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दिव्य ज्योति जागृति संस्थान ने साहुवाला स्थित आश्रम में मनाया लोहड़ी व मकर संक्रांति का पर्व

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Divya Jyoti Jagriti Sansthan celebrated the festival of Lohri and Makar Sankranti at the ashram located in Sahuwala

 mahendra india news, new delhi
सिरसा दिव्य ज्योति जागृति संस्थान द्वारा साहुवाला स्थित आश्रम में लोहड़ी मकर संक्रांति का पावन पर्व अत्यंत उत्साह, श्रद्धा और आत्मिक सामाजिक चेतना के साथ मनाया गया। इस अवसर पर साध्वी पूनम भारती ने संबोधित करते हुए कहा कि यह पर्व मौसम परिवर्तन और नई फसल के स्वागत का संदेश देता है।

उन्होंने इस अवसर पर आध्यात्मिक जागरूकता सामाजिक समरसता और नारी सशक्तिकरण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर भी लोगों का ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने समाज को भ्रूण हत्या जैसी गंभीर समस्या के प्रति जागरूक किया। उन्होंने कहा कि भारत वह पवित्र भूमि है, जहां युगों से नारी शक्ति की पूजा होती चली आ रही है। यहां बेटी को लक्ष्मी, सरस्वती और दुर्गा का स्वरूप माना गया है। परंतु आज दु:ख की बात है कि यह महान परंपरा संकट में पड़ गई है। घरों के आंगनों की शोभा बनने वाली बेटियां आज जन्म से पहले ही मिटाई जा रही हैं।

साध्वी जी ने जोर देते हुए कहा कि नारी के बिना यह संसार अधूरा है। नारी देश की आधी आबादी है और यदि नारी नहीं रहेगी तो समाज और देश का अस्तित्व भी संकट में पड़ जाएगा। इसलिए बेटियों को कभी भी बोझ न समझा जाए, बल्कि उन्हें सम्मान, सुरक्षा और समान अधिकार दिए जाएं। बेटी केवल परिवार की ही नहीं, बल्कि पूरे समाज की शान होती है। उन्होंने आगे कहा कि लोहड़ी का पर्व केवल लोक परंपरा या भौतिक खुशियों तक सीमित नहीं हैए बल्कि यह गहरे आध्यात्मिक संदेश भी देता है। लोहड़ी की अग्नि में डाले जाने वाले तिल हमें यह सिखाते हैं कि जब जीवन में सच्चे गुरु का आगमन होता है, तो वे ब्रह्मज्ञान का वरदान प्रदान करते हैं।

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इस ज्ञान की अग्नि में मनुष्य अपने अवगुणों, विकारों और बुरे कर्मों को भस्म कर सकता है। साध्वी जी ने समझाया कि लोहड़ी प्रेम का प्रतीक है, परंतु सच्चा प्रेम वही है, जो मोह से रहित हो। जहां मोह होता है, वहां सच्चा प्रेम टिक नहीं सकता। वास्तविक और शुद्ध प्रेम केवल प्रभु से ही संभव है, जो आत्मज्ञान के माध्यम से प्राप्त किया जा सकता है। प्रभु का अनुभव और साक्षात्कार भी आत्मज्ञान से ही संभव है। लोहड़ी का यह पावन पर्व हमें न केवल सामाजिक जिम्मेदारियों की याद दिलाता है, बल्कि जीवन के इन गहरे आध्यात्मिक रहस्यों को समझने और अपने भीतर आत्मिक प्रकाश जगाने का अवसर भी प्रदान करता है