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CDLU SIRSA में साहसी बनो, आत्मविश्वासी बनो विषय पर आधारित गीता के जीवन, समाज एवं उच्च शिक्षा पर विस्तार व्याख्यान का आयोजन

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CDLU SIRSA organised an extensive lecture on Geeta's life, society and higher education based on the topic 'Be courageous, be self-confident

Mahendra india news, new delhi
  चौधरी देवीलाल विश्वविद्यालय, सिरसा के सभागार में साहसी बनो, आत्मविश्वासी बनो विषय पर आधारित गीता के जीवन, समाज एवं उच्च शिक्षा में महत्त्व को रेखांकित करते हुए एक विस्तार व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि परम पूज्य गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद जी महाराज रहे।


स्वामी ज्ञानानंद जी महाराज ने अपने उद्बोधन में कहा कि श्रीमद्भगवद्गीता का मूल संदेश है साहस और आत्मविश्वास के साथ जीवन के प्रत्येक कर्तव्य का निर्वहन। गीता मनुष्य को भय, भ्रम और निराशा से मुक्त कर कर्मपथ पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे जीवन की चुनौतियों का सामना साहस, आत्मबल और सकारात्मक सोच के साथ करें।

स्वामी जी ने समय के महत्त्व पर बल देते हुए कहा कि समय अमूल्य है, अतः उसका सदुपयोग ही सफलता की कुंजी है। उन्होंने प्रसिद्ध शूटिंग खिलाड़ी मनु भाकर का उदाहरण देते हुए बताया कि उनकी उपलब्धियों के पीछे गीता से प्राप्त आत्मसंयम, एकाग्रता और आत्मविश्वास की शक्ति निहित है। उन्होंने कहा कि स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मस्तिष्क का विकास संभव है और स्वस्थ मस्तिष्क के लिए ध्यान व साधना अनिवार्य है। स्वामी जी ने विश्वविद्यालय में विद्यार्थियों व शिक्षकों के लिए गीता पर अल्पकालिक एवं दीर्घकालिक पाठ्यक्रम आरंभ करने पर जोर दिया, जिससे नैतिक मूल्यों और सामाजिक चेतना को मजबूती मिले।

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कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि पूर्व कुलगुरु गुरुग्राम विश्वविद्यालय डॉ. मार्कंडेय आहूजा ने कहा कि गीता जीवन को दिशा देती है और विद्यार्थियों को साहसी, आत्मविश्वासी और कर्तव्यनिष्ठ नागरिक बनने की प्रेरणा प्रदान करती है। इस अवसर पर सीडीएलयू के कुलगुरु प्रो. विजय कुमार ने कहा कि गीता जीवन दर्शन का आधार है और सीडीएलयू में गीता से संबंधित विभिन्न पाठ्यक्रम प्रारंभ किए जाएंगे। इसी उद्देश्य से विश्वविद्यालय और जियो गीता के बीच समझौता (एमओयू) भी किया गया।

इस अवसर पर कुलसचिव डॉ. सुनील कुमार एवं कार्यक्रम कन्वीनर प्रो. आरती गौड़ ने भी अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम का शुभारंभ सरस्वती वंदना एवं दीप प्रज्वलन से हुआ तथा समापन राष्ट्रगान के साथ किया गया। इस कार्यक्रम में विश्वविद्यालय तथा विश्वविद्यालय से संबंधित महाविद्यालयों के प्राध्यापकों व विद्यार्थियों ने भाग लिया।