जीरे का भाव फिसला, कम उत्पादन और एक्सपोर्ट घटने से रेटों में दिखा दबाव
जीरा की प्रतिवर्ष मांग बढ़ रही है। जीरा को लेकर बड़ी खबर सामने आ रही है रेटों को लेकर। जीरा में लगातार चौथे माह गिरावट जारी है। जीरे का भाव 7 माह के नीचे फिसला। NCDEX पर मई वायदा रेट 19200 के नीचे फिसला। आपको बता दें कि इस फरवरी 2026 से जीरे का रेट गिर रहा है। 4 माह में 20 फीसद से अधिक की गिरावट देखने को मिली। वर्ष की शुरुआत में 25000 के रेट पार था। एक्सपोर्ट घटने से रेटों में गिरावट जारी है।
बता दें कि यूएसस्-ईरान के बीच जंग से जीरे का एक्सपोर्ट नहीं हो रहा है । पिछले वर्ष से ट्रेड 50 फीसद कम हो गया है। युद्ध के कारण एक्सपोर्ट लागत काफी बढ़ी है। शिपमेंट और कंटेनर मिलने में मुश्किलें हो रही है। जीरे की फसल पिछले वर्ष से 20 फीसद कम है।
इसका कारण बुवाई के वक्त मिट्टी में अधिक नमी, खेत की तैयारी में देरी और ऐतिहासिक 2023 की तेज़ी से आए बड़े सुधार के बाद किसानों का कमजोर माहौल था। सरसों और अरंडी जैसी दूसरी फसलों की तुलना में कम रिटर्न ने भी बुवाई को कमजोर किया।
आपको बात दें कि मौसम की खराबी ने प्रोडक्टिविटी पर और असर डाला। अधिक नमी ने कई उत्पादक इलाकों में अंकुरण और फसल के जमने पर असर डाला, जबकि पौधों की ग्रोथ के दौरान अनियमित तापमान ने पैदावार की क्षमता को कम कर दिया। राजस्थान का रकबा काफ़ी स्थिर रहा, लेकिन वहां कम प्रोडक्टिविटी गुजरात की गिरावट की भरपाई नहीं कर पाई।
इसी के साथ ही जनवरी-अप्रैल 2026 के दौरान फिजिकल मंडी में आवक 5 फीसद घटकर करीबन 209,000 टन रह गई, जबकि 2025 में इसी समय में यह 220,500 टन थी। इससे पता चलता है कि मुख्य बाज़ारों में नई फसल की आवक कम होगी।
आवक को कम करने वाली एक और ज़रूरी वजह यह है कि कई किसान अभी मंडियों में तेज़ी से बेचने के बजाय स्टॉक रखे हुए हैं, क्योंकि आईएनआर 19,500-21,000 क्विंटल के आस-पास के रेट 2023 के दौरान दर्ज की गई ऐतिहासिक ऊंचाई की तुलना में आकर्षक नहीं मानी जा रही हैं।
