सिरसा में पहली बार हुआ बिना ओपन हार्ट सर्जरी के हृदय वाल्व का उपचार
mahendra india news, new delhi
सिरसा में पहली बार बैलून माइट्रल वाल्वोटॉमी (BMV) की सफल प्रक्रिया की गई। यह इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजी की एक उन्नत तकनीक है, जिसके जरिए माइट्रल वाल्व के संकुचन का उपचार बिना ओपन हार्ट सर्जरी के किया जाता है। यह प्रक्रिया आस्था हॉस्पिटल, सिरसा में संपन्न हुई। इसे जयपुर स्थित महात्मा गांधी हॉस्पिटल से आए डॉ. आदित्य गोयल ने सफलतापूर्वक किया।
बैलून माइट्रल वाल्वोटॉमी तकनीकी रूप से एक कठिन प्रक्रिया मानी जाती है, जिसमें हृदय के भीतर कैथेटर की सटीक स्थिति और बैलून के नियंत्रित विस्तार की आवश्यकता होती है। इसके लिए उच्च स्तर का प्रशिक्षण और अनुभव जरूरी होता है। इसे करने वाले विशेषज्ञों की संख्या सीमित है।
ऐसे में सिरसा में इसका सफलतापूर्वक किया जाना एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। माइट्रल स्टेनोसिस में हृदय का माइट्रल वाल्व ठीक से नहीं खुल पाता, जिससे रक्त प्रवाह बाधित हो जाता है। इसके कारण मरीज को सांस फूलना, जल्दी थकान, धड़कन तेज होना और कमजोरी जैसी समस्याएं होती हैं। इस प्रक्रिया में कैथेटर के माध्यम से बैलून को हृदय तक पहुंचाकर माइट्रल वाल्व पर फुलाया जाता है, जिससे संकुचन कम होता है और रक्त प्रवाह बेहतर हो जाता है। इसमें छाती खोलने या ओपन हार्ट सर्जरी की आवश्यकता नहीं होती।
ये होते हैं प्रमुख लाभ:
ओपन हार्ट सर्जरी से बचाव, बड़ा चीरा लगाने की जरूरत नहीं, कम इनवेसिव प्रक्रिया, अस्पताल में कम समय व तेजी से रिकवरी।
सिरसा में इस तरह की जटिल और विशेषज्ञता वाली वाल्व इंटरवेंशन प्रक्रिया का सफल होना क्षेत्र के लिए बड़ी उपलब्धि है। इससे मरीजों को अब आधुनिक उपचार के लिए बड़े शहरों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। चिकित्सकों के अनुसार, इस प्रक्रिया की सफलता सही मरीज चयन, अनुभवी विशेषज्ञ और सटीक तकनीकी कौशल पर निर्भर करती है।
