जीवन में हुई गलतियों को छुपाएं नहीं, बल्कि उनको शेयर करें,तथा उनसे खुद वा दूसरों को भी बचाएं
mahendra india news, new delhi
लेखक
नरेंद्र यादव
नेशनल वाटर अवॉर्डी
यूथ डेवलपमेंट मेंटर
कहते है इंसान गलतियों का पुतला है, अंग्रेजी में कहावत है कि" टू एर इज ह्यूमन" अर्थात गलती करना मानवीय है। वास्तव में ये पूरा फ्रेज शायद 18 वीं शताब्दी में अलेक्जेंडर पॉप जो बहुत बड़े कवि थे, ने दिया था। वो फ्रेज था " टू एर इज ह्यूमन, टू फ़ॉरगिव इज डिवाइन", अर्थात गलती करना मानवीय स्वभाव माना जाता है और क्षमा करना डिविनिटी कि पहचान होती है। यहां यह भी कहा जाता है कि ये कहावत इससे भी पुरानी हो सकती है जो 1678 में थॉमस जॉन ने कही थी। मैं यहां ये इस लिए बता रहा हूं कि किसी व्यक्ति द्वारा गलती करना ,कोई अजीब बात नहीं है। हर इंसान गलती का पुतला है और वो गलती कर देता है,
इसके साथ ही माफ करना ईश्वर का आशीर्वाद हैं। एक इंसान चाहे वो बच्चा हो, चाहे किशोर हो या कोई युवा हो या फिर इसी आयु का कोई विद्यार्थी हो, वो सभी इंसान ही तो है उनके द्वारा भी गलती हो सकती है। ऐसा भी नहीं है कि किसी ने कभी गलती नहीं की, परंतु एक ही गलती बार बार करना, ये भी मानवीय नहीं है, क्योंकि इंसान होने का अर्थ ये भी है कि वो एक बार की गलती से सीखे और उसको दुबारा न करें। ऐसा भी नहीं है कि केवल कोई एक ही व्यक्ति ने गलती की हैं, हर इंसान परिस्थितिवश भी लगते करता है।
मैं यहां अक्सर कुछ गलतियां जो आमतौर पर किसी भी स्टूडेंट्स, किसी भी युवा, कोई बुजुर्ग या किसी भी इंसान द्वारा हो जाती है, वो भिन्न भिन्न रूप में होती है, परंतु हम उन्हें अपने परिवार, माता पिता, जागरूक नागरिकों तथा जिम्मेवार लोगों के साथ शेयर करने की बजाय छिपाने की इसलिए कौशिश करते है क्योंकि हमे लगता है जैसे इस प्रकार की गलती शायद हमने ही की है, शायद वो पहली बार हुई है तथा वो नहीं होनी चाहिए थी। मुझे ऐसा लगता है जैसे हर गलती करने वाला बच्चा, विद्यार्थी, युवा , बुजुर्ग यही सोचता है कि ये गलती पहली बार हुई है और किसी और ने इसे कभी नहीं किया है। हम अपनी हर छोटी मोटी गलतियों, हमारी कैपेबिलिटीज या क्षमताओं को इसलिए जगजाहिर नहीं करते है क्योंकि हमारे भीतर हीनभावना होती है, हम शर्माते है, हमारे भीतर एक हिचक होती है, हम अपने को कमजोर समझते है। मैं यहां कुछ ऐसी आम गलतियों का जिक्र करना चाहता हूँ जो आमतौर हम किसी भी रूप में होते हुए करते है, जो बड़ी बात तो होती है लेकिन वो छुपाने के लिए नहीं होती है। वो गलतियां पहले भी होती आई है और सदा करते रहेंगे,
परंतु उनको जानना अवश्य है जो निम्न है;
1. हम डिजिटल फ्रॉड में फंस जाते है, और उन्हें शेयर नहीं कर पाते है, क्योंकि हम मूर्ख नहीं कहलाना चाहते है।
2. किसी विद्यार्थी द्वारा अपनी की जा रही पढ़ाई में अक्षम होने को बताने में शर्म महसूस करते है।
3. कभी कोई व्यक्ति किसी प्रकार के हनी ट्रैप में फंस जाते है और अपने परिवार के लोगों के साथ साझा करने में हिचकते रहते है तथा लाखों रुपए तक गवां देते है।
4. विद्यार्थी कई बार किसी ऐसी समस्या से जूझते है, जिसमें उनकी पढ़ाई, उनके द्वारा लिए गए सब्जेक्ट, कोई विशेष स्ट्रीम, जिसे वो पढ़ना नहीं चाहते है लेकिन अपनी दिक्कत को बता नहीं पाते है और इतने कुंठित हो जाते है कि अपनी जान भी गवां देते है।
5. कोई विद्यार्थी कभी कभी किसी गलत दोस्तों के चंगुल में फंस जाते है, वो परेशान रहते है लेकिन कोई छुटकारा नहीं मिलता है, अगर वो बात अपने परिवार के साथ साझा कर दे तो उसका हल निकल सकता है।
6. कई बार मातापिता अपने बच्चों को कोई अलग विषय पढ़ाना चाहते है लेकिन बच्चे नहीं पढ़ना चाहते है, परंतु उस बात को हम बता नहीं पाते हैं।
7. हमारे समाज में कुछ लोग बड़ी गलती कर देते है लेकिन उन्हें वो स्वीकार करके, उनका समाधान ढूंढने वा करने से हिचकते हैं।
8. हम अपनी कुंठा से खुद ही जूझते है उन्हे शेयर ना करके उन्हें इतना बड़ा कर लेते है कि वो काबू से बाहर हो जाती है तथा हम सुसाइड तक पहुंच जाते है।
9. मातापिता अपने बच्चों को सुनना नहीं चाहते है, उन्हें नकार देते है, या कह देते है कि समय नहीं है और उन्हें इग्नोर करते रहते हैं, इसलिए बच्चे अपनी बात कहने से पीछे हट जाते है।
10. हम अपनी फीलिंग को अपने परिवार के साथ शेयर करने से शर्माते है या हिचकते हैं।
11. बहुत से अवसरों पर हमारे युवा विद्यार्थी अपने मातापिता से झूठ बोलकर अपने शिक्षण संस्थानों से बंक मारकर की गई गलतियों को छुपाते हैं।
12. कई बार युवा विद्यार्थी किन्हीं अपराधी प्रवृति के साथियों के चक्र में फंस जाते है और वहां से निकलने में समस्या होती है, ऐसी गतिविधियों को भी छुपाते हैं, इसमें उन्हें हिचक होती हैं।
13. आजकल बच्चे ही नहीं, बल्कि अच्छे खासे समझदार लोग भी डिजिटली अरेस्ट हो जाते हैं और उनके चंगुल में फंसकर लाखों रुपए गवां देते हैं।
14. कई बार स्कूल्स कॉलेज में बच्चों के साथ बूलिंग होती है और युवा विद्यार्थी अपने पेरेंट्स को बताने में शर्माते है तथा हिचकते हैं।
इस धरती पर जिस भी इंसान का जन्म होता है वो कभी ना कभी गलती करता है, गलतियां किए बगैर रह नहीं सकता है। जितनी भी ऊपर परिस्थितियां दी गई है वो कभी ना कभी हमारे युवा विद्यार्थी या दूसरे इंसान गलतियां करते है। ऐसी परिस्थितियों से गुजरते है, लेकिन इसका अर्थ ये नहीं है कि हम उन्हें अपने ही दोस्तों या परिवार के साथ इसलिए शेयर ना करे कि शायद ये पहली बार हमने ही की है।
जीवन में अनजाने में, उत्साह में , बहकावे में आकर, किसी के उकसाने पर, किसी को इंप्रेस करने चक्र में हम अक्सर कुछ गलतियां कर बैठते है या फिर जानकारी के अभाव में, किसी प्रकार के लालच में, द्वेष में या फिर मोह में फंस कर गलतियां का देते है, या फिर उद्वेग अथवा क्रोध में गलतियां कर देते है और फिर उनको छिपा कर और बड़ी गलती करते है। इसलिए मेरा ऐसा कहना है कि हमे अपनी गलतियों पर पर्दा डालने या छिपाने से अच्छा हैं कि हम उन्हें अपने परिवार के साथ साझा करे, ताकि वो भविष्य में ना हो। हम उनपर पछतावा कर सके और दूसरों को भी ऐसी गलतियां करने से बचा सकें। हम सभी इंसान होने के कारण ऐसी गलतियां जो हमने पहले डिसकस की है, अकसर कर बैठते है, इसलिए पुनः यही कहना है कि उन्हें छिपाएं नहीं, बल्कि साझा करें, उनका हल निकाले, तथा दूसरों को ऐसी गलतियां करने से बचाएं।
जय हिंद, वंदे मातरम
