नशे के खिलाफ मानसा धरने को बीकेई का समर्थन, सिरसा से लखविंदर सिंह औलख के नेतृत्व में पहुंचा किसानों का काफिला
mahendra india news, new delhi
नशे के खिलाफ लड़ाई लड़ते हुए शहीद हुए परविंदर सिंह झोटा को इंसाफ दिलाने और उनके सपनों का नशा-मुक्त समाज बनाने के उद्देश्य से भारतीय किसान एकता बीकेई के नेतृत्व में सिरसा तथा फतेहाबाद जिले से किसानों और युवाओं का एक बड़ा काफिला मानसा धरने में पहुंचा। काफिले में शामिल किसान और नौजवान सर्वप्रथम सरदूलेवाला कैचियां पर एकत्रित हुए, जहां से वे गाड़ियों के विशाल काफिले के साथ मानसा में चल रहे पक्के धरने में शामिल हुए और अपना पूर्ण समर्थन जताया।
बीकेई अध्यक्ष लखविंदर सिंह औलख ने कहा कि शहीद परविंदर सिंह झोटा दूसरों के बच्चों को नशे की दलदल से बचाते-बचाते अपने छोटे-छोटे बच्चों को अनाथ कर गया। उनके इस महान त्याग और शहादत के कारण ही आज देश ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी उनका नाम बड़े आदर और सम्मान के साथ लिया जा रहा है। औलख ने कड़ी चेतावनी देते हुए मांग की कि जिस क्षेत्र में भी नशा बिकता है, उस क्षेत्र के संबंधित पुलिस अधिकारियों, ड्रग इंस्पेक्टरों तथा प्रशासनिक विभागों की सीधी जवाबदेही तय की जाए। उन्होंने कहा कि यदि नशे की ओवरडोज या सेवन से किसी भी युवा की मौत होती है, तो उसके लिए संबंधित अधिकारियों को ही जिम्मेदार मानकर उन पर आपराधिक मुकदमे दर्ज किए जाने चाहिए।
औलख ने कहा कि नशे के सौदागर केवल मानसा तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि अश्वनी कुमार जैसे दरिंदे हरियाणा और पंजाब के गांव-गांव, कस्बों और शहरों में सरेआम गोलियां, कैप्सूल और चिट्टा बांटकर युवाओं की जिंदगियां तबाह कर रहे हैं। सरकारों के 'नशा मुक्ति अभियान' को केवल अखबारों और पोस्टरों तक सीमित बताते हुए नेताओं ने आरोप लगाया कि सरकारी और प्रशासनिक अनदेखी व शह के कारण ही नशे के सौदागर बेखौफ होकर यह काला कारोबार चला रहे हैं। भारतीय किसान एकता ने समाज के सभी वर्गों, किसानों, मजदूरों और युवाओं से अपील की है कि वे एकजुट होकर नशे के इस संगठित नेटवर्क को जड़ से उखाड़ फेंकने के लिए संघर्ष में आगे आएं यही शहीद परमिंदर सिंह को सच्ची श्रद्धांजलि होगी और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य भी सुरक्षित रह पायेंगे।
इस मौके पर बीकेई प्रदेश महासचिव अंग्रेज सिंह कोटली, मीडिया प्रभारी गुरलाल भंगू, दरियापुर से प्रधान हरमन संधू, टोहाना से गुरप्रीत सिंह, हरभेज सिंह, गुरप्रीत जैलदार रोड़ी, अमरीक सिंह बाजवा, प्रद्युम्न सिंह ऐलनाबाद, पिन्दा काहलों, गुरजीत मान, दलजीत चहल, संदीप झिड़ी, नाजर सिंह, बलकौर सिंह फगु, बिंदर चकेरियां, राजू रघुआना, मेवा सिंह, बलकौर पजंवाला, काका पजुंआना, सरबजीत कंबोज, दीपू गिल आदि सैकड़ों किसान तथा नौजवान मौजूद रहे।
