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वास्तविक उद्देश्य को भूलकर उपभोग और इन्द्रियों की तृप्ति में उलझा मनुष्य: स्वामी विवेकानंद महाराज

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Forgetting the real purpose, man is entangled in consumption and satisfaction of senses: Swami Vivekananda Maharaj

mahendra india news, new delhi
सिरसा। नई अनाज मंडी में स्वामी तुरीयानन्द सत्संग सेवा आश्रम में ब्रह्मलीन श्री श्री 1008 स्वामी तुरीयानन्द महाराज एवं ब्रह्मलीन श्री श्री 1008 स्वामी अचलानन्द गिरि जी महाराज की पावन स्मृति में दो दिवसीय वार्षिक समागम, संकीर्तन, संत प्रवचन एवं विशाल भंडारे का भव्य आयोजन श्रद्धा और भक्ति भाव के साथ किया गया। कार्यक्रम का आयोजन स्वामी तुरीयानन्द ट्रस्ट (रजि.) सहारनपुर तथा सिरसा की स्थानीय संगत के सहयोग से बड़े हर्षोल्लास के साथ सम्पन्न हुआ।

इस कार्यक्रम में मुख्य आश्रम सहारनपुर (उत्तर प्रदेश) के गद्दीनशीन श्री श्री 1008 स्वामी विवेकानन्द गिरि महाराज की अध्यक्षता व संरक्षण में दूर-दूर से आई संगत ने बड़ी संख्या में भाग लिया। दो दिवसीय इस आध्यात्मिक समागम में भजन-कीर्तन, सत्संग, संत प्रवचन तथा विशाल भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें श्रद्धालुओं ने बड़ी श्रद्धा के साथ भाग लेकर गुरु महाराज का आशीर्वाद प्राप्त किया। कार्यक्रम के दूसरे दिन की शुरूआत प्रात: हवन यज्ञ से हुई।

इसके पश्चात संगत के लिए अल्पाहार की व्यवस्था की गई और फिर संकीर्तन एवं संत प्रवचन का आयोजन किया गया। भजन-कीर्तन के दौरान पूरा वातावरण भक्ति रस से सराबोर हो गया और संगत ने गुरु महाराज के भजनों का आनंद लिया।अपने प्रेरणादायक प्रवचनों में स्वामी विवेकानन्द गिरि महाराज ने संगत को संबोधित करते हुए कहा कि आज के समय में मनुष्य अधिक उपभोग और इन्द्रियों की तृप्ति में उलझकर अपने जीवन के वास्तविक उद्देश्य को भूलता जा रहा है।

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उन्होंने कहा कि जब मनुष्य अनावश्यक भोग-विलास और इच्छाओं में फंस जाता है तो उसकी चेतना माया के प्रभाव में आ जाती है। इसलिए मनुष्य को चाहिए कि वह अपनी इन्द्रियों पर नियंत्रण रखते हुए शास्त्रों द्वारा बताए गए मार्ग पर चले और अपने जीवन को श्रेष्ठ कर्मों में लगाए।
महाराज जी ने कहा कि सच्चा साधक वही है, जो अपनी इन्द्रियों को वश में रखकर उन्हें भगवान की भक्ति और सेवा में लगाता है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे कछुआ आवश्यकता पड़ने पर अपने अंगों को अपने भीतर समेट लेता है और आवश्यकता पड़ने पर ही उन्हें बाहर निकालता है, उसी प्रकार मनुष्य को भी अपनी इन्द्रियों को नियंत्रित रखना चाहिए और उन्हें केवल अच्छे और धर्मपूर्ण कार्यों में ही लगाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि मनुष्य अपनी इन्द्रियों पर संयम रखे और प्रभु भक्ति में मन लगाए तो उसका जीवन स्वत: ही सफल और सुखमय हो जाता है। संतों का मार्गदर्शन मनुष्य को आध्यात्मिक उन्नति की ओर ले जाता है और समाज में नैतिकता व सदाचार की भावना को मजबूत करता है।

कार्यक्रम के अंत में स्वामी विवेकानन्द गिरि जी महाराज ने उपस्थित संगत एवं शहर के अनेक गणमान्य व्यक्तियों को आशीर्वाद प्रदान किया। इस अवसर पर भजन राम नाम के हीरे मोती के माध्यम से संगत पर आध्यात्मिक अमृत वर्षा की गई, जिसे सुनकर पूरा पंडाल भक्तिमय वातावरण से गूंज उठा। इस अवसर पर स्वामी तुरीयानन्द ट्रस्ट (रजि.) सहारनपुर के अध्यक्ष ओम प्रकाश अरोड़ा, उपाध्यक्ष महेन्द्रपाल डल्ला, महामंत्री प्रवीण वधावन, कोषाध्यक्ष अमित वत्ता, ज्वाइंट सेक्रेटरी सुभाष चंद मल्होत्रा, सिरसा के स्थानीय ट्रस्टी सुदर्शन बजाज तथा सेवा समिति सिरसा सहित शहर के कई गणमान्य व्यक्ति व बड़ी संख्या में संगत उपस्थित रही।

इस अवसर पर समाजसेवी आशीष बजाज ने कहा कि स्वामी विवेकानन्द गिरि जी महाराज के प्रेरणादायक प्रवचन समाज को संयम, सेवा और आध्यात्मिकता की राह पर चलने की प्रेरणा देते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे संतों का सान्निध्य समाज के लिए एक अमूल्य धरोहर है और उनके बताए मार्ग पर चलकर ही मनुष्य अपने जीवन को सफल बना सकता है।