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2 वर्ष के अतिरिक्त सेवा विस्तार को वापस लेने के फैसले से प्रदेश के दिव्यांगजन में असंतोष

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Dissatisfaction among the disabled people of the state due to the decision to withdraw the additional service extension of 2 years

mahendra india news, new delhi
 बीते दिन लंबे समय से दिव्यांगजन को 58 वर्ष से 60 वर्ष तक की 2 वर्ष की अतिरिक्त सेवा विस्तार की नीति को हरियाणा सरकार द्वारा वापिस ले लिया गया है, जिसके चलते प्रदेश के दिव्यांगजन में गहरी असंतोष की लहर है। दिव्यांगजन कल्याणार्थ संगठन विकलांग संघ उमंग सिरसा (रजि.) के प्रदेश अध्यक्ष बंसी लाल झोरड़ ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी करके बताया कि पंजाब सिविल सेवा नियम वॉल्यूम 1, भाग-1 के नियम 3.26, के तहत 70 प्रतिशत या इससे अधिक दिव्यांगता ग्रस्त दिव्यांगजन व दृष्टिहीन कर्मचारियों को 31 जनवरी 2006 से हरियाणा सरकार द्वारा 58 वर्ष से 60 वर्ष तक की 2 वर्ष की अतिरिक्त सेवा प्रदान की जारी रही है।

इस नियम को चुनौती देते हुए 70 प्रतिशत से कम दिव्यांगता वाले प्रदेश के दिव्यांगजन ने माननीय पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर मांग की थी कि हमें भी 2 वर्ष की अतिरिक्त सेवा की सुविधा प्रदान की जाए। जिस पर माननीय न्यायालय में राज्य सरकार को 40 प्रतिशत से लेकर 100 प्रतिशत तक सभी दिव्यांगजन को यह सुविधा प्रदान करने के निर्देश दिए, ताकि दिव्यांगजन में भेदभाव न हो। ऐसा प्रतीत होता है कि राज्य सरकार ने सुविधा का दायरा बढ़ाने की बजाय पूर्व में 70 प्रतिशत या इससे अधिक दिव्यांगताग्रस्त दिव्यांगजन को मिल रही सुविधा को भी वापिस ले दिया है,

जोकि दुर्भाग्यपूर्ण है। झोरड़ ने बताया कि जहां बीजेपी शासित केंद्र सरकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्देश पर विकलांग शब्द को दिव्यांग के रूप में नामित कर रही है व पूरे देश में सुगम्य भारत अभियान चला रही है, वहीं राज्य की भाजपा सरकार केंद्र सरकार की भावना के विपरीत पूर्व सरकारों प्रदत सुविधाओं को बढ़ाने की बजाय पूर्व में जारी सुविधाओं को भी मनमानी ढंग से वापस ले रही है। देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्देश पर 20 वर्षों के पश्चात जहां केंद्र सरकार ने दिव्यांग अधिकार अधिनियम 2016 को अधिसूचित कर दिव्यांगजन को प्रदत्त सुविधाओं का धरातल पर विस्तार करने का काम किया है, वहीं राज्य सरकार ने इसके विपरीत निर्णय लेकर दिव्यांग अधिकार अधिनियम 2016 की आत्मा के प्रतिकूल कार्य किया है।

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बदलते परिवेश में जहां सरकार को कल्याणकारी राज्य की अवधारणा को सार्थक करते हुए जहां राज्य सरकार को दिव्यांगजन को धरातल पर आने वाली बाधाओं दूर करते हुए और अधिक सुविधाएं प्रदान करने की आवश्यकता है, वहीं पूर्व में जारी सुविधाओं को वापस लेना कल्पनाओं से कोसों दूर है। हमें आशा ही नहीं पूरा यकीन है कि कल्याणकारी राज्य की अवधारणा को सार्थक करते हुए राज्य सरकार अपने फैसले पर दिव्यांगजन के हितार्थ पुनर्विचार करेगी। इस संदर्भ में संगठन शीघ्र ही मुख्यमंत्री हरियाणा से मुलाकात कर फैसले पर पुन: विचार करने की मांग करेगा।

यदि फिर भी दिव्यांगजन की मांग पर विचार नहीं किया गया तो प्रदेश के दिव्यांगजन को विवश होकर आंदोलन का रुख अख्तियार करना पड़ेगा। इस अवसर पर झोरड़ के साथ राज्य संरक्षक सुभाष चंद्र कुलरिया, राज्य सचिव नवीन कुमार, विजय अवतार सिंह, राजेश, सुरेश, शशि आदि विशेष रूप से उपस्थित थे।