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कृषि विज्ञान केंद्र सिरसा में धान कीटनाशकों के सुरक्षित एवं विवेकपूर्ण उपयोग तथा उत्तम कृषि पद्धतियों पर क्षमता निर्माण कार्यक्रम

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 mahendra india news, new delhi
कृषि विज्ञान केंद्र, सिरसा द्वारा एपेडा (APEDA) के सहयोग से “धान में कीटनाशकों के सुरक्षित एवं विवेकपूर्ण उपयोग तथा उत्तम कृषि पद्धतियों के अंगीकरण” विषय पर एक दिवसीय क्षमता निर्माण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में लगभग 200 किसानों ने सक्रिय रूप से भाग लिया, जिन्होंने विशेषज्ञों से नवीनतम जानकारियाँ प्राप्त कीं।


कार्यक्रम के मुख्य अतिथि चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय, हिसार के कुलपति प्रो. बलदेव राज कम्बोज रहे। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि आज की खेती में कीटनाशकों का विवेकपूर्ण उपयोग अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि इसका सीधा प्रभाव न केवल फसल की गुणवत्ता बल्कि पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य पर भी पड़ता है। उन्होंने किसानों से आह्वान किया कि वे कृषि कार्यों में वैज्ञानिक सलाह पर आधारित तकनीकों का ही
प्रयोग करें और गुड एग्रीकल्चरल प्रैक्टिसेज (GAPs) को अपनाकर बासमती धान का उत्पादन करें। उन्होंने यह भी कहा कि गुणवत्तापूर्ण और अवशेष-मुक्त धान उत्पादन से ही भारत की स्थिति अंतरराष्ट्रीय बाजार में मजबूत बनेगी और किसानों की आमदनी बढ़ेगी।


कृषि विज्ञान केंद्र, सिरसा के समन्वयक डॉ. देवेंद्र सिंह जाखड़ ने कार्यक्रम में उपस्थित सभी अतिथियों और
किसानों का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि केवीके का मुख्य उद्देश्य किसानों को वैज्ञानिक तकनीकों से जोड़ना
और उन्हें व्यवहारिक प्रशिक्षण देकर फसल उत्पादन में सुधार लाना है। इस अवसर पर डॉ. बलवान सिंह, निदेशक विस्तार शिक्षा, सीसीएसएचएयू, हिसार ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय की नवीनतम तकनीकों को खेत स्तर तक पहुँचाना ही विस्तार सेवाओं का लक्ष्य है। उन्होंने किसानों से आग्रह किया कि वे केवल रासायनिक उपायों पर निर्भर न रहें बल्कि समेकित कृषि
पद्धतियों को अपनाएँ जिससे लागत कम हो और उत्पादन टिकाऊ रहे। एपेडा से आए वैज्ञानिक डॉ. प्रमोद कुमार और डॉ. सुमन देवी ने किसानों को बासमती धान के निर्यात मानकों,
गुणवत्ता नियंत्रण और वैश्विक बाजार की आवश्यकताओं पर जानकारी दी। उन्होंने बताया कि आज अंतरराष्ट्रीय खरीदार केवल वही उत्पाद पसंद करते हैं जो अवशेष रहित और सुरक्षित तरीके से तैयार किए गए हों। अतः किसानों को फसल उत्पादन के प्रत्येक चरण में सावधानी बरतनी चाहिए।

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डॉ. सुखदेव सिंह कम्बोज, उपनिदेशक कृषि, सिरसा ने सरकार द्वारा चलाए जा रहे विभिन्न कार्यक्रमों और योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने किसानों को प्रोत्साहित किया कि वे इन योजनाओं का लाभ उठाएँ और कृषि विभाग तथा विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों से निरंतर संपर्क बनाए रखें।
कार्यक्रम में शामिल 200 किसानों ने विशेषज्ञों के व्याख्यानों को ध्यानपूर्वक सुना और अपनी जिज्ञासाओं को प्रश्नोत्तर सत्र में रखा। किसानों ने माना कि इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम उन्हें आधुनिक कृषि पद्धतियों से जोड़ने में सहायक सिद्ध होते हैं।