गीत-संगीत, लोक नृत्य और युवा प्रतिभाओं के रंगों से सजेगा सीडीएलयू, 25 अक्टूबर से त्रिवेणी युवा महोत्सव का आगाज
MAHENDRA INDIA NEWS, NEW DELHI
कहीं हरियाणवी लोक नृत्य की थाप, कहीं पंजाबी गीतों की गूंज, तो कहीं नाटक, गजल, कव्वाली और ललित कलाओं के रंग, चौधरी देवीलाल विश्वविद्यालय, सिरसा का परिसर 25 अक्टूबर से युवा प्रतिभाओं और सांस्कृतिक उल्लास से सराबोर होने जा रहा है। ‘युवा उमंग, संस्कृति के संग’ थीम के तहत आयोजित होने वाले 13वें त्रिवेणी युवा महोत्सव में विश्वविद्यालय के शिक्षण विभागों और विश्वविद्यालय से संबंधित महाविद्यालयों के लगभग दो हजार विद्यार्थी 34 विधाओं में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करेंगे। चार दिवसीय यह महोत्सव 28 अक्टूबर तक चलेगा और विद्यार्थियों को अपनी रचनात्मकता, सांस्कृतिक विरासत तथा कलात्मक कौशल प्रदर्शित करने का मंच प्रदान करेगा।
विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. विजय कुमार ने कहा कि आज के प्रतिस्पर्धात्मक और तेजी से बदलते दौर में युवाओं के लिए केवल शैक्षणिक डिग्री हासिल करना पर्याप्त नहीं है। उन्हें रचनात्मक सोच, संवाद कौशल, नेतृत्व क्षमता, टीम भावना और बदलती परिस्थितियों के अनुरूप स्वयं को ढालने की क्षमता भी विकसित करनी होगी। सांस्कृतिक गतिविधियां इन गुणों को निखारने का प्रभावी माध्यम हैं। उन्होंने कहा कि युवा महोत्सव विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा पहचानने, आत्मविश्वास बढ़ाने और अपनी अभिव्यक्ति को व्यापक मंच देने का अवसर प्रदान करता है।
कुलगुरु प्रो. विजय कुमार ने कहा कि आज जब डिजिटल माध्यमों और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के प्रभाव से जीवन तथा कार्यक्षेत्र तेजी से बदल रहे हैं, तब अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़े रहना और नई सोच को अपनाना दोनों जरूरी हैं। भारतीय संस्कृति की विविधता, लोक परंपराएं और मानवीय मूल्य हमारी पहचान हैं। ऐसे आयोजन युवाओं को अपनी विरासत से जोड़ने के साथ उनमें नवाचार, सामाजिक संवेदनशीलता और सामूहिक जिम्मेदारी की भावना विकसित करते हैं। उन्होंने कहा कि विभिन्न क्षेत्रों की सांस्कृतिक प्रस्तुतियां विद्यार्थियों को एक-दूसरे की परंपराओं को समझने और विविधता में एकता के भारतीय विचार को आत्मसात करने का अवसर देती हैं।
प्रो. विजय कुमार ने बताया कि महोत्सव के सफल आयोजन के लिए तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। विभिन्न समितियों का गठन किया गया है और जिला प्रशासन के सहयोग से सुरक्षा, यातायात तथा अतिथि सत्कार की व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से पूरे उत्साह, अनुशासन और खेल भावना के साथ भाग लेने का आह्वान किया।
भव्य सांस्कृतिक फेरी से होगा शुभारंभ
महोत्सव का शुभारंभ 25 अक्टूबर को भव्य सांस्कृतिक फेरी से होगा। यह फेरी विश्वविद्यालय के मुख्य द्वार पर स्थित जननायक चौधरी देवीलाल की प्रतिमा से प्रारंभ होकर एम.पी. हॉल तक पहुंचेगी। इसमें भाग लेने वाले शिक्षण विभागों और संबंधित महाविद्यालयों की टीमें अपनी सांस्कृतिक पहचान, पारंपरिक वेशभूषा और रचनात्मक प्रस्तुतियों के माध्यम से भारतीय संस्कृति की विविधता का प्रदर्शन करेंगी।
34 विधाओं में प्रतिभा का प्रदर्शन
युवा कल्याण निदेशक प्रो. मंजू नेहरा ने बताया कि महोत्सव में एसोसिएशन ऑफ इंडियन यूनिवर्सिटीज (एआईयू) के निर्धारित मानदंडों के अनुसार संगीत, नृत्य, नाट्य कला, साहित्यिक गतिविधियों और ललित कला सहित कुल 34 विधाओं में प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी। उन्होंने कहा कि यह मंच विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा निखारने, अन्य संस्थानों के विद्यार्थियों के साथ अनुभव साझा करने और स्वस्थ प्रतिस्पर्धा के माध्यम से आगे बढ़ने का अवसर देगा।
उन्होंने कहा कि त्रिवेणी युवा महोत्सव युवाओं की रचनात्मक ऊर्जा को सकारात्मक दिशा देने और उन्हें भारतीय कला, साहित्य एवं संस्कृति से जोड़ने का सशक्त माध्यम है। इस आयोजन के जरिए एक भारत, श्रेष्ठ भारत की भावना को भी मजबूती मिलेगी, क्योंकि विभिन्न क्षेत्रों की सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देश की विविधता, एकता और साझा विरासत को एक मंच पर प्रस्तुत करेंगी।
आई-कार्ड अनिवार्य, पार्किंग के लिए विशेष व्यवस्था
महोत्सव के दौरान विश्वविद्यालय परिसर में प्रवेश करने वाले विद्यार्थियों एवं कर्मचारियों के लिए पहचान-पत्र (आई-कार्ड) दिखाना अनिवार्य होगा। सुरक्षा कर्मियों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। दुपहिया वाहनों की पार्किंग मुख्य द्वार के निकट तथा चार पहिया वाहनों की पार्किंग एम.पी. हॉल के सामने मैदान में निर्धारित की गई है। विश्वविद्यालय में प्रवेश मुख्य द्वार से और निकास कचहरी वाले गेट से होगा।
चार दिन तक लोक संस्कृति और रचनात्मकता का संगम
महोत्सव के दौरान हरियाणा, पंजाब और राजस्थान की लोक संस्कृति पर आधारित नृत्य, नाटक, गीत, गजल, कव्वाली और लोक वादन की प्रस्तुतियां आकर्षण का केंद्र रहेंगी। इसके अतिरिक्त प्रसिद्ध कलाकारों की विशेष प्रस्तुतियां भी होंगी। विश्वविद्यालय के शिक्षण विभागों और संबंधित महाविद्यालयों के विद्यार्थियों की भागीदारी से परिसर में सांस्कृतिक उल्लास, रचनात्मकता और राष्ट्रीय एकता का वातावरण बनेगा।
