कुत्ता बिल्ली भी तो पशु ही है, भले ही ये स्ट्रीट हो या स्ट्रे हो, है धरती माता का परिवार ही, इनकी भी केयर करनी चाहिए
mahendra india news, new delhi
लेखक
नरेंद्र यादव
नेशनल वाटर अवॉर्डी
यूथ एंपावरमेंट मेंटर
जहां लोग ओवर ईटिंग करते हो, इससे बीमारियां मोल लेते हो, इससे भी अधिक भोजन को डस्टबिन में डाल देते हो, शादी विवाह में तो हद ही कर देते है और मिठाइयां जैसे जलेबी, लड्डू, मूंग दाल हलवे तक को भी कूड़ेदान में डालने की हैबिट हो, वहीं कुछ बच्चें भोजन के बिना, कपड़े के बिना, सिर पर छत के बिना या शिक्षा के बिना रह जाए, तो तक़लीफ होती है, बहुत दुख होता है कि कुछ लोगों की बुरी आदत के कारण हमारे ही देश के वो नागरिक अक्षम रह जाते है, जिससे राष्ट्र के विकास में बाधा आती है। इसी के साथ जब हम बेजुबान जानवरों या पशुओं को रोटी के एक टुकड़े के लिए इधर उधर भटकते देखते है तो दुख बहुत होता है, तक़लीफ बहुत होती है और लगता है कि क्या यही सिविल सोसाइटी है, जिन्हे किसी की चिंता नहीं है। हम तो अक्सर इन्हीं बातों में उलझे रहते है कि किस पशु की देखभाल करें और किसकी ना करें। हम पशु व जानवर शब्द से भ्रमित हो जाते है, वास्तव में पशु तथा जानवर का एक ही अर्थ है, पशु संस्कृत भाषा का एक शब्द है, यह संस्कृत में पश धातु से बना है जिसका मतलब होता है पाश में बांधना, और जानवर फारसी भाषा से आता है, जिसका अर्थ है चार पैरों वाला जीव। पशु का मतलब जो पाश में बंधा हो, और जानवर जो जान धारी हो अथवा प्राणधारी हो। पशुओं को देखो या इंसानों को देखो बस समझ व विवेक का ही तो अंतर है, इनमें भी कुत्ते तो बहुत ही सतर्क व संवेदनशील होते है जो धरती व ब्रह्मांडीय तरंगों का एहसास करते है तथा अपने मालिक को भी सतर्क करने का कार्य करते है, भूकंप आने से पहले ही सभी को चेता देते है, चाहे वो स्ट्रीट हो या पालतू हो।
जैसे ह्यूमन साइक्लॉजी होती है ऐसे ही पशुओं में भी तो हर कैटेगरी की अलग अलग साइक्लॉजी होती है, जैसे कुछ पशु पालतू होते है, कुछ स्ट्रीट पशु होते है, इसी तरह इंसानों में भी कुछ अपना घर बनाकर रहते है, कुछ बिना स्थाई घरों के भी तो रहते है, बस यही फिलोसॉफी है, बस यही दृष्टिकोण है जीवन का, इसे ही समझने की आवश्यकता है। हर जीव की अपनी जरुरते है, हर जीव में कुछ अच्छाइयां है कुछ बुराइयां है, वो प्रकृति ने उन्हें दिए है, जो मानवीय जीवन के लिए जरूरी है। जो इंसान स्थाई घर बना कर रहते है और जो बिना घर के रहते है, या पॉलीथिन ढाक कर घर बना कर रहते है, उनके अपने अपने जीवन के दृष्टिकोण रहते है, अपनी अपनी लिविंग स्टाइल होती है।
इसी प्रकार जो पशु घरों में पलते है या जो स्ट्रीट या स्ट्रे के रूप में खुद को दूसरे के सहारे से पालते है, उनमें भी बड़ा अंतर होता है। जब हम स्ट्रीट या स्ट्रे पशुओं की बात करते है, चाहे उसमें स्ट्रीट डॉग्स हो, बिल्ली हो, या हमारे दुधारू पशु हो जिसमें गाय, भैंस, सांड, भैंसा हो, सभी के अपने अपने प्रकृति गुण दोष है, सभी को खाने के लिए भोजन या चारा चाहिए, सभी को पीने के लिए पानी की जरूरत होती है, सभी को प्रकृति ने वैसा ही बनाया है, लेकिन अगर हम भावनाओं की बात करें तो वो चाहे पशु हो या इंसान हो, सभी को प्रभावित करती है, सभी को स्नेह प्यार की जरूरत होती है, सभी को देखभाल की जरूरत होती है, सभी मीठे बोल का भाव समझते है, सभी को पॉजिटिव बॉडी लेंग्वेज का एहसास होता है, सभी को सांत्वना तथा संवेदना की जरूरत होती है, सभी दुख तक़लीफ को महसूस करते है, सभी की आंखों से आंसु बहते है।
दोस्तो, केवल समझने की बात है कि जब हम घर में अपने ही बच्चों के साथ भेदभाव करते है तो उनके व्यवहार में भी अंतर आ जाता है जबकि इंसानों को तो भगवान ने विवेक दिया है, समझ दी है, फिर भी उनका व्यवहार क्रोध वा झुंझलाहट का हो जाता है, उग्रता व गुस्सा उनके सर पर चढ़ कर बोलने लगता है। हम यह भी देखते है कि आजकल बच्चें अपने मातापिता का भी सम्मान नहीं करते हैं और कुछ महान बच्चें तो मां बाप के साथ गाली गलौच तथा मारपीट भी कर देते है तो उनको समझाया जाता है उनकी काउंसलिंग की जाती है, उनको मेडिकल ऐड दी जाती है। या कोई अपराध कर देते है तो उन्हें सुधार घरों में भी रखा जाता है।
इसके अलावा जिन बच्चों का पालन पौषण या परवरिश सही वातावरण में नहीं हो पाती है, जिनकी संगत सही नहीं होती है, उन बच्चों पर नेगेटिव गतिविधियों का असर अधिक पड़ता है, वो बच्चें भी पटरी से उतर जाते है, उन्हें भी सुधार के लिए काउंसलिंग देने की जरूरत पड़ती है, कई बार उन्हें काउंसलिंग के साथ साथ मेडिकल ऐड तथा सुधार घर में भेजा जाता है तभी समाज सकारात्मक दिशा में चलता है। बिल्कुल यही बात पशुओं पर भी लागू होती है, चाहे वो कुत्ते बिल्ली हो, या दूसरे पशु हो। कुछ पशु जो पालतू हैं, जिनकी देखभाल अच्छे से होती है उनका अपने परिवार में मालिकों के साथ व्यवहार अच्छा होता है, लेकिन कई बार पालतू पशुओं में भी उग्रता आ जाती है और मालिक को भी नुकसान पहुंचा देते हैं। ऐसे पशुओं को मारपीट नहीं करनी चाहिए,
उनको भी इलाज की जरूरत होती है, चाहे वो पालतू पशु हो या फिर स्ट्रीट डॉग्स, स्ट्रे पशु हो, या स्ट्रे कैट्स हो, वो भी उग्र हो सकते है, तो उन्हें भी सांत्वना, संवेदना, मेडिकल ऐड, सुधार या काउंसिलिंग की जरूरत होती है। अगर मान लो किसी घर के किसी व्यक्ति द्वारा किसी प्रकार की उग्रता के कारण अपराध हो जाता है तो केवल उसी पर कार्यवाही की जाती है चाहे उसे सुधार घर भेजें, चाहे काउंसलिंग करें, चाहे मेडिकल ऐड दें, या फिर उन्हें डिटेन करके मेडिकल ऐड या सजा दी जाती है। इसी प्रकार पशु भी तो है चाहे वो पालतू हो या फिर स्ट्रीट हो, अगर कोई उग्रता दिखाते है तो उन्हें भी तो इलाज की जरूरत है, उन्हें भी सांत्वना व संवेदना की जरूरत होती है, लेकिन उनके जीवन के प्रति कोई संवेदनशील नहीं होना चाहते है,
बस सब यही कहने लगते है कि इनको इस दुनिया से बाहर करो। मेरी आँखें नम हो जाती है, जब हम ऐसे स्ट्रीट डॉग्स या स्ट्रे कैटल को देखते है, जिन्हें रोटी के दो टुकड़ों के लिए भी घर घर गली गली भटकना पड़ता है, गर्मियों में पानी को पशु पक्षी तरसते है, लेकिन मैं बहुत ही विनम्र भाव से कहना चाहता हूँ, बहुत आदर सम्मान के साथ कहना चाहता हूँ कि हर प्रकार के पशुओं को भी केयर की जरूरत होती है, इलाज की जरूरत होती है। कुछ पशुओं की किस्मत इतनी अच्छी होती है, या उनकी ब्रीड इतनी उत्तम होती है कि हर कोई उन्हें अपने घर में सुविधाजनक तरीके से पालते है, बहुत अधिक धन देकर खरीदे जाते है, उन्हें महंगे से महंगा भोजन कराया जाता है,
अच्छे से अच्छे बिस्तर पर सुलाते है, खूब आलीशान गाड़ियों में घुमाते है, इसके विपरित कुछ स्ट्रीट डॉग्स है, कुछ स्ट्रे कैटल है उनकी बेचारों की कोई केयर नहीं करना चाहते है और न ही उनके प्रति किसी की संवेदना होती है, कौन उन बेचारे बेजुबानों के भोजन पानी के बारे में विचार करते है। ये धरती माता सभी के लिए है, ये सूरज चांद तारे, ये सभी नदियां, ये वन जंगल, पेड़ पौधे भी तो सभी के लिए ही है। प्रकृति ने इंसानों को यह अधिकार नहीं दिया है कि वो बेचारे उन बेजुबान पशु पक्षियों के हिस्से पर भी अधिकार जमा लें और कहने लगें कि इन्हें जीवन जीने का कोई अधिकार नहीं है, इनका भाग भी इंसान ही भोगेगा। दोस्तों, इन सभी पशु पक्षियों को भी जीवन जीने का अधिकार है, जिसे हर इंसान को संवेदना के साथ अपनाना चाहिए।
अगर हम छोटे छोटे प्रयास कर दें तो ये स्ट्रीट डॉग्स या स्ट्रे कैटल भी सभी के साथ रह सकते है। बस चार ही कार्य करने है, जैसे;
1. स्ट्रीट डॉग्स को एंटी रेबीज के इंजेक्शन लगवाने है।
2. स्ट्रीट डॉग्स या स्ट्रे कैटल को न्यूट्रल कराना है।
3. जो बीमार हो उन्हें इलाज देना है।
4. उन्हें घर में बचा हुआ भोजन देना है।
बस यही तो कार्य है जिसे सरकारी सिस्टम आराम से कर सकता है। युवा दोस्तों, अगर मन हो या इच्छा शक्ति हो तो किसी भी जीव के जीवन को बचाते हुए बेहतर कार्य किए जा सकते है। मैं यहां एक बहुत ही सुंदर उदाहरण पेश कर रहा हूँ, हो सकता है इससे कुछ महानुभावों को कुछ समझ आ सकें , कुछ प्रेरणा मिल सके। मैं बात कर रहा हूँ बहुत सौम्य और संवेदनशील व्यक्तित्व की धनी डॉक्टर किरण सिंह जी की, जो चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के कम्युनिटी साइंस कॉलेज में प्रोफेसर तथा हेड ऑफ डिपार्टमेंट के पद पर कार्यरत है, जो स्ट्रीट डॉग्स व स्ट्रे कैटल के लिए विशेष अभियान चलाए हुए है।
आदरणीय डॉक्टर किरण सिंह जी ऐसा व्यक्तित्व है जिनके भीतर संवेदना वा केयरफुलनेस दैवी संपद के रूप में समाई हुई है, डॉक्टर साहिबा द्वारा काफी स्ट्रीट डॉग्स को न्यूट्रल कराया है, तथा सैंकड़ों स्ट्रीट डॉग्स को भोजन पानी तथा रहने की व्यवस्था करती है। उनका यह कार्य वन वूमेन आर्मी वाला है, जिसकी हम सभी प्रशंसा करते है, हमे उनके कार्यों पर गर्व है। जब एक व्यक्ति इतना बड़ा कार्य कर सकती है तो सिस्टम तो ऐसी व्यवस्था आराम से कर सकता है। सभी नागरिकों को डॉक्टर किरण सिंह के प्रशंसनीय कार्य से प्रेरणा लेनी चाहिए और सभी जीवों की संवेदना और सेवा भाव के साथ कार्य करना चाहिए। इस धरा के लिए सभी जीवों की जरूरत है, जैसे मनुष्य को धरती माता सब कुछ उपलब्ध कराती है, वैसे ही धरती माता की झोली में सभी जीवों के जीवन यापन के लिए सब कुछ है। आओ मिलकर सभी के साथ प्रेम तथा संवेदनशीलता के साथ व्यवहार करें।
जय हिंद, वंदे मातरम
लेखक
नरेंद्र यादव
नेशनल वाटर अवॉर्डी
यूथ एंपावरमेंट मेंटर
