कैसे बढ़े चीनी के दाम? सरकार के फैसलों से घटेगी कीमत ?
mahendra india news, new delhi
फेस्टिव सीजन से पहले भारत में चीनी के बढ़ते दाम ने सरकार की चिंता बढ़ा दी है. भारत खुद चीनी का बड़ा प्रोड्यूसर देश है. बावजूद इसके बीते 2 महीनों में चीनी दाम में 40% से अधिक का इजाफा हुआ है. 46-48 रुपये किलो बिकने वाली चीनी आज 70 रुपये किलो तक पहुंच चुकी है. आरोप लग रहे हैं कि इथेनॉल में गन्ने के इस्तेमाल की वजह से देश में चीनी की कमी हो गई और दाम बढ़ गए. विपक्षी दलों के हमले शुरू हो गए हैं. जो बहस अब तक तेल और LPG पर हो रही थी, अब उसकी जगह चीनी की किल्लत ने ले ली है.
चीनी के बढ़ते दाम के बाद आरोप लगने लगे कि इथेनॉल में गन्ने का इस्तेमाल होने से चीनी पेराई के लिए गन्ने की कमी हो गई, जिससे चीनी का उत्पादन कम हुआ. मांग और सप्लाई में असंतुलन की वजह से चीनी के दाम बढ़ रहे हैं. इन आरोपों पर 21 अगस्त को सरकार ने फिर से बयान दिया और आंकड़े पेश किए. सरकारी दावे के मुताबिक इथेनॉल के लिए इस्तेमाल होने वाली चीनी का हिस्सा 2022-23 में लगभग 12% से घटकर 2025-26 में लगभग 9% रह गया है.अब अगला सवाल अगर इथेनॉल नहीं, तो फिर क्यों बिगड़ा चीनी का हिसाब-किताब?
मौसम की मार से गिरा गन्ने का उत्पादन:
अल नीनो के प्रभाव और कमजोर मानसून की वजह से गन्ने का उत्पादन गिरा है. गन्ने के फसल को काफी पानी की जरूरत होती है. गन्ने की 80 फीसदी खेती उत्तर प्रदेश, कर्नाटक, महाराष्ट्र में होती है. कमजोर मानसून से उत्पादन पर असर पड़ा है. मानसून के अलावा यूपी में गन्ने की CO-0238 वेराइटी में गेरुआ नाम के रोग की वजह से फसल को भारी क्षति हुई.
सरकार ने इन फैसलों से गिरेंगे चीनी के दाम?
1. सरकार ने चीनी के निर्यात को रोक दिया.
2. 10 लाख टन ड्यूटी फ्री चीनी आयात का फैसला किया
3. जमाखोरी रोकने के लिए सिर्फ 15 दिन का स्टॉक रखने का नियम बनाया गया
