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किसानों की स्थानीय मांगों को लेकर बीकेई ने जाट धर्मशाला सिरसा में की मीटिंग: लखविंदर सिंह औलख

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BKE holds meeting at Jat Dharamshala, Sirsa, regarding local demands of farmers: Lakhwinder Singh Aulakh

mahendra india news, new delhi
भारतीय किसान एकता (बीकेई) द्वारा किसानों की स्थानीय समस्याओं और मांगों को लेकर जाट धर्मशाला, सिरसा में एक महत्वपूर्ण मीटिंग आयोजित की गई। मीटिंग की अध्यक्षता प्रदेशाध्यक्ष लखविंदर सिंह औलख ने की। इस दौरान जिले भर से पहुंचे किसानों ने अपनी समस्याओं को प्रमुखता से उठाया तथा सरकार व प्रशासन से जल्द समाधान की मांग की। लखविंदर सिंह औलख ने कहा कि किसानों को लगातार विभिन्न समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है, लेकिन सरकार किसानों की मांगों की ओर गंभीरता नहीं दिखा रही। उन्होंने कहा कि भारतीय किसान एकता किसानों के हकों की लड़ाई मजबूती से लड़ती रहेगी और जरूरत पड़ने पर बड़ा आंदोलन भी किया जाएगा।


मीटिंग में मुख्य रूप से किसानों के बीमा प्रीमियम वापसी, कालांवाली, डबवाली तथा गोरीवाला तहसीलों का खरीफ-2020 का बकाया मुआवजा जारी करने, खरीफ-2025 में खराब हुई फसलों का किसानों को बीमा क्लेम व उचित मुआवजा देने की मांग उठाई गई। इसके अलावा रबी सीजन के लिए बिना किसी टैगिंग या कालाबाजारी के पर्याप्त मात्रा में डीएपी तथा यूरिया खाद उपलब्ध करवाने, मेरी फसल मेरा ब्यौरा पोर्टल पर फसल पंजीकरण में आ रही समस्याओं का समाधान करने तथा सोलर ट्यूबवेल कनेक्शन के आवेदकों की लंबित राशि जारी करने की मांग भी रखी गई।

किसानों ने खेतों में पानी की डिग्गियों की बकाया राशि जारी करने, नहरी पानी समय पर उपलब्ध करवाने तथा हिसार घग्गर ड्रेन में फैक्ट्रियों का जहरीला पानी छोड़े जाने पर रोक लगाने की भी मांग की। मीटिंग में वक्ताओं ने कहा कि किसानों और मजदूरों की समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो आने वाले समय में संघर्ष तेज किया जाएगा। उन्होंने सभी किसानों से एकजुट होकर संगठन को मजबूत करने का आह्वान किया। किसानों की बीमा क्लेम संबंधित मांगों को लेकर कृषि विभाग से गुण नियंत्रण अधिकारी अमित कुमार, एसडीओ सतबीर रंगा तथा एसए मुकेश कुमार ने मीटिंग में आए किसानों की समस्याएं सुनी तथा उनके समाधान के लिए विभाग की तरफ से की जा रही कार्रवाई के बारे में बताया।

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इस अवसर पर बीकेई से सुभाष झोरड़, गुरप्रीत सिंह संधू, अंग्रेज सिंह कोटली, गुरलाल सिंह भंगू, जयकरण झोरड़ नथोर, निहाल सिंह खोथ, हनुमान न्यौल, नरेंद्र सादेवाला, पूर्व सरपंच गुरदेव सिंह रोहिड़ावाली, भरत सिंह गोदारा, बंता सिंह जलालआना, गुरदीप सिंह मल्लेवाला ने अपने-अपने विचार रखे।