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पुस्तक सामाजिक विज्ञान शिक्षण की विषय-वस्तु एवं शिक्षाशास्त्र का विधिवत विमोचन

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Formal launch of the book 'Social Science Teaching: Content and Pedagogy

Mahendra india news, new delhi

 चौधरी देवीलाल विश्वविद्यालय, सिरसा के कुलगुरु प्रो. विजय कुमार ने शिक्षा विभाग की शिक्षिकाओं द्वारा लिखित पुस्तक "सामाजिक विज्ञान शिक्षण की विषय-वस्तु एवं शिक्षाशास्त्र (Content Cum Pedagogy of Social Sciences)" का विधिवत विमोचन किया। इस अवसर पर कुलगुरु ने पुस्तक के लेखकों को बधाई देते हुए इसे शिक्षक शिक्षा एवं सामाजिक विज्ञान अध्ययन के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण योगदान बताया। यह पुस्तक शिक्षा विभाग की सहायक प्राध्यापक डॉ. पूनम, डॉ. इंदु बाला तथा सह-लेखिका पूजा द्वारा संयुक्त रूप से लिखी गई है। पुस्तक का प्रकाशन एआईआरओ पब्लिकेशन, ग्वालियर द्वारा वर्ष 2026 में किया गया है।


पुस्तक विमोचन के अवसर पर कुलगुरु प्रो. विजय कुमार ने कहा कि नई शिक्षा नीति के दौर में गुणवत्तापूर्ण शिक्षण सामग्री और शोध आधारित प्रकाशनों का विशेष महत्व है। विश्वविद्यालय के शिक्षक न केवल शिक्षण और शोध में उत्कृष्ट कार्य कर रहे हैं, बल्कि समाज और शिक्षा जगत की आवश्यकताओं के अनुरूप उपयोगी साहित्य का सृजन भी कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह पुस्तक शिक्षक शिक्षा से जुड़े विद्यार्थियों, शोधार्थियों एवं शिक्षकों के लिए एक उपयोगी मार्गदर्शक सिद्ध होगी।


डॉ. पूनम ने बताया कि पुस्तक में सामाजिक विज्ञान शिक्षण की विषय-वस्तु, शिक्षण विधियों, अधिगम प्रक्रियाओं, मूल्यांकन तकनीकों तथा आधुनिक शिक्षा शास्त्रीय दृष्टिकोणों को सरल एवं व्यावहारिक रूप में प्रस्तुत किया गया है। पुस्तक विशेष रूप से बी.एड., एम.एड. तथा शिक्षक शिक्षा कार्यक्रमों के विद्यार्थियों के लिए लाभदायक होगी। डॉ. इंदु बाला ने कहा कि पुस्तक का उद्देश्य सामाजिक विज्ञान शिक्षण को अधिक प्रभावी, रोचक एवं विद्यार्थी-केंद्रित बनाना है। इसमें राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप नवीन शैक्षणिक अवधारणाओं और व्यवहारिक पक्षों को भी शामिल किया गया है। सह-लेखिका पूजा ने बताया कि पुस्तक में सामाजिक विज्ञान शिक्षण के विभिन्न आयामों को समकालीन शैक्षिक आवश्यकताओं के अनुरूप प्रस्तुत किया गया है, जिससे यह शिक्षक प्रशिक्षण संस्थानों के लिए एक महत्वपूर्ण संदर्भ ग्रंथ के रूप में उपयोगी साबित होगी।

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उल्लेखनीय है कि पुस्तक के तीनों लेखक शिक्षा एवं शोध के क्षेत्र में सक्रिय हैं तथा राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अनेक शोध पत्र प्रकाशित कर चुके हैं। विश्वविद्यालय प्रशासन ने इस उपलब्धि को संस्थान की अकादमिक एवं शोध संस्कृति को सुदृढ़ करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है। इस अवसर पर परीक्षा नियंत्रक प्रोफेसर राजकुमार व कुलगुरु के निजी सचिव धर्मवीर उपस्थित रहे। 

 चौधरी देवीलाल विश्वविद्यालय, सिरसा के कुलगुरु प्रो. विजय कुमार ने शिक्षा विभाग की शिक्षिकाओं द्वारा लिखित पुस्तक "सामाजिक विज्ञान शिक्षण की विषय-वस्तु एवं शिक्षाशास्त्र (Content Cum Pedagogy of Social Sciences)" का विधिवत विमोचन किया। इस अवसर पर कुलगुरु ने पुस्तक के लेखकों को बधाई देते हुए इसे शिक्षक शिक्षा एवं सामाजिक विज्ञान अध्ययन के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण योगदान बताया। यह पुस्तक शिक्षा विभाग की सहायक प्राध्यापक डॉ. पूनम, डॉ. इंदु बाला तथा सह-लेखिका पूजा द्वारा संयुक्त रूप से लिखी गई है। पुस्तक का प्रकाशन एआईआरओ पब्लिकेशन, ग्वालियर द्वारा वर्ष 2026 में किया गया है।


पुस्तक विमोचन के अवसर पर कुलगुरु प्रो. विजय कुमार ने कहा कि नई शिक्षा नीति के दौर में गुणवत्तापूर्ण शिक्षण सामग्री और शोध आधारित प्रकाशनों का विशेष महत्व है। विश्वविद्यालय के शिक्षक न केवल शिक्षण और शोध में उत्कृष्ट कार्य कर रहे हैं, बल्कि समाज और शिक्षा जगत की आवश्यकताओं के अनुरूप उपयोगी साहित्य का सृजन भी कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह पुस्तक शिक्षक शिक्षा से जुड़े विद्यार्थियों, शोधार्थियों एवं शिक्षकों के लिए एक उपयोगी मार्गदर्शक सिद्ध होगी।


डॉ. पूनम ने बताया कि पुस्तक में सामाजिक विज्ञान शिक्षण की विषय-वस्तु, शिक्षण विधियों, अधिगम प्रक्रियाओं, मूल्यांकन तकनीकों तथा आधुनिक शिक्षा शास्त्रीय दृष्टिकोणों को सरल एवं व्यावहारिक रूप में प्रस्तुत किया गया है। पुस्तक विशेष रूप से बी.एड., एम.एड. तथा शिक्षक शिक्षा कार्यक्रमों के विद्यार्थियों के लिए लाभदायक होगी। डॉ. इंदु बाला ने कहा कि पुस्तक का उद्देश्य सामाजिक विज्ञान शिक्षण को अधिक प्रभावी, रोचक एवं विद्यार्थी-केंद्रित बनाना है। इसमें राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप नवीन शैक्षणिक अवधारणाओं और व्यवहारिक पक्षों को भी शामिल किया गया है। सह-लेखिका पूजा ने बताया कि पुस्तक में सामाजिक विज्ञान शिक्षण के विभिन्न आयामों को समकालीन शैक्षिक आवश्यकताओं के अनुरूप प्रस्तुत किया गया है, जिससे यह शिक्षक प्रशिक्षण संस्थानों के लिए एक महत्वपूर्ण संदर्भ ग्रंथ के रूप में उपयोगी साबित होगी।


उल्लेखनीय है कि पुस्तक के तीनों लेखक शिक्षा एवं शोध के क्षेत्र में सक्रिय हैं तथा राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अनेक शोध पत्र प्रकाशित कर चुके हैं। विश्वविद्यालय प्रशासन ने इस उपलब्धि को संस्थान की अकादमिक एवं शोध संस्कृति को सुदृढ़ करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है। इस अवसर पर परीक्षा नियंत्रक प्रोफेसर राजकुमार व कुलगुरु के निजी सचिव धर्मवीर उपस्थित रहे।