गांव गुसाईयाना में ग्वार की ट्रेनिंग का आयोजन: किसान मई के महीने में न करें ग्वार की बिजाई: डॉ. यादव
Mahendra india news] new delhi
खरीफ की फसल के सीजन को ध्यान में रखते हुए और ग्वार की अधिक पैदावार लेने के लिए किसानों को बिजाई से पूर्व ही कृषि विभाग सिरसा के खण्ड नाथूसरी चौपटा के अधिकारी व ग्वार विशेषज्ञ की संयुक्त टीम जागरूक करने में जुट गई है। नाथूसरी चौपटा के एटीएम डॉ. मदन सिंह की देखरेख में ग्वार विशेषज्ञ डा. बीडी यादव के सहयोग से खण्ड नाथूसरी चौपटा के गांव गुसाईयाना में ग्वार की ट्रेनिंग का आयोजन किया गया, जिसमें ग्वार की समय से पहले बिजाई न करने व जड़गलन रोग की रोकथाम जो इस क्षेत्र की गंभीर समस्या है, के प्रति किसानों को जागरूक किया गया। गोष्ठी में ग्वार विशेषज्ञ डा. बीडी यादव ने ग्वार फसल की उन्नत किस्मों, समय पर बिजाई, बीज उपचार व संतुलित खाद का प्रयोग के बारे में किसानों को अवगत कराया।
मई के महीनें में ग्वार की बिजाई न करने की सलाह:
ग्वार विशेषज्ञ डॉ. यादव ने किसानों से कहा ग्वार की बिजाई मई महीने में कदापि न करें। ऐसा करने से फसल की बढ़वार ज्यादा हो जाएगी और फसल गिरने की आशंका भी ज्यादा रहेगी और फल भी कम आएगा तथा नीचे की फलियां जो बनेगी वे सुकड़ कर सुख जाएंगी, उसका पैदावार पर विपरित असर आएगा।
बिजाई का उचित समय :
उन्होंने बताया कि ग्वार की बिजाई के लिए जून का दूसरा पखवाड़ा सबसे उचित है। सिंचित क्षेत्रों में जून के महीने में जब भी नहर के फालतू पानी की उपलब्धता हो तो ग्वार की बिजाई शुरू कर सकते हैं। बारानी क्षेत्रों में ग्वार की बिजाई मानसून की अच्छी बारिश आने पर ही करें।
जड़गलन रोग के लक्षण व उसकी रोकथाम:
ट्रेनिंग के दौरान किसानों से रूबरू होते हुए ग्वार विशेषज्ञ किसानों को बताया कि जड़गलन (उखेड़ा) रोग की फफूंद जमीन के अन्दर पनपती है, जो उगते हुए पौधों की जड़ पर आक्रमण करती है इससे पौधे की जड़ें काली पड़ जाती हैं तथा जमीन से पौधों की खुराक रूक जाती है। इस बीमारी की रोकथाम के लिए बीज उपचार ही एक मात्र हल बताया। इसके लिए 3 ग्राम कार्बन्डाजिम 50 प्रतिशत (बेविस्टीन) प्रतिकिलो बीज की दर से सुखा उपचारित 15 से 20 मिनट करने के बाद ही बिजाई करनी चाहिए। ऐसा करने से 80 से 95 प्रतिशत इस रोग पर काबू पाया जा सकता है। जड़गलन रोग का इलाज मात्र 15 रुपए बीज उपचार से संभव है, जोकि सस्ता और सरल उपाय है।
कौन सी किस्म की करें बिजाई:
उन्होंने किसानों से आग्रह किया कि ग्वार की अच्छी पैदावार लेने के उन्नतशील किस्में एचजी 365, एचजी 563 व एचजी 2 -20 की बिजाई उचित समय आने पर ही करने की सलाह दी। इसके बारे में उचित जानकारी लेने के लिए कृषि वैज्ञानिक व अधिकारी के संपर्क में रहें। खण्ड नाथूसरी चौपटा के एटीएम डॉ. मदन सिंह ने संबोधित करते हुए कहा कि बिजाई से पहले अपने खेत की मिट्टी व पानी की जांच अवश्य करवायें। इसके साथ-साथ उन्होंने खेती की पुरानी पद्धति छोड़कर नई तकनीक अपनाकर खेती करने पर विशेष जोर दिया। इस शिविर में 82 मौजूद किसानों को बीज उपचार के लिए दो एकड़ की वेबिस्टिन दवाई सैम्पल के तौर तथा एक जोड़ी दस्ताने हिन्दुस्तान गम एण्ड कैमिकल्स भिवानी की तरफ से दी गई। इस प्रोग्राम को आयोजित करने में गांव के पूर्व सरपंच विनोद कुमार का विशेष योगदान रहा। इस अवसर पर प्रश्नोतरी सभा का आयोजन करके पांच किसानों को सम्मानित किया गया। इस मौके पर गांव के प्रगतिशील किसान मुन्शीराम, बृजलाल, धन्नाराम, रामस्वरूप, बुधराम, अजय पूनिया आदि मौजूद रहे।
