हरियाणा में राज्यसभा चुनाव को लेकर सेंधमारी न हो सके कांग्रेस ने हिमाचल भेजे 31 एमएलए, पूर्व सीएम हुड्डा सहित छह एमएलए नहीं गये
हरियाणा प्रदेश में गर्मी के साथ राज्यसभा चुनाव को लेकर पारा बढ़ रहा है। प्रदेश में एक बार फिर से राजनीतिक सरगर्मी तेज है।
इसी को लेकर हरियाणा कांग्रेस ने अपने विधायकों को राज्यसभा चुनाव में जोड़ तोड़ की आशंका को देखते हुए हिमाचल प्रदेश भेज दिया है। जानकारी के अनुसार चंडीगढ़ में नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा के आवास पर मीटिंग हुई। इसके बाद सभी ने एक साथ लंच किया। बाद में 31 विधायक 3 लग्जरी टेंपो ट्रैवलर में शिमला के कुफरी रवाना हुए। वह वहां गलू स्थित एक रिजार्ट में ठहराए गए हैं।
जानकारी के अनुसार हुड्डा व चंद्रमोहन समेत छह विधायक नहीं गए हैं। हिमाचल की सुक्खू सरकार ने विधायकों की सुरक्षा के कड़े बंदोबस्त किए हैं। विधायकों को कुफरी भेजे जाने के सवाल पर भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा कि उन्हें नहीं मालूम कि कौन विधायक कहां गया है। उन्होंने कहा कि 16 मार्च को सभी विधायक एकजुट होकर मतदान करेंगे और कांग्रेस की जीत सुनिश्चित करेंगे।
हिमाचल ये विधायक इस कारण से नहीं गये
विधायक विनेश फोगाट : जुलाना से एमएलए हैं और पूर्व सीएम हुड्डा गुट की है। उनका बेटा छोटा होने से विनेश बाहर नहीं जा सकी है। इनकी क्रॉस वोटिंग की संभावना न के बराबर है।
कुलदीप वत्स : बादली के विधायक व पूर्व सीएम हुड्डा के करीबी एमएलए में से एक। पारिवारिक समारोह के चलते घर से बाहर नहीं जा सके। इनकी भी क्रॉस वोटिंग की संभावना न के बराबर।
परमवीर सिंह व मोहम्मद इलियास : टोहाना के एमएलए परमवीर सिंह और पुन्हाना के एमएलए मोहम्मद इलियास बीमार है। इस कारण से दोनों ने बाहर जाने में असहमति जताई हैं।
एमएलए चंद्रमोहन : पंचकूला के एमएलए व सिरसा की सांसद कुमारी सैलजा खेमे के है। उन्होंने स्वयं को अस्वस्थ बताकर बाहर जाने से मना किया है। इस चुनाव से सैलजा भी दूर नजर आ रही हैं।
हरियाणा विधानसभा में कुल 90 सदस्य हैं। इनमें भाजपा के 48 विधायक हैं जबकि कांग्रेस के 37। इसके अलावा इनेलो के दो विधायक और तीन निर्दलीय विधायक हैं। राज्यसभा चुनाव में जीत के लिए किसी भी उम्मीदवार को 31 वोटों की आवश्यकता होती है। बीजेपी के पास 3 आजाद एमएलए के समर्थन सहित कुल 51 वोट माने जा रहे हैं। ऐसे में भाजपा के उम्मीदवार संजय भाटिया तो आसानी से जीत की स्थिति में है। उसके बाद भी बीजेपी के पास करीब 20 वोट बचते हैं।
आपको बता दें कि वहीं दूसरी सीट के लिए मुख्य मुकाबला कांग्रेस समर्थित कर्मवीर बौद्ध और आजाद उम्मीदवार सतीष नांदल के बीच माना जा रहा है। नांदल को अंदरखाने बीजेपी का समर्थन है। यदि कांग्रेस के सभी विधायक एकजुट होकर वोट करते हैं और कोई क्रॉस वोटिंग नहीं होती है तो कर्मवीर बौद्ध की जीत करीबन तय है। अगर नांदल इनेलो के 2 वोट हासिल करने के साथ-साथ कांग्रेस में करीब 9 वोटों की सेंध लगा लेते हैं तो समीकरण बदल जाएगा।
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