SIRSA में एनडीआरएफ व सिविल डिफेंस की टीम द्वारा नदी में डूब रहे आठ लोगों को किया रेस्क्यू
राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण तथा हरियाणा राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग के दिशा-निर्देशन में जिला प्रशासन द्वारा गांव पनिहारी के निकट घग्गर के तटबंध के पास और सिरसा-रानियां-डबवाली हाईवे पर मीरपुर के निकट बाढ़ आपदा पर मॉक एक्सरसाइज का आयोजन किया गया। इस अभ्यास का उद्देश्य बाढ़ जैसी आपदा की स्थिति में विभिन्न विभागों के बीच तालमेल स्थापित करना तथा राहत एवं बचाव कार्यों की तैयारियों का आकलन करना था।
मॉक एक्सरसाइज के दौरान बाढ़ की आपात स्थिति का वास्तविक परिदृश्य तैयार किया गया। लघु सचिवालय में बने कंट्रोल रूम में सूचना प्राप्त हुई कि गांव पनिहारी के पास घग्गर नदी के बांध में दरार आ गई है तथा कुछ लोगों के नदी में गिरने की सूचना है। इसके बाद कंट्रोल रूम ने संबंधित विभागों को सूचना प्रेषित कर दी। कुछ ही देर में एंबुलेंस व पुलिस की टीमें पहुंच गई।
इसी दौरान अतिरिक्त उपायुक्त अर्पित संगल, एसडीएम राजेंद्र कुमार, डीएसपी सुभाष चंद्र, एनडीआरएफ के अधिकारी अनिल कुमार, सैन्य अधिकारी विशाल सागर मौके पर पहुंचे और उन्होंने बाढ़ बचाव प्रबंधों को और अधिक तेज करने के निर्देश दिए। एनडीआरएफ, सिविल डिफेंस व आर्मी के टीमें उपकरणों से लैस होकर मौके पर पहुंच गई और बचाव कार्य तेज कर दिया। जवानों ने विशेष रेस्क्यू उपकरणों एवं मोटर बोट की सहायता से नदी में सर्च एवं रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया।
इस दौरान नदी में डुब रहे आठ लोगों को प्रशिक्षित टीमों ने नदी से बाहर निकाला, इसके बाद उन्हें फस्टएड देते हुए दो को नागरिक अस्पताल तथा छह को पीएचसी पनिहारी भेजा गया। अधिकारियों को मौके पर मौजूद बीडीपीओ हरीश कुमार ने मौके के हालात बताए। एनडीआरएफ की तरफ से राहत कैंप भी लगाया गया। मौके पर सिंचाई, बिजली, स्वास्थ्य, अग्रिशमन व ट्रैफिक पुलिस की टीमें भी तैनात रही।
मॉक एक्सरसाइज के ओवरऑल इंचार्ज एवं अतिरिक्त उपायुक्त अर्पित संगल ने बताया कि हर वर्ष मानसून सीजन के दौरान बाढ़ की संभावनाओं को देखते हुए जिला प्रशासन द्वारा पहले से तैयारियां सुनिश्चित की जाती हैं। उन्होंने कहा कि आपदा के समय राहत एवं बचाव कार्यों में समय सबसे महत्वपूर्ण होता है, इसलिए सभी विभागों के बीच बेहतर समन्वय और त्वरित प्रतिक्रिया अत्यंत आवश्यक है। इस प्रकार की मॉक एक्सरसाइज से विभिन्न विभागों की कार्यप्रणाली, संसाधनों तथा आपातकालीन प्रतिक्रिया क्षमता का परीक्षण किया जाता है।
अतिरिक्त उपायुक्त ने कहा कि जिला प्रशासन आमजन की सुरक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और बाढ़ जैसी किसी भी आपदा से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जा रही हैं। उन्होंने आमजन से अपील करते हुए कहा कि बरसात के मौसम में नदी, नहरों, ड्रेनों एवं जलभराव वाले क्षेत्रों के आसपास सावधानी बरतें तथा किसी भी आपात स्थिति में तुरंत प्रशासन को सूचित करें।
मॉक एक्सरसाइज के दौरान लघु सचिवालय में जिला स्तरीय ऑपरेशन सेंटर स्थापित किया गया, जहां से पूरे अभियान की मॉनिटरिंग की गई। इसके अलावा शहीद भगत सिंह स्टेडियम में स्टेजिंग एरिया बनाया गया, जहां राहत एवं बचाव कार्यों में इस्तेमाल होने वाले संसाधनों, उपकरणों तथा टीमों की तैनाती सुनिश्चित की गई।
मॉक एक्सरसाइज के दौरान पुलिस विभाग द्वारा क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था एवं यातायात नियंत्रण का कार्य संभाला गया, जबकि अग्निशमन विभाग की टीम को किसी भी आकस्मिक स्थिति से निपटने के लिए तैयार रखा गया। सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने नदी के जलस्तर तथा संभावित खतरे वाले क्षेत्रों की जानकारी साझा की। वहीं बिजली विभाग द्वारा भी आवश्यक सुरक्षा उपायों को लेकर सतर्कता बरती गई। मॉक एक्सरसाइज के दौरान ही सिविल डिफेंस की टीम द्वारा घर में प्रयुक्त होने वाले सामान से डूब रहे व्यक्ति को बचाने में मददगार बनने के तरीके बताए। इस दौरान गांव पनिहारी में सिंचाई विभाग के एक्सईएन संदीप शर्मा, बिजली विभाग के एक्सईएन जीत राम, ट्रैफिक एसएचओ धर्मचंद, पंचायत समिति चेयरमैन जसवंत सिंह भोला, पंचायत भाग से सचिव अजयंत गोदारा, दिनेश पारीक, गांव के सरपंच प्रतिनिधि रेशम सिंह मौजूद रहे।
मीरपुर के पास घग्गर के ओवरफ्लो होने की आई सूचना, बचाव टीमों ने छतिग्रस्त सडक़ को किया ठीक
पनिहारी के बाद दूसरी मॉक एक्सरसाइज मीरपुर के समीप घग्गर तटबंध पर की गई, जहां रानियां, डबवाली मार्ग के नदी के ओवरफ्लो होने के कारण छतिग्रस्त होने की सूचना मिली। इसके बाद प्रशासनिक अमला एसडीएम राजेंद्र सिंह के नेतृत्व में मौके पर पहुंचा। यहां राहत एवं बचाव कार्य करते हुए नदी में रिसाव और ओवरफ्लो को रोकने की मॉक एक्सरसाइज की गई। इस दौरान तहसीलदार प्रदीप कुमार, सरपंच वेद प्रकाश, ग्राम सचिव विक्रम सिंह, नंबरदार वजीर चंद, सिविल लाइन थाना प्रभारी मौके पर पहुंचे। प्रशासनिक अधिकारियों ने जिला स्तरीय कंट्रोल रूम में बैठ कर निगरानी की और आवश्यक दिशा निर्देश दिए।
