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CDLU SIRSA में पुस्तक वेस्ट टू रिसोर्सेज का विमोचन

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Book Waste to Resources released at CDLU SIRSA

mahendra india new delhi
चौधरी देवीलाल विश्वविद्यालय, सिरसा के कुलगुरु प्रो. विजय कुमार तथा कुलगुरु के तकनीकी सलाहकार एवं मानविकी संकाय के डीन प्रो. पंकज शर्मा द्वारा खाद्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग की अध्यक्ष डॉ संजू बाला ढुल की पुस्तक “वेस्ट टू रिसोर्सेज” का विमोचन कुलगुरु कार्यालय में किया। इस अवसर पर कुलगुरु ने डॉ संजू को बधाई देते हुए कहा कि इस प्रकार की पुस्तकें अकादमिक जगत, विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं तथा नीति निर्माताओं के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध होती हैं। उन्होंने कहा कि सतत विकास और वेस्ट प्रबंधन के संदर्भ में यह पुस्तक समय की आवश्यकता को रेखांकित करती है। यह पुस्तक कृषि वेस्ट के संभावित अनुप्रयोगों को सामने लाते हुए उनके बेहतर उपयोग के नए मार्ग प्रशस्त करेगी।


डॉ. संजू बाला ने बताया कि यह पुस्तक एकेडमिक प्रेस (एल्सेवियर) द्वारा प्रकाशित की गई है। पुस्तक में कृषि, खाद्य एवं पशु-आधारित अपशिष्टों के विभिन्न प्रकार, उनके पर्यावरणीय प्रभाव तथा पारिस्थितिकी दृष्टि से जुड़ी चुनौतियों पर विस्तृत चर्चा की गई है। उनके अनुसार यह पुस्तक एग्रो तथा फूड इंडस्ट्री से जुड़े पेशेवरों के लिए भी उपयोगी साबित होगी। उन्होंने बताया कि यह पुस्तक कुल 28 अध्यायों में विभक्त है और वेस्ट को संसाधन में बदलने के व्यवहारिक एवं वैज्ञानिक दृष्टिकोण प्रस्तुत करती है। कुलगुरु के अतिरिक्त फैकल्टी ऑफ़ लाइफ साइंसेज के प्राध्यापकों एवं अन्य शिक्षकों ने डॉ संजू को पुस्तक प्रकाशन पर बधाई दी।  


उल्लेखनीय है कि डॉ संजू बाला ढुल् को हाल ही में स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी, यूएसए द्वारा जारी विश्व के श्रेष्ठ दो प्रतिशत वैज्ञानिकों की सूची में दूसरी बार चयन हुआ था।  डॉ. संजू बाला को शिक्षण एवं शोध के क्षेत्र में 17 वर्षों से अधिक का अनुभव है। उनकी शोध रुचि के क्षेत्रों में स्टार्च और गोंद जैसे जैव अणुओं का लक्षण वर्णन एवं संशोधन, खाद्य फिल्मों, हाइड्रोजन, नैनोकणों, नैनो इमल्शन की तैयारी एवं अनुप्रयोग, नए एवं शाकाहारी उत्पाद विकास तथा महिला एवं बाल पोषण शामिल हैं। उन्होंने 8 पुस्तकें (5 सीआरसी, 2 स्प्रिंगर, 1 एल्सेवियर), 130 से अधिक शोध/समीक्षा पत्र और राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय ख्याति की विभिन्न पत्रिकाओं एवं पुस्तकों में पुस्तक अध्याय प्रकाशित किए हैं। उन्होंने विभिन्न राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलनों में 25 से अधिक शोध पत्र प्रस्तुत किए हैं।

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