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सूर्योदय से 48 मिनट पहले तक ब्रह्ममुहुर्त, इसलिए जल्दी उठें: स्वामी नित्यानंद गिरी

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Brahmamuhurta is 48 minutes before sunrise, so wake up early: Swami Nityananda Giri

सिरसा,: स्वामी नित्यानंद गिरी ने वर्तमान दौर में बदल रही जीवनशैली पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आजकल लेट उठाने को अपनी आदत बना चुके है, जिससे जीवन में दरिद्रता को बढ़ावा मिलता है। हर व्यक्ति को सूर्योदय से पहले उठाना चाहिए। क्योंकि सूर्योदय से 48 मिनट पहले तक ब्रह्ममुहुर्त रहता है। इसलिए बहुत जल्दी नहीं उठ सकते तो कम से कम सूर्योदय से पहले उठने का प्रयास करें। इससे शरीर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और इन्सान में देवीय शक्तियों का प्रभाव बढ़ता है। स्वामी नित्यानंद गिरी वीरवार को फूलकां गौशाला में नृसिंह पुराण कथा के तीसरे दिन पहुंचे सैकड़ों लोगों को संबोधित कर रहे थे।


नित्यानंद गिरी ने नृसिंह पुराण के 19 वें अध्याय का उल्लेख करते हुए कहा कि इसमें आता है कि तामस अहंकार से पंचभूत (आकाश, वायु, अग्नि, जल, पृथ्वी) और तन्मात्राओं की सृष्टि हुई है। शब्द, स्पर्श, रूप, रस और गंध के ज्ञान के लिए ज्ञानेन्द्रियाँ तथा मल त्याग, आनंद, शिल्प (हाथ), गमन (पाँव) और बोलना ये पांच कर्मेन्द्रियों के कार्य बताए गए हैं। प्रधान तत्व के अनुग्रह से ब्रह्मांड की उत्पत्ति हुई, जो जल के ऊपर बुलबुले की तरह स्थित था। उसके भीतर स्वयं भगवान विष्णु हिरण्यगर्भरूप से विराजमान हुए।


स्वामी नित्यानंद ने कहा कि वर्तमान समय में संतान संस्कार विहिन होती जा रही है। 'जैसा संकल्प वैसी संतानÓ यानि मां-बाप के जैसे संस्कार होते हैं, उनका जैसा संकल्प होता है, वैसी ही संतान होती है। जब माँ गर्भ से होती है तो उसे चाहिए कि वह भक्ति के मार्ग पर चले, गौसेवा जैसे पुण्य कर्म करे, दान-दक्षिण दे तभी उसकी आने वाली संतान संस्कारवान हो सकती है।

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इस दौरान स्वामी गिरी ने कद्रू और विनता की वरदान और श्राप की कहानी भी सुनाई कि कैसे कद्रू ने एक हजार ऐसे पुत्रों की कामना की जो नाग बन जाएं, और विनता ने दो अतिशक्तिशाली पुत्रों की कामना की। ऋषि कश्यप ने अपनी जादुई शक्तियों से उनकी कामना पूरी की।