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सिरसा में डीडीए का पद खाली होने से किसान परेशान: भारतीय किसान एकता ने मुख्यमंत्री के नाम उपायुक्त को सौंपा मांग पत्र

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 mahendra india news, new delhi
भारतीय किसान एकता (बीकेई) ने जिला सिरसा में उप कृषि निदेशक (डीडीए) के स्थायी पद पर नियमित अधिकारी की तुरंत नियुक्ति करने की मांग को लेकर प्रदेश के मुख्यमंत्री और उपायुक्त सिरसा के नाम एक ज्ञापन (मांग पत्र) सौंपा है। संगठन के प्रदेशाध्यक्ष लखविंदर सिंह औलख ने प्रेस को जारी बयान में बताया कि भौगोलिक क्षेत्रफल और कृषि भूमि के मामले में सिरसा प्रदेश का सबसे बड़ा जिला है, जो राज्य की कुल कृषि भूमि का लगभग 10 प्रतिशत हिस्सा कवर करता है। कपास, धान और गेहूं उत्पादन में अग्रणी होने के कारण यहां कृषि विभाग का कार्यभार अत्यंत व्यापक है। उन्होंने गहरा रोष व्यक्त करते हुए कहा कि इतने बड़े जिले में पिछले लंबे समय से उप कृषि निदेशक (डीडीए) का स्थायी पद खाली पड़ा है और फतेहाबाद के डीडीए को इसका अतिरिक्त प्रभार (चार्ज) सौंपा गया है। दो बड़े जिलों का जिम्मा एक ही अधिकारी के पास होने से सिरसा जिले के प्रशासनिक व विभागीय कार्य बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं।

 

स्थायी डीडीए न होने से किसानों को आ रही ये प्रमुख समस्याएं:
खरीफ 2025 के फसल बीमा प्रीमियम वापसी व क्लेम विवादों के निपटारे हेतु जिला स्तरीय अनुश्रवण समिति की बैठकें न होने से सैकड़ों किसान मुआवजे से वंचित हैं। पराली सीजन के दौरान बेलर, सुपर सीडर आदि यंत्रों की सब्सिडी व किसानों की शिकायतों का निस्तारण नहीं हो पा रहा है।


 'मेरी फसल मेरा ब्योरा' तथा धान की सीधी बिजाई प्रोत्साहन राशि का भौतिक सत्यापन व पोर्टल संबंधी समस्याएं लंबित हैं। गेहूं व सरसों की बिजाई हेतु गांवों में जागरूकता शिविर लगाने और गुणवत्तापूर्ण बीज की उपलब्धता सुनिश्चित करने में बाधा आ रही है। डीएपी, यूरिया, बीज और कीटनाशकों की सैंपलिंग, कालाबाजारी पर रोक व लाइसेंसिंग प्रक्रिया धीमी पड़ गई है।

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लखविंदर सिंह औलख ने कहा कि इतने बड़े कृषि क्षेत्र में 'पार्ट-टाइम' अधिकारी से काम चलाना किसानों के साथ सरासर अन्याय है। संगठन ने पुरजोर मांग की है कि सिरसा में तुरंत प्रभाव से स्थायी एवं स्वतंत्र उप कृषि निदेशक की नियुक्ति की जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार व प्रशासन ने जल्द स्थायी अधिकारी की नियुक्ति नहीं की, तो भारतीय किसान एकता को विवश होकर जनहित में संघर्ष व आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ेगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन व प्रशासन की होगी। इस मौके पर बीकेई प्रदेश महासचिव अंग्रेज सिंह कोटली, मनजीत सिंह भदोल, जगदेव सिंह रघुआणा, हरभेत सिंह शमशाबादपट्टी मौजूद रहे।