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सिरसा के शिक्षण संस्थानों में नशे पर सख्ती, एसपी दीपक सहारन ने 5 सदस्यीय D-एडिक्शन टीम का गठन किया

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Mahendra india news, new delhi
हरियाणा सरकार के 'नशा मुक्त हरियाणा अभियान' को जमीनी स्तर पर प्रभावी बनाने के लिए सिरसा पुलिस ने नई पहल की है। पुलिस अधीक्षक दीपक सहारन ने जिले के सभी सरकारी व निजी शिक्षण संस्थानों में नशे के खिलाफ जागरूकता अभियान चलाने के लिए पांच सदस्यीय डी-एडिक्शन टीम का गठन किया है। टीम का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करना, नशे की रोकथाम करना और शिक्षण संस्थानों के आसपास नशा तस्करी पर प्रभावी नियंत्रण सुनिश्चित करना है।

SIRSA SP दीपक सहारन ने बताया कि टीम के सदस्य नियमित रूप से स्कूलों, कॉलेजों, विश्वविद्यालयों, आईटीआई, पॉलिटेक्निक, कोचिंग सेंटर और अन्य शिक्षण संस्थानों का दौरा करेंगे। विद्यार्थियों को नशे से होने वाले शारीरिक, मानसिक, सामाजिक और आर्थिक नुकसान के साथ-साथ मादक पदार्थों से जुड़े कानूनी प्रावधानों की भी जानकारी दी जाएगी। उन्होंने बताया कि समय-समय पर शिक्षण संस्थानों में सेमिनार, कार्यशालाएं, जागरूकता रैलियां, संवाद कार्यक्रम और काउंसलिंग सत्र आयोजित किए जाएंगे। इन कार्यक्रमों में विद्यार्थियों के साथ अभिभावकों और शिक्षकों की भी भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी, ताकि युवाओं को नशे से दूर रखकर सकारात्मक और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित किया जा सके।


SIRSA SP ने कहा कि टीम शिक्षण संस्थानों के प्राचार्यों, शिक्षकों और छात्र प्रतिनिधियों के सहयोग से ऐसे विद्यार्थियों की पहचान भी करेगी, जो नशे की लत से प्रभावित हैं या जोखिम की श्रेणी में आते हैं। ऐसे मामलों में विद्यार्थियों की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी तथा जरूरत पड़ने पर स्वास्थ्य विभाग, मनोवैज्ञानिकों और काउंसलरों की मदद से उचित परामर्श और उपचार उपलब्ध कराया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि किसी विद्यार्थी या अन्य स्रोत से नशा उपलब्ध कराने वाले व्यक्ति, स्थान या गिरोह की सूचना मिलती है तो उसका तत्काल गोपनीय सत्यापन कर एनडीपीएस एक्ट सहित अन्य कानूनी प्रावधानों के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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शिक्षण संस्थानों के आसपास नशा बेचने वाले असामाजिक तत्वों के खिलाफ विशेष अभियान भी चलाया जाएगा। एसपी दीपक सहारन ने सभी संबंधित अधिकारियों को टीम को पूरा सहयोग देने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि प्रत्येक भ्रमण, जागरूकता कार्यक्रम, काउंसलिंग और कानूनी कार्रवाई का रिकॉर्ड तैयार कर हर माह प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की जाएगी। उन्होंने कहा, "नशा मुक्त समाज का निर्माण केवल पुलिस की नहीं, बल्कि पूरे समाज की साझा जिम्मेदारी है। शिक्षण संस्थानों में शुरू की गई यह पहल युवाओं के भविष्य को सुरक्षित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगी।"