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हरियाणा के सिरसा बनेगा झींगा पालन का बड़ा केंद्र: कलस्टर अप्रोच से ‘बीज से बाजार‘ तक मिलेगी मदद

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Haryana's Sirsa to become major shrimp farming hub: Cluster approach to help from seed to market

mahendra india news, new delhi
भारत सरकार मत्स्य पालन को न केवल बढ़ावा दे रही है, बल्कि इसे बड़े स्तर पर रोजगारपरक बनाने के लिए ठोस कदम उठा रही है। इसी कड़ी में केंद्र सरकार ने झींगा पालन को प्राथमिकता देते हुए देशभर में कुल 34 कलस्टर अधिसूचित किए हैं, जिनमें हरियाणा का सिरसा जिला भी शामिल है।


यह जानकारी मत्स्य पालन मंत्रालय भारत सरकार के सचिव डॉ. अभिलक्ष लिखी ने बुधवार को चौधरी देवीलाल विश्वविद्यालय में आयोजित कार्यशाला में उपस्थित अधिकारियों, किसानों व छात्रों को संबोधित करते हुए दी। इस दौरान मत्स्य विभाग के निदेशक पवन कुमार, उपायुक्त शांतनु शर्मा, एनएफडीबी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डा. विजय कुमार, हिसार रेंज के उपनिदेशक सुरेंद्र कुमार, सिरसा के जिला मत्स्य अधिकारी जगदीश चंद्र, जिला मत्स्य अधिकारी फतेहाबाद बलबीर कुमार, प्रो. जोगिंद्र सिंह, प्रो. एस.के गहलावत, प्रो. गीता राठी आदि अधिकारी उपस्थित थे।

मत्स्य पालन विभाग के संयुक्त सचिव सागर मेहरा व अन्य उच्च अधिकारी आनलाइन माध्यम से कार्यशाला से जुडे। मंच संचालन सहायक प्रो. डा. हरकृष्ण कंबोज ने किया। मत्स्य विभाग के निदेशक पवन कुमार ने हरियाणा में मत्स्य पालन की स्थिति व आगामी योजनाओं के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने बताया कि देशभर में झींगा उत्पादन में न केवल प्रथम स्थान पर है, बल्कि सबसे ज्यादा झींगा उत्पादक किसान भी सिरसा से संबंध रखते हैं।  

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कलस्टर अप्रोच से ‘बीज से बाजार‘ तक मिलेगी मदद
डॉ. लिखी ने किसानों से संवाद करते हुए कहा कि इन क्लस्टर्स का मुख्य उद्देश्य किसानों को समूह में काम करने के लिए ज्यादा से ज्यादा प्रेरित करना है। उन्होंने कहा हमारा लक्ष्य ‘बीज से लेकर बाजार‘ तक एक मजबूत चेन बनाना है। इन समूहों के माध्यम से किसानों को न केवल बेहतर तकनीक और बीज मिलेंगे, बल्कि उनके उत्पाद को सही बाजार दिलाने में भी सरकार मदद करेगी।


केंद्रीय सचिव ने किसानों से किया सीधा संवाद, जाने अनुभव और परेशानियां:
कार्यशाला में देशभर के वरिष्ठ अधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जुड़े। मत्स्य पालन मंत्रालय भारत सरकार के सचिव डा. अभिलक्ष लिखी ने उपस्थित किसानों और छात्रों को संबोधित किया और मत्स्य पालकों से सीधा संवाद कर उनके अनुभव और परेशानियां जानीं। इसी कडी में उन्होंने गांव रघुआना का भी दौरा किया। जहां पर उन्होंने किसान प्रीतपाल सिंह व मनप्रीत कौर के खेत में झींगा पालन व्यवसाय के बारे में जाना और उपस्थित किसानों से संवाद किया और झींगा पालन में आ रही परेशानियां भी जानी और उनके समाधान बारे अधिकारियों को निर्देश दिए। विभाग के अधिकारी बी.के. मेहरा ने भी आगामी योजनाओं और तकनीकी सहायता के बारे में विस्तार से जानकारी दी।


किसानों ने दिए तकनीक और बुनियादी ढांचे में सुधार के सुझाव:
 कार्यशाला में क्षेत्र के प्रगतिशील किसानों ने अपने अनुभव साझा किए और इस क्षेत्र में आ रही चुनौतियों को लेकर महत्वपूर्ण सुझाव दिए। इस पर मुख्यअतिथि ने किसानों की समस्या सुनते हुए अधिकारियों को धरातल पर काम करने के निर्देश दिए।


मत्स्य पालक सतविंद्र कौर, जगमीत सिंह, गुरप्रीत सिंह, मंजीत सिंह, आशिष शर्मा आदि ने सुझाव दिए कि अन्य कृषि उत्पादों की तरह झींगा की भी जियो-टैगिंग और जियो-फेंसिंग होनी चाहिए। इससे उत्पादों की प्रामाणिकता बढ़ेगी और किसानों को बाजार में बेहतर लाभ मिल सकेगा। वर्ष 2018 से झींगा पालन कर रहीं महिला किसान सतविंद्र कौर ने इस व्यवसाय को युवाओं के लिए एक सुनहरा अवसर बताया। उन्होंने कहा कि झींगा पालन उनके लिए किसी वरदान से कम नहीं है और यह युवाओं के लिए एक मुनाफे वाला बेहतर व्यवसाय साबित हो सकता है। स्वयं सहायता समूह के लिए बिमला सिंवर ने कार्यशाला में सुझाव रखा कि झींगा पालन के लिए महिला समूहों को पंचायती जमीन पट्टे पर दी जानी चाहिए, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं को आर्थिक रूप से स्वावलंबी बनने में मदद मिलेगी।