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हरियाणा रोडवेज में टायरों की कमी पर कर्मचारी यूनियन नाराज, मांगें पूरी नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी

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Buses come to a standstill due to a shortage of tires: Chahar

MAHENDRA INDIA NEWS, NEW DELHI
 हरियाणा रोडवेज वर्कर्स यूनियन सिरसा डिपो की मीटिंग प्रधान पृथ्वी सिंह चाहर की अध्यक्षता  में हुई। मीटिंग में सचिव सतपाल सिंह रानियां, कोषाध्यक्ष कृष्ण माचरा, उप प्रधान संतलाल बिश्नोई, सह सचिव कुंदन चोयल व आॅडिटर रोहतास झोरड़, वरिष्ठ उपप्रधान धर्म सिंह सहारण, उप प्रधान अनूप जाखड़, मुख्य सलाहकार जयदेव निरीक्षक, सलाहकार सुखजीत सिवाच, सह-सचिव बलजीत सिंह, कार्यालय सचिव नरेंद्र सिंह गुर्जर, प्रेस सचिव मोहित जैलदार, ब्लॉक प्रधान चोपटा सुभाष फौजी, ब्लॉक प्रधान ऐलनाबाद राय सिंह, ब्लॉक प्रधान रानियां बगा सिंह, ब्लॉक प्रधान कालांवाली विजय कुमार, ब्लॉक प्रधान सिरसा प्रवीण कुमार, महम सर्कल प्रधान संदीप कुमार, हिसार सर्कल प्रधान प्रवीण कुमार, सह कैशियर आर.सी. झोरड़, कानूनी सलाहकार जय भगवान फौजी, संगठन सचिव कीमत सिंह ढांडा व सह संगठन सचिव रविंद्र कुमार मौजूद रहे।

कर्मचारी नेताओं ने कहा कि मौजूदा सरकार के परिवहन विभाग को लेकर किए जा रहे वादे खोखले नजर आ रहे हैं। सरकार जनता की सुविधा की तरफ ध्यान न देकर केवल अपने पूंजीपति साथियों को फायदा पहुंचाने का कार्य कर रही है। सरकार किलोमीटर स्कीम के मालिकों को कोरोना काल का 50 करोड़ का भुगतान कर सकती है, लेकिन बसों को चलाने के लिए टायर नहीं खरीद सकती। डिपो प्रधान पृथ्वी सिंह चाहर ने कहा कि टायरों की कमी के कारण पूरे हरियाणा में प्रतिदिन सैकड़ों बसें खड़ी रह जाती हैं। जबकि दिनांक 16 जून को यूनियन के साथ बातचीत में कई मांगों पर सहमति बनी थी, लेकिन धरातल पर कोई भी मांग लागू नहीं हो पाई।

ऊपर से दिवाली का त्योहार नजदीक है और टायरों की कमी के कारण बसें नहीं चल पाएंगी और यात्रियों को होने वाली परेशानी की तरफ सरकार का कोई ध्यान नहीं है। दिन-रात एक कर यात्रियों को उनके गंतव्य तक पहुंचाने वाले चालक-परिचालकों को पिछले 12 साल से बोनस का भुगतान भी नहीं किया गया है और ऊपर से हिट एंड रन, रोड सेफ्टी बिल, लेबर कोड जैसे काले कानून लाकर कर्मचारियों के अधिकारों पर हमला किया जा रहा है। हरियाणा रोडवेज वर्कर्स यूनियन सरकार से मांग करती है कि रोडवेज कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान करे, अन्यथा कर्मचारी आंदोलन के लिए मजबूर होगा।

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