणिक व गैर शैक्षणिक स्टाफ सदस्यों के साथ भारी संख्या में छात्र-छात्राओं ने अपनी उपस्थिति दर्ज करवाई।