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सीडीएलयू SIRSA में ‘समग्र स्वास्थ्य एवं सकारात्मक व्यक्तित्व विकास’ विषय पर विस्तार व्याख्यान आयोजित

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CDLU SIRSA organized an extension lecture on 'Holistic Health and Positive Personality Development

mahendra india news, new delhi

चौधरी देवीलाल विश्वविद्यालय, सिरसा में यूनिवर्सल ह्यूमन वैल्यूज सेल के द्वारा विश्वविद्यालय के कर्मचारियों के सर्वांगीण विकास एवं स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा देने के उद्देश्य से "साइको न्यूरोबिक्स फॉर होलिस्टिक हेल्थ एंड पॉजिटिव पर्सनालिटी डेवलपमेंट" विषय पर एक विस्तार व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. विजय कुमार ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की।


मुख्य अतिथि प्रो. विजय कुमार ने अपने संबोधन में कहा कि शारीरिक, मानसिक, भावनात्मक एवं नैतिक स्वास्थ्य मिलकर स्वस्थ एवं सफल जीवन की आधारशिला तैयार करते हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री प्रदान करना नहीं, बल्कि ऐसे जिम्मेदार, संवेदनशील एवं चरित्रवान नागरिक तैयार करना है जो समाज और राष्ट्र के विकास में सकारात्मक योगदान दे सकें।
कुलगुरु ने कर्मचारियों को संबोधित करते हुए कहा कि आज के समय में तनाव, प्रतिस्पर्धा और तकनीकी निर्भरता के कारण उनके सामने अनेक चुनौतियां हैं। ऐसे में आत्मविश्वास, सकारात्मक दृष्टिकोण और नैतिक मूल्यों को जीवन में अपनाना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने नियमित योग, ध्यान, व्यायाम तथा स्वस्थ दिनचर्या अपनाने का आह्वान किया और कहा कि स्वस्थ मन एवं स्वस्थ शरीर ही जीवन में सफलता और संतुष्टि का मार्ग प्रशस्त करते हैं।


कार्यक्रम में वैदिक योग के विशेषज्ञ डॉ. महेश डोगरा ने कर्मचारियों को संबोधित करते हुए शारीरिक, मानसिक, भावनात्मक एवं नैतिक स्वास्थ्य के विभिन्न आयामों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि वर्तमान प्रतिस्पर्धात्मक युग में केवल शारीरिक रूप से स्वस्थ होना पर्याप्त नहीं है, बल्कि मानसिक संतुलन, भावनात्मक परिपक्वता एवं नैतिक मूल्यों का विकास भी उतना ही आवश्यक है। उन्होंने साइको न्यूरोबिक्स की अवधारणा को समझाते हुए बताया कि सकारात्मक सोच, ध्यान, योग एवं आत्म-अनुशासन के माध्यम से व्यक्ति अपने व्यक्तित्व का समग्र विकास कर सकता है।

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ब्रह्माकुमारी बिंदु बहनजी ने अपने संबोधन में कहा कि सकारात्मक विचार, आत्मचिंतन और आध्यात्मिक जागरूकता स्वस्थ एवं संतुलित जीवन की आधारशिला हैं। उन्होंने कहा कि मनुष्य के विचार ही उसके व्यक्तित्व का निर्माण करते हैं, इसलिए सकारात्मक सोच को जीवन का अभिन्न अंग बनाना चाहिए। उन्होंने कर्मचारियों को प्रतिदिन कुछ समय ध्यान एवं आत्ममंथन के लिए निकालने की सलाह दी, जिससे मानसिक शांति, आत्मविश्वास और निर्णय क्षमता में वृद्धि होती है। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के गैर-शिक्षक अधिकारियों व कर्मचारियों ने भाग लिया। अंत में यूनिवर्सल ह्यूमन वैल्यूज सेल के कोऑर्डिनेटर डॉ रविंद्र ढिल्लों द्वारा मुख्य अतिथि एवं वक्ता का धन्यवाद ज्ञापित किया गया।