ओरिएंट और उषा कंपनी के 1963 में खरीदे थे पंखे, 16 किलो होता था पुराने पंखे में वजन
गर्मी होते ही सबसे पहले पंखा याद आता है। जब पंखा चल रहा तो आसानी से चेन आ जाता है। पंखों के अंदर समय समय में बदलाव देखने को मिल रहा है। समय के साथ पंखे के डिजाइन से लेकर वजन में बड़ा बदलाव हुआ है। गांव कुताबढ़ निवासी नौबत राय मेहता ने वर्ष 1963 में उषा कंपनी का पंखा खरीदा। उस समय पंखे का वजन सुनकर आप हैरान हो जाएंगे। उस पंखे का वजन था 16 किलोग्राम। इसके बाद 1964 में ओरिएंट कंपनी का पंखा खरीदा। उस पंखे का वजन था 12 किलोग्राम।

अब भी अच्छे से चल रहे हैं पंखे
इतने साल बीत जाने के बाद भी पंखे अच्छे तरीके से चल रहे हैं। हरिश कुमार ने बताया कि प्रति वर्ष पंखे के बेरिंग बदल देते है। इसके बाद ग्रीस कर देते हैं। पंखे नए से भी अ‘छे चल रहे हैं। उन्होंने बताया कि अबके पंखों को दो या तीन किलो वजन होता है। जबकि उस समय के पंखे 12 किलोग्राम से 16 किलोग्राम तक था। यानि छोटे ब"ो पंखे को नहीं उठा सकते थे।

हो गया है लगाव
हरिश कुमार ने बताया कि कोठी के अंदर जगह जगह पंखे लगे हुए हैं। मगर हमारा लगाव पुराने पंखों से ’यादा है क्योंकि इन पंखों से पिता की याद जुड़ी हुई है। हमेशा पंखों को चलते समय काफी खुशी मिलती है।

