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फूलगोभी की किसान ऐसे करें खेती, कम टाइम में होगी धन दौलत की बारिश

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Farmers should cultivate cauliflower in this way, there will be a rain of wealth in a short time
mahendra india news, new delhi

बहुत से किसान सब्जियों की खेती करते हैं। इससे किसानों को अधिक मुनाफा भी होता है। वैसे इस मौसम में बहुत सी खेती का उत्पादन लिया जा सकता है। वैसे फूलगोभी ठंडी जलवायु के लिए खास सब्जी की फसल है। कृषि वैज्ञानिक डा. देवेंद्र जाखड़ के मुताबिक फूलगोभी के लिए 15 से 25 डिग्री तापमान सबसे बढ़िया माना जाता है. 

इसके लिए दोमट मिट्टी और कार्बनिक पदार्थों से भरपूर मिट्टी होनी चाहिए. साथ ही मिट्टी का पीएच मान 6 से 7.5 के बीच होना चाहिए.। किसान अधिक पैदावार लेने के लिए अच्छी किस्म के बीजों का चुनाव करना बहुत ही जरूरी है. बीजों को बोने से पहले फफूंदनाशक से उपचारित करें, ताकि हर पौधे रोगों से सुरक्षित रहें. बीजों को नर्सरी में बोकर 25 दिन से 30 दिन बाद खेत में रोपाई करने से अधिक बेनिफिट्स मिलता है.

कृषि वैज्ञानिक डा. देवेंद्र जाखड़ ने बताया कि खेत की मिट्टी को अच्छी तरीके से जोतकर भुरभुरी बना लें। इसके बाद गोबर की खाद या कम्पोस्ट अच्छी मात्रा में डाल दें, खेत में उचित नाली-नालियां बना लें और पानी का निकास आसानी से हो सके। उन्होंने ये भी बताया कि फूलगोभी को नमी की जरूरत होती है, लेकिन अधिक पानी नुकसान कर सकता है। 

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उन्होंने सिंचाई के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि पहली सिंचाई रोपाई के तुरंत बाद करें, इसके बाद हर 8 से 10 दिन के बाद हल्की सिंचाई करें. पौधों की निराई-गुड़ाई नियमित रूप से करें ताकि खरपतवार न पनपें.


गोबर की खाद के साथ-साथ नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश का संतुलित मात्रा में उपयोग करें, नाइट्रोजन की मात्रा 2  किस्तों में डालना फायदेमंद रहता है. इसका ध्यान देना चाहिए. फूलगोभी की फसल पर तना छेदक, माहू और झुलसा जैसे रोग अक्सर हमला करते हैं. इसके लिए वक्तवक्त पर दवाओं का छिड़काव करना चाहिए. जैविक उपायों में नीम का घोल या गोमूत्र का छिड़काव भी कारगर होता है.

उन्होंने जानकारी देते हुए ये भी बताया कि रोपाई के करीब 90 से 120 दिन बाद फूलगोभी की फसल कटाई के लिए तैयार हो जाती है. जब फूल सफेद और कसे हुए दिखें, तभी इन्हें तोड़ें. देर करने पर फूल पीले पड़ जाते हैं और बाज़ार भाव भी घट जाता है।