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हरियाणा में सिंचाई व पीने के पानी की नहीं रहेगी समस्या, 678 नहरों का होगा कायाकल्प, विश्व बैंक देगा 4000 करोड़ का लोन

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mahendra india news, new delhi

हरियाणा प्रदेश में गर्मी के सीजन में सिंचाई तो दूर पीने के पानी की समस्या हो जाती है। इससे काफी परेशानी झेलनी पड़ती है। अब हरियाणा प्रदेश में जल क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में हरियाणा प्रदेश सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। सीएम नायब सिंह सैनी के नेतृत्व में तैयार की गई महत्वाकांक्षी 'जल संरक्षित हरियाणा' (वाटर सिक्योर हरियाणा) परियोजना को विश्व बैंक की मंजूरी मिल गई है।

आपको बता दें कि कुल 5714 करोड़ रुपये की इस परियोजना में चार हजार करोड़ रुपये का लोन विश्व बैंक उपलब्ध कराएगा। परियोजना में हरियाणा को 15 क्लस्टरों में बांटा गया है, जिनका कुल क्षेत्रफल लगभग 48.94 लाख एकड़ है।

इस परियोजना की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए सीएम नायब सैनी ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जल प्रबंधन की ऐसी योजनाएं तैयार की जाएं, जिनका लाभ सीधे खेतों और किसानों तक पहुंचे। प्रदेश में पानी की प्रत्येक बूंद का संरक्षण और उसका प्रभावी उपयोग सरकार की प्राथमिकता है।


7 जिलों में 28 हजार एकड़ भूमि को होगा सिंचाई लाभ
बता दें कि भूजल स्तर सुधारने के लिए भिवानी, जींद, कैथल, महेंद्रगढ़, रेवाड़ी, चरखी दादरी और सिरसा जिलों में 147 नई वाटर बाडी विकसित की जाएंगी। इससे वर्षा जल संचयन और भूजल पुनर्भरण को मजबूती मिलेगी।

इसके अतिरिक्त जींद में दो, कैथल में एक तथा गुरुग्राम के धनवापुर में एक सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) से उपचारित जल का पुन: उपयोग सुनिश्चित किया जाएगा। इस पहल से करीब 28 हजार एकड़ भूमि को सिंचाई लाभमिलेगा और इस पर 282.13 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।
 

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