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सरकारी स्कूलों में घटते नामांकन पर रीना बीरट ने उठाए सवाल, शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग

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Borewell Story: 4-year-old Nirbhay fell into a 250-foot-deep borewell; here is what the rescue team said

mahendra india news, new delhi

नीति आयोग की रिपोर्ट के अनुसार देश के सरकारी विद्यालयों में पढ़ने वाले छात्रों की संख्या लगातार घट रही है। रिपोर्ट के मुताबिक अब केवल लगभग 49 प्रतिशत बच्चे सरकारी स्कूलों में शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं, जबकि शेष छात्र निजी विद्यालयों में पढ़ रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि शिक्षा की गुणवत्ता, आधारभूत सुविधाओं की कमी, अंग्रेज़ी माध्यम के प्रति बढ़ता आकर्षण तथा अभिभावकों की बदलती प्राथमिकताएँ इस बदलाव के प्रमुख कारण हैं। रिपोर्ट में सरकारी विद्यालयों की गुणवत्ता और उन पर जनता के विश्वास को मजबूत करने के लिए व्यापक सुधारों की आवश्यकता भी बताई गई है।


इस विषय पर प्रतिक्रिया देते हुए ग्राम ख्योवाली की पूर्व सरपंच रीना बीरट ने कहा कि सरकारी विद्यालयों में अधिकांश शिक्षक ईमानदारी और समर्पण से कार्य करते हैं, लेकिन कुछ शिक्षकों के आचरण के कारण पूरे शिक्षा तंत्र की छवि प्रभावित होती है। उनका कहना है कि लगभग 3 से 5 प्रतिशत ऐसे शिक्षक हैं जो अपने सामाजिक और नैतिक दायित्वों का निर्वहन सही ढंग से नहीं करते तथा पढ़ाई की बजाय स्थानीय राजनीति में अधिक सक्रिय रहते हैं।


रीना बीरट ने दावा किया कि उनके गांव ख्योवाली की अनुसूचित जाति धर्मशाला एवं एससी चौपाल से जुड़े मामले में गांवों वासियों के द्वारा कई शिकायतें विभिन्न विभागों को दी थीं। उनका आरोप है कि धर्मशाला परिसर में हरे पेड़ों की कटाई की गई, एससी चौपाल को क्षति पहुंचाई गई, उसके खिड़की-दरवाजे हटाकर बेच दिए गए तथा जबरन शिलान्यास पत्थर भी लगाए गए। उन्होंने आरोप लगाया कि इस मामले में अध्यापक रमन कुमार, जिला शिक्षा मौलिक अधिकारी सिरसा श्री आत्म प्रकाश मेहरा सहित अन्य व्यक्तियों के नाम उनकी शिकायतों में शामिल थे। वहां जिला शिक्षा मौलिक अधिकारी के नाम के जबरदस्ती शिलान्यास पत्थर लगाए गए। और ग्राम पंचायत व पुर्व विधायक अभय सिंह चौटाला के नाम के शिलान्यास पत्थर तोड़ दिये गये। 

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उस समय खण्ड विकास व पंचायत अधिकारी औढ़ा ने अपनी रिपोर्ट में जबरदस्ती बुत व शिलान्यास पत्थर लगाने की पुष्टि कर चुके हैं।
रीना बीरट के अनुसार इस मामले की प्रारंभिक जांच थाना औढ़ा द्वारा की गई थी। उनका आरोप है कि वर्ष 2023 में तैयार की गई जांच रिपोर्ट में यह उल्लेख किया गया कि एससी चौपाल में बरगद का पेड़ था ही नहीं, जबकि वर्ष 2024 में वही बरगद का पेड़ आंधी के दौरान गिर गया। उनका दावा है कि संबंधित बयान पर उक्त शिक्षकों के हस्ताक्षर भी मौजूद हैं। 
वर्तमान में दोनों रिपोर्ट को श्रीमान उप-पुलिस अधीक्षक कालावाली द्वारा खारीज किया जा चुका है।
उन्होंने आगे कहा कि बाद में उप-मंडल अधिकारी (नागरिक), कालांवाली द्वारा गठित विजिलेंस कमेटी ने भी मामले की जांच की। रीना बीरट का आरोप है कि जांच के दौरान राजकीय प्राथमिक विद्यालय रघुआना के अध्यापक सतीस कुमार और जगदीश कुमार विद्यालय समय में स्कुल से फरलो मारकर विजिलेंस कमेटी जांच में पहुंचे और बाद में वापस विद्यालय लौट गए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इस संबंध में की गई शिकायत के बाद अवकाश रिकॉर्ड फर्जी तरीके से तैयार किया गया तथा सीसीटीवी फुटेज भी सुरक्षित खुर्द-बुर्द कर दी गई। उनके अनुसार बाद में खंड शिक्षा अधिकारी, बड़ागुढ़ा द्वारा दोनों शिक्षकों को केवल लिखित चेतावनी देकर मामला समाप्त कर दिया गया, जिससे वे संतुष्ट नहीं हैं।
रीना बीरट ने कहा कि यदि सरकारी विद्यालयों में शिक्षा का स्तर सुधारना है तो शिक्षकों की भर्ती पूरी पारदर्शिता से होनी चाहिए, नियुक्ति के बाद नियमित नैतिक एवं व्यावसायिक प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए तथा सभी विद्यालयों में बायोमेट्रिक (फिंगरप्रिंट) उपस्थिति प्रणाली अनिवार्य की जानी चाहिए। उनका कहना है कि इससे जवाबदेही बढ़ेगी, अनुशासन मजबूत होगा और सरकारी विद्यालयों के प्रति जनता का विश्वास भी बढ़ेगा।