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सरकारी अस्पताल में महिला कर्मचारी ने खा लिया जहर, 3 चिकित्सकों व अन्य पर प्रताडऩा का आरोप; सुसाइड नोट भी मिला

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सरकारी अस्पताल में महिला कर्मचारी ने खा लिया जहर
mahendra india news, new delhi

हरियाणा प्रदेश में रोहतक जिले के सामान्य अस्पताल में ड्यूटी के दौरान डाटा एंट्री ऑपरेटर ने ड्यूटी स्थल बदलने के विवाद में कोई जहरीला पदार्थ निगल लिया। महिला को गंभीर हालत में पीजीआई रेफर किया गया है। घटना शनिवार दोपहर की बताई जा रही है। महिला ने जहर निगलने से पहले सुसाइड नोट लिखकर डॉ. हेमंत, डॉ. पुष्पेंद्र, डॉ. मधुलिका सहित 7 कर्मचारियों पर परेशान करने के आरोप लगाए हैं।

जानकारी के अनुसार झज्जर जिले की छोछी निवासी डाटा एंट्री ऑपरेटर रेखा ने एक सुसाइड नोट में लिखा कि वह डिस्पेंसरी में कार्य कर रही है। आरोप है कि नोडल इंचार्ज और सुपरवाइजर अमित मुझे परेशान कर रहे हैं। इस कारण उन्हें सुसाइड होने के लिए विवश होना पड़ रहा है। अगर मुझे कुछ हो जाता है तो सामान्य अस्पताल प्रशासन इसके लिए जिम्मेदार होगा।

बताया जा रहा है कि पीजीआई से परिजन रेखा को निजी अस्पताल ले गए। वहां उनका इलाज करवाया जा रहा है। सिविल सर्जन डॉ. रमेश चंद्र आर्य का क कि जिला स्तरीय कमेटी बनाकर इस घटना की जांच की जा रही है। इसके आधार पर ही कार्रवाई होगी। अभी वह खतरे से बाहर हैं।
 
महिला ने सुसाइड नोट में लगाए यह आरोप
डाटा एंट्री ऑपरेटर रेखा ने सुपरवाइजर अमित, संदीप, जतिन, नोडल इंचार्ज सन्नी पर मानसिक रूप से प्रताड़ित करने के आरोप लगाए हैं। शुक्रवार को उन्हें आयुष्मान में ड्यूटी करने के लिए कहा गया। वह 2 मई को जब आयुष्मान में ड्यूटी पर आईं तो डॉ. हेमंत ने दोपहर 12 बजे कहा कि आपकी ड्यूटी रात्रि में है। अब रात्रि में ही आना होगा। इस पर महिला ने कहा वह घर संभालने वाली एकलौती महिला है और उसे करीबन 35 किलोमीटर दूर से आना पड़ता है। घर में बच्चा भी छोटा है। उसकी देखभाल करनी होती है। इस कारण नाइट ड्यूटी पर नहीं आ सकती। 

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बताया जा रहा है कि बाद में रेखा ने सिविल अस्पताल के वरिष्ठ अधिकारी डॉ. पुष्पेंद्र व डॉ. मधुलिका से भी गुहार लगाई थी लेकिन कोई समाधान नहीं हुआ।


डाटा एंट्री ऑपरेटर रेखा ने सुसाइड नोट में सुपरवाइजर अमित पर धमकी देने के आरोप लगाए हैं। लिखा कि सुपरवाइजर कहती थी कि अगर नाइट ड्यूटी नहीं करोगी तो तुम्हारी हाजिरी नहीं लगेगी। नोडल इंचार्ज सन्नी और सुपरवाइजर अमित छुट्टी देने से भी इन्कार करते थे।

डॉ. मधुलिका, सीनियर डॉक्टर, सामान्य अस्पताल ने बताया कि समस्या को सुलझाने का प्रयास कर रहे थे। फिर भी यह कदम क्यों उठाया, इसका पता लगाया जा रहा है।