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पट्टे पर तालाब- जलाशय लेने वाले मत्स्य पालकों को दूसरे से पांचवें साल तक भी मिलेगी लीज राशि पर सब्सिडी

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Fish farmers leasing ponds and water bodies will receive a subsidy on the lease amount from the second to the fifth year as well

mahendra india news, new delhi

मत्स्य पालन विभाग द्वारा पंचायती तालाब और सरकारी जलाशयों को पट्टे पर लेने वाले पट्टेदारों को वित्तीय सहायता उपलब्ध करवाई जाती है। विभाग की तरफ से अनुसूचित जाति वर्ग से सम्बंधित पट्टेदारों को पहले साल की लीज राशि पर तो सहायता दी ही जाती है, इसके अलावा दूसरे से पांचवें वर्ष की लीज़ राशि पर सब्सिडी का प्रावधान किया गया है, ताकि मत्स्य पालक अपने व्यवसाय को जारी रखते हुए अपने कार्यक्षेत्र में और बेहतर आमदनी प्राप्त कर सके।

यह है अनिवार्य शर्त

योजना का लाभ लेने के लिए प्रार्थी के पास परिवार पहचान पत्र होना अनिवार्य है। इसके अलावा लाभार्थी हरियाणा राज्य का स्थाई निवासी व अनुसूचित जाति वर्ग से सम्बन्धित होना चाहिए। लाभार्थी को पट्टा राशी पर अनुदान द्वितीय वर्ष से 5 वर्ष तक ही प्रदान किया जाएगा। प्रति लाभार्थी के हिसाब से अधिकतम चार हेक्टेयर तक ही अनुदान योजना का लाभ दिया जाएगा। आवेदक की आयु 18 साल से कम नहीं होनी चाहिए। प्रार्थी किसी भी सरकारी या अर्ध सरकारी संस्था में कार्यरत भी नहीं होना चाहिए। लाभार्थी को इस योजना के तहत 40 हजार रुपए प्रति हैक्टेयर अथवा पट्टे की वास्तविक राशि का 40 प्रतिशत, जो भी कम हो अनुदान के रूप में प्रदान किया जाएगा। यह अनुदान केवल पंचायती तालाबों व सरकारी जलाशयों पर ही प्रदान किया जाएगा। इसके अलावा अधिसूचित जलक्षेत्र नदी नालों व नहरों की बोली उपरांत भी सफल बोलीदाता-पट्टेदार को अधिकतम पाँच लाख रुपये तक का अनुदान प्रदान किया जाएगा। 

यह चाहिए आवश्यक दस्तावेज़

योजना का लाभ लेने के लिए मत्स्य पालक एवं विभाग के बीच हुए अनुबंध पत्र की प्रति प्रस्तुत करनी होगी। इसके अलावा मत्स्य पालन के लिए मत्स्य पालक एवं पंचायत के बीच हुए अनुबंध पत्र भी लगाना होगा। वहीं जन्मतिथि व पहचान का प्रमाण पत्र, जाति प्रमाण पत्र होना अनिवार्य है। लाभार्थी के पास किसी भी सरकारी संस्थान से मत्स्य प्रशिक्षण से संबंधित प्रमाण पत्र भी होना चाहिए। इसके अलावा भूमि का रिकार्ड जैसे पंचायत का प्रस्ताव दस्तावेज और पंचायत की पट्टा रसीद, राजकीय व राष्ट्रीय मत्स्य बीज फार्म से मत्स्य बीज की खरीद की रसीद या वाउचर भी उपलब्ध कराना होगा। इसके साथ ही साइट या तालाब से संबंधित फ़ोटो भी प्रस्तुत करनी होगी।

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जिला मत्स्य अधिकारी जगदीश चंद्र ने कहा कि इस योजना के तहत पट्टेदारों को लीज राशि पर सब्सिडी मिलने से उनकी कार्यक्षमता में विस्तार होगा और अतिरिक्त वित्तीय मदद मिलने से मत्स्य पालन के क्षेत्र को बढ़ावा मिलेगा। यह योजना मत्स्य पालकों के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने और उन्हें आत्मनिर्भर बनने में सहायक साबित हो सकती है।